हमेशा यादों में गुनगुनाते रहेंगे रवींद्र जैन

मुंबई| जाने-माने गीतकार और संगीतकार रवींद्र जैन इस दुनिया से विदा हो गए| 71 वर्षीय रवींद्र जैन ने शुक्रवार की दोपहर मुंबई के लीलावती अस्पताल में आखिरी सांस ली| संगीत की दुनिया में रवींद्र जैन के गानों की भरपाई कर पाना मुश्किल है| उनके जाने से हमने एक संगीत की दुनिया का चमकता सितारा खो दिया| लेकिन रवींद्र जैन अपने पीछे अपनी गीतों की ऐसी लड़ी छोड़ गए हैं जिसकी वजह वो हमारी यादों मे हमेशा के लिए जिंदा रहेगें|         

 फिल्म सौदागर से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत करने वाले जैन का जन्म उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मे वर्ष 1944 मे हुआ था| सात भाई बहनों के बीच रहने वाले रवींद्र नेत्रहीन थे| इसलिए उनके पिता चाहते थे कि वो संगीत को अपना करियर बनाए| पिता की आज्ञा मान रवींद्र मंदिर मे ही भजन गाने लगे| उसके बाद विभिन्न गुरूओं से शिक्षा ग्रहण कर रवींद्र जैन संगीत मे पारंगत हो गए|   

वर्ष 1972 में उन्होंने अपने फिल्मी कॅरियर की शुरुआत की। वहीं जैन दक्षिण भारत के गायक के.जे. येसुदास के गायकी के दीवाने थे| येसुदास ने उनके कई गानों को अपने बोल दिये| रवींद्र के किस्मत मे कुछ और लिखा था| एक प्रोड्यूसर राधेश्याम झुनझुनवाला को रवींद्र जैन की धुने काफी पसंद आयीं और तभी से मुंबई का सफर शुरू हुआ|

झुनझुनवाला की फिल्म तो नहीं बनी लेकिन एक निर्माता द्वारकदास ने उन्हे अपनी फिल्म काँच और हीरा के लिए साइन किया| मोहम्मद रफी की आवाज मे गाया गाना ‘नजर आती नहीं मंजिल तड़पने से क्या फायदा’ रवींद्र जैन को बुलंदियों पर बिठा दिया| उसके बाद संजीव कुमार ने उन्हे जाने माने निर्माता एन सिप्पी से मिलवाया| उन्होने ‘चोर मचाये शोर’ के लिए उन्हे साइन कर लिया| फिल्म के गानों ने धूम मचा दी| अब सबकी जुबान पर रवींद्र जैन का ही नाम था|       

वर्ष 1978 में रवींद्र जैन की फिल्म ‘अंखियों के गाने ‘अंखियों के गाने ‘झरोखे से मैने देखा जो सांवरे..’ और ‘कई दिन से मुझे, कोई सपनों में’ श्रोताओं को काफी पसंद आए| वर्ष 1982 में आई फिल्म ‘नदिया के पार’ का कभी न भूलने वाला गाना ‘कौन दिशा में लेके चला रे बटोहिया..’ और ‘सांची कहे तोरे आवन से हमरे..’ ने तो इंडस्ट्री मे आग लगा दी| फिल्म के संगीत ने कई नए रिकॉर्ड बनाए|   

वर्ष 1985 मे आयी फ़िल्म राम तेरी गंगा मैली  के लिए उन्हे फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठअवार्ड भी दिया गया| रवींद्र जैन ने मशहूर धारावाहिक ‘रामायण’ मे भी अपनी आवाज और संगीत के धुन देकर उसे अमर बना दिया| वहीं इसी साल भारत सरकार ने रवींद्र जैन को पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा था| रवींद्र जैन नेत्रहीन होते हुये दुनिया को अपनी संगीत की रोशनी से जगमगाते रहे| उनका अचानक यूं चले जाना किसी अघाता से कम नहीं|   

रवींद्र जैन के लोकप्रिय गीत:

अंखियों के झरोखों से, मैंने जो देखा सांवरे (अंखियों के झरोखों से-1978)

सजना है मुझे सजना के लिए (सौदागर-1973)

ले तो आए हो हमें सपनों के गांव में (दुल्हन वही जो पिया मन भाए)

जब दीप जले आना (चितचोर-1976)

गीत गाता चल, ओ साथी गुनगुनाता चल (गीत गाता चल-1975)

ले जाएंगे, ले जाएंगे, दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे (चोर मचाए शोर-1973)

श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम (गीत गाता चल)

एक राधा एक मीरा (राम तेरी गंगा मैली-1985)

ठंडे-ठंडे पानी से नहाना चाहिए (पति, पत्नी और वो-1978)

सजना है मुझे सजना के लिए (सौदागर)

कौन दिशा में लेके (फिल्म नदियां के पार)

मुझे हक है (विवाह)।