J&K : बच्चियों से दुष्कर्म पर मृत्युदंड के अध्यादेश को मंत्रिमंडल की मंजूरी

जम्मू। जम्मू एवं कश्मीर मंत्रिमंडल ने बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने वालों को मौत की सजा देने वाले एक संशोधन मसौदे को मंजूरी दे दी। इस मसौदे को अध्यादेश के रूप में अधिसूचित करने के लिए राज्यपाल के समक्ष पेश किया जाएगा। अधिकारिक सूत्रों ने कहा कि राज्य की शीतकालीन राजधानी जम्मू में आपराधिक कानून अध्यादेश 2018(संशोधन) और बाल यौन हिंसा (J&K ) संरक्षण को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी। मंत्रिमंडल की बैठक में मंगलवार को यह फैसला लिया गया।

Rape With The Girls Under 12 Years Of Age Hanging Till Deathjk Govrment :

एक सूत्र ने कहा, “राज्यपाल द्वारा स्वीकृत किया जाने वाला अध्यादेश इस संबंध में केंद्र सरकार के प्रस्तावित कानून की तरह ही होगा और इसमें भी 12 वर्ष से कम उम्र की बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने पर मृत्युदंड की सजा का प्रावधान होगा।”

उन्होंने कहा, “इसमें 13 से 16 वर्ष की बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने वाले को भी मृत्युदंड दिए जाने का प्रावधान है। संशोधन के अनुसार, दुष्कर्म व यौन अपराधों के मामले को महिला पुलिस अधिकारी ही देखेगी और इन मामलों को दो महीने के भीतर पूरा करना होगा। उसके बाद निचली अदालत इस प्रक्रिया को छह माह में पूरा करेगी।”

जम्मू। जम्मू एवं कश्मीर मंत्रिमंडल ने बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने वालों को मौत की सजा देने वाले एक संशोधन मसौदे को मंजूरी दे दी। इस मसौदे को अध्यादेश के रूप में अधिसूचित करने के लिए राज्यपाल के समक्ष पेश किया जाएगा। अधिकारिक सूत्रों ने कहा कि राज्य की शीतकालीन राजधानी जम्मू में आपराधिक कानून अध्यादेश 2018(संशोधन) और बाल यौन हिंसा (J&K ) संरक्षण को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी। मंत्रिमंडल की बैठक में मंगलवार को यह फैसला लिया गया। एक सूत्र ने कहा, "राज्यपाल द्वारा स्वीकृत किया जाने वाला अध्यादेश इस संबंध में केंद्र सरकार के प्रस्तावित कानून की तरह ही होगा और इसमें भी 12 वर्ष से कम उम्र की बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने पर मृत्युदंड की सजा का प्रावधान होगा।" उन्होंने कहा, "इसमें 13 से 16 वर्ष की बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने वाले को भी मृत्युदंड दिए जाने का प्रावधान है। संशोधन के अनुसार, दुष्कर्म व यौन अपराधों के मामले को महिला पुलिस अधिकारी ही देखेगी और इन मामलों को दो महीने के भीतर पूरा करना होगा। उसके बाद निचली अदालत इस प्रक्रिया को छह माह में पूरा करेगी।"