रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटर शिविंदर सिंह 740 करोड़ रु की धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार

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रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटर शिविंदर सिंह 740 करोड़ रु की धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार

नई। रैनबैक्सी के पूर्व प्रवर्तक शिविंदर सिंह को दिल्ली पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) ने गुरुवार को हिरासत में ले लिया। रेलीगेयर ने चारों पर 740 करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप लगाया है। गिरफ्तारी दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने की है। सिंह भाइयों ने अपनी दवा कंपनी रैनबैक्सी को जापान की एक दवा निर्माता कंपनी के हाथों 4.6 बिलियन डॉलर में बेच दी थी।    

Ranbaxy Ex Promoter Shivinder Singh Arrested By Delhi Police In Fraud Case :

शिविंदर-मलविंदर फोर्टिस विवाद में भी आरोपी

साल 2016 में दोनों भाइयों ने फोर्ब्स की 100 सबसे अमीर भारतीयों की लिस्ट में 92वें नंबर पर जगह बनाई थी। उस वक्त दोनों की संपत्ति 8,864 करोड़ रुपए थी। पिछले साल शिविंदर और मलविंदर सिंह पर आरोप लगे कि उन्होंने फोर्टिस के बोर्ड के अप्रूवल के बिना 500 करोड़ रुपए निकाल लिए। फरवरी 2018 तक मलविंदर फोर्टिस के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और शिविंदर नॉन-एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरमैन थे। फंड डायवर्ट करने के आरोपों के बाद दोनों को बोर्ड से निकाल दिया गया। शिविंदर और मलविंदर सिंह ने 1996 में फोर्टिस हेल्थकेयर की शुरुआत की थी।

रैनबैक्सी की डील भी विवादित रही

जापान की दवा कंपनी दाइची सैंक्यो ने 2008 में मलविंदर-शिविंदर सिंह से रैनबैक्सी को खरीदा था। बाद में दाइची ने आरोप लगाया कि सिंह बंधुओं ने रैनबैक्सी के बारे में अहम जानकारियां छिपाईं। उसने सिंगापुर ट्रिब्यूनल में शिकायत की थी।

नई। रैनबैक्सी के पूर्व प्रवर्तक शिविंदर सिंह को दिल्ली पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) ने गुरुवार को हिरासत में ले लिया। रेलीगेयर ने चारों पर 740 करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप लगाया है। गिरफ्तारी दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने की है। सिंह भाइयों ने अपनी दवा कंपनी रैनबैक्सी को जापान की एक दवा निर्माता कंपनी के हाथों 4.6 बिलियन डॉलर में बेच दी थी।     शिविंदर-मलविंदर फोर्टिस विवाद में भी आरोपी साल 2016 में दोनों भाइयों ने फोर्ब्स की 100 सबसे अमीर भारतीयों की लिस्ट में 92वें नंबर पर जगह बनाई थी। उस वक्त दोनों की संपत्ति 8,864 करोड़ रुपए थी। पिछले साल शिविंदर और मलविंदर सिंह पर आरोप लगे कि उन्होंने फोर्टिस के बोर्ड के अप्रूवल के बिना 500 करोड़ रुपए निकाल लिए। फरवरी 2018 तक मलविंदर फोर्टिस के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और शिविंदर नॉन-एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरमैन थे। फंड डायवर्ट करने के आरोपों के बाद दोनों को बोर्ड से निकाल दिया गया। शिविंदर और मलविंदर सिंह ने 1996 में फोर्टिस हेल्थकेयर की शुरुआत की थी। रैनबैक्सी की डील भी विवादित रही जापान की दवा कंपनी दाइची सैंक्यो ने 2008 में मलविंदर-शिविंदर सिंह से रैनबैक्सी को खरीदा था। बाद में दाइची ने आरोप लगाया कि सिंह बंधुओं ने रैनबैक्सी के बारे में अहम जानकारियां छिपाईं। उसने सिंगापुर ट्रिब्यूनल में शिकायत की थी।