रेप पीड़िता से सबूत मांगना, जले पर नमक छिड़कना

नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि रेप की शिकार बच्ची को दुष्कर्म में सहयोगी कहना सम्पूर्ण स्त्री जाति का अपमान है। किसी आदमी के हवस का शिकार बनी बालिका से उसके बयान के अलावा अन्य सबूत मांगना जले पर नमक छिड़कना है। छोटी उम्र की बालिकाओं से रेप की वारदात को संदेह की नजर से देखना ठीक नहीं है। किसी रिश्तेदार के खिलाफ बलात्कार का मुकदमा दर्ज करना आसान नहीं है, क्योंकि रेप का केस दर्ज कराने वाले पर ही बदनुमा दाग लगने की आशंका बनी रहती है।




जस्टिस अर्जन कुमार सीकरी और अभय मनोहर सप्रे की बेंच ने नौ साल की बच्ची से बलात्कार के मुजरिम चाचा को 12 साल की सजा सुनाते हुए कहा कि भारतीय परिवारों की पृष्ठभूमि में अपराध की संगीनता को देखा जाना चाहिए। अभियुक्त संजय कुमार उर्फ सनी को बरी करने के फैसले पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालतों को इस तय पर गंभीरता से सोचना चाहिए कि सगे-संबंधियों के खिलाफ दुष्कर्म का आरोप लगाना रूढ़िवादी परिवारों के लिए एक बेहद मुश्किम काम है। अपने ही चाचा के खिलाफ पुलिस तक जाने का मतलब पीड़िता तथा उसके परिवार के लिए भी एक दाग की तरह होता है। उसके दिमाग में हमेशा यह रहता है कि अगर अदालत में आरोप साबित नहीं हो पाया तो उसका समाज में क्या हश्र होगा।

आरोप साबित होने के बावजूद पीड़िता और उसके परिवार को समाज के दकियानूसी तानों का सामना करना पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसका मतलब यह नहीं कि पीड़िता के बयान पर आंख मूंदकर यकीन किया जाए। अगर जिरह के दौरान वह सभी तयों को सही-सही बयां करती है तो उससे अतिरिक्त सबूत मांगना अनुचित होगा। बलात्कार के लगभग 80 प्रतिशत मामलों में जान-पहचान के लोग ही संलिप्त पाए जाते हैं। अदालत ने कहा कि समूचा आपराधिक न्यायिक तंत्र रेप पीड़िता को भयभीत करने वाला है। पीड़िता को संरक्षण और सुरक्षा प्रदान करने का कोई तंत्र विकसित नहीं किया गया है।




आपराधिक न्यायिक सिस्टम में सुधार की सख्त जरूरत है। पीड़िता को केंद्र में रखकर न्यायिक व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। रेप पीड़िता और खासकर बच्चियों पर इसका बहुत लंबे समय तक असर रहता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नौ साल की बच्ची से 2009 में उसके दादा-दादी के घर में रेप किया गया। उसके चाचा ने उसे तीन बार हवस का शिकार बनाया। चाचा की धमकी के कारण बच्ची ने माता-पिता को कुछ नहीं बताया। तीन साल बाद डॉक्टर की सक्रियता के कारण बलात्कार का रहस्य सामने आया। बच्ची के पेट में लगातार दर्द से लेडी डॉक्टर ने ही बताया कि वह दुष्कर्म की शिकार हुई है। अन्य चिकित्सकीय जांच में बलात्कार की पुष्टि हुई। सुप्रीम कोर्ट ने 12 साल की सजा के साथ मुजरिम पर 50 हजार रपए जुर्माना भी किया।