बलात्कारी मौलाना गिरफ्तार, एक हत्या के मामले में सालों से था फरार

बलात्कारी मौलाना गिरफ्तार, एक हत्या के मामले में सालों से था फरार

उत्तर प्रदेश पुलिस ने आफताब नामक एक नकली मौलाना को गिरफ्तार किया है। इस अपराधी की वास्तविक पहचान 12000 रुपए के ईनामी आफताब उर्फ नाटे के रूप में सामने आई है, जो पिछले 32 साल से पुलिस की आंखों में धूल झोंक कर मौलवी के लिवास में प्रदेश के अलग अलग शहरों में जादू टोने की दुकान चला रहा था। उसने पुलिस के सामने 39 तलाक शुदा महिलाओं से हलाला के नाम पर शारीरिक शोषण करने की बात भी कबूली है।

इलाहाबाद के एसपी सिटी सिद्धार्थ शंकर मीणा के मुताबिक नाटे 1985 से फरार चल रहा था। उसने अपना नाम बदलकर मौलाना करीम रख लिया था और मुंबई, सूरत, अजमेर शरीफ और फर्रुखाबाद की मस्जिदों और दरगाहों पर लोगों से जादू टोने और तांत्रिक क्रियाओं के नाम पर ठगी करता था। नाटे मौलाना के रूप में खुद को हलाला निकाह एक्सपर्ट भी बताता था। उसने 39 महिलाओं का हलाला करवाने की बात कबूल की है। उसने लोगों को धोखा तो दिया ही, साथ ही लाखों रुपए भी ऐंठे।

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इस अपराधी की छानबीन में सामने आया है कि यह मौलाना का रूप रखकर धोखेबाजी को अपना पेशा बना चुके अपराधी नाटे अलग अलग शहरों में अपने एजेंट फैला रखे थे। जो कमीशन के बदले ग्राहकों को फंसा कर उसके पास लाते थे। दुनिया के सामने वह खुद को पहुंचा हुआ मौलाना बताकर लोगों से पैसे ऐठा करता था।

पुलिस का कहना है कि मौलाना करीम के नाम से अपनी दुकान चलाने वाला नाटे इतना शातिर है कि उसने आजतक अपने ​इस नकली नाम से कोई पहचान पत्र नहीं बनवाया है। उसका यह नाम केवल जुबानी पहचान था।

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पुलिस से बचने के लिए 15 दिन में बदलता था मोबाइल नंबर —

इस शातिर नकली मौलाना ने पुलिस को धोखा देने के लिए नकली पहचान बनाने के साथ—साथ अपने मोबाइल नंबरों को भी लगातार बदलता रहता था। वह अपने परिवार से भी नियमित रूप से मिलने आता था, लेकिन उसके आने और जाने की खबर कानों कान उसके पड़ोसियों तक को नहीं हो पाती थी। इस काम में उसका परिवार भी पूरी मदद करता था। उसके परिवार पिछले 32 सालों ने यही कहता आ रहा है कि इस अपराधी से परिवार के किसी व्यक्ति का संबन्ध नहीं है।

पुलिस के सामने खुद सुनाई अपने कारनामों की कहानी —

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पुलिस के हत्थे चढ़े नकली मौलाना ने अपनी तीन दशक की फरारी की कहानी किसी तोते की तरह पढ़ी। उसने बताया कि वह इलाहाबाद के शाहगंज थाना क्षेत्र में रहता था। 1981 में मोहल्ले के लड़के मोहम्मद अजमत ने उसकी भांजी से छेड़खानी की थी। गुस्से में उसने बदला लेने की ठानी और अजमत को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। पुलिस ने हत्या के मामले में उसे गिरफ्तार किया और दो साल बाद उसे 1983 में मुझे जिला अदालत ने उम्रकैद की सजा सुना दी। इसके बाद उसे 1985 में हाईकोर्ट से जमानत भी मिल गई और वह फरार हो गया।

लंबी तैयारी के बाद पुलिस के हत्थे चढ़ा नाटे —

नाटे को गिरफ्तार करने वाले इंस्पेक्टर अनिरुद्ध सिंह ने मीडिया को बताया कि उन्होंने पिछले एक महीने से नाटे की गिरफ्तारी के लिए प्रयास करना शुरू किया था। 15 दिन पहले खबर मिली कि नाटे कौशांबी में होने वाले एक कार्यक्रम में शामिल होने आ रहा है। पुलिस वहां पहुंची लेकिन शातिर नाटे ने पुलिस को चकमा दे दिया। उसके बाद पुलिस ने नाटे के परिजनों के मोबाइल को सर्विलांस पर लिया और नाटे तक पहुंच गई।

 

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