‘राजनीतिक माफिया’ ने की होगी पत्रकार रंजन की हत्या

नई दिल्ली: भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) की एक तयान्वेषी कमेटी के मुताबिक बिहार के पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या उनकी आलोचनात्मक रिपोर्टिंग को लेकर ‘‘राजनीतिक माफिया’ ने की होगी। पीसीआई ने पिछले हफ्ते तयान्वेषी कमेटी की रिपोर्ट प्राप्त की। पीसीआई को एक और तयान्वेषी रिपोर्ट मिली है जो झारखंड के पत्रकार अखिलेश प्रताप सिंह की हत्या के बारे में है जिसके मुताबिक एक नक्सली संगठन द्वारा पैसे मांगे जाने को लेकर उनकी हत्या हुई होगी।

पीसीआई ने न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) सीके प्रसाद की अध्यक्षता में नौ सितंबर को हुई एक बैठक में पत्रकारों के खिलाफ आपराधिक मानहानि के मामलों में हुई वृद्धि पर भी चिंता जताई। साथ ही, ऐसे मामलों का ब्यौरा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से मंगाने का फैसला किया गया है। पीसीआई ने यहां जारी एक बयान में कहा है कि बैठक में दो पत्रकारों दैनिक हिन्दुस्तान के सीवान ब्यूरो प्रमुख राजदेव रंजन और झारखंड में चतरा के टीवी पत्रकार अखिलेश प्रताप सिंह की हत्या के बारे में दो अलग-अलग तयान्वेषी रिपोर्ट प्राप्त की। बयान में कहा गया है कि तयान्वेषी कमेटी ने यह पाया कि आलोचनात्मक खबरों को लेकर राजदेव रंजन की राजनीतिक माफिया ने हत्या की थी।

वहीं, दूसरी ओर आखिलेश प्रताप की हत्या नक्सली संगठन के पैसे मांगने के चलते हुई होगी। पीसीआई ने मृतकों के परिवारों के लिए उचित मुआवजे की मांग की है। संबद्ध राज्य सरकारों से मीडिया में मौजूद भय को दूर करने के लिए कदम उठाने का अनुरोध किया है।पत्रकारों के खिलाफ आपराधिक मानहानि के मामलों में आई तेजी पर चिंता जताते हुए पीसीआई ने कहा कि इसने प्रेस के खिलाफ 148 शिकायतों और प्रेस द्वारा अधिकारियों के खिलाफ दर्ज कराई गई 38 शिकायतों पर फैसला दिया है। इसने प्रेस परिषद अधिनियम, 1978 के तहत प्राथमिक स्तर पर 558 मामलों का निपटारा किया है।