RBI ने चालू वित्त वर्ष के लिए GDP ग्रोथ अनुमान घटाकर 5% किया, रेपो में बदलाव नहीं

आज से 24 घंटे फ्री मिलेगी ये सुविधा, RBI ने लागू किया ये नियम
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नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक ने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की समीक्षा बैठक में रेपो दर में कोई बदलाव नहीं किया है। आरबीआई ने जीडीपी का अनुमान घटा दिया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के नतीजे जारी किए हैं। इसके तहत रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। आरबीआई ने रेपो रेट 5.15 फीसदी पर बरकरार रखा है। आरबीआई की क्रेडिट पॉलिसी की समीक्षा में रेपो रेट नहीं घटाने पर सहमति बनी है। दरअसल एमपीसी के 6 में से 5 सदस्यों ने कटौती नहीं करने के पक्ष में वोट किया है।

Rbi Reduces Gdp Growth Estimate For The Current Financial Year To 5 No Change In Repo :

तीन दिसंबर को मौद्रिक नीति समिति की बैठक शुरू हुई थी और आज पांच दिसंबर को रेपो रेट की घोषणा हुई। बता दें कि आरबीआई खुदरा महंगाई को ध्यान में रखते हुए प्रमुख नीतिगत दरों पर फैसला लेता है। इस साल रेपो दर में कुल 135 आधार अंकों की कटौती हुई है। बीते नौ सालों में पहली बार रेपो रेट इतना कम है। मार्च 2010 के बाद यह रेपो रेट का सबसे निचला स्तर है। रिवर्स रेपो रेट 4.90 फीसदी है बैंक रेट 5.40 फीसदी पर है।

रेपो रेट के फैसले के अतिरिक्त आरबीआई ने जीडीपी का अनुमान जताया है। केंद्रीय बैंक के अनुसार साल 2019-20 के दौरान जीडीपी में और गिरावट आएगी और यह 6.1 फीसदी से गिरकर पांच फीसदी पर आ सकती है। इससे अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है। बता दें कि दिसंबर, 2018 में शक्तिकांत दास के गवर्नर पद संभालने के बाद से आरबीआई ने हर एमपीसी बैठक में रेपो दरें घटाई हैं। लेकिन इस बार इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। 2019 में छह बार की बैठक में कुल 1.35 फीसदी की कटौती की जा चुकी है। बावजूद इसके अर्थव्यवस्था को गति मिलना तो दूर, लगातार गिरावट दिख रही है।

पहले ये अनुमान जताया गया था कि आरबीआई द्वारा मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की समीक्षा बैठक में रेपो दर 25 आधार अंक घटाकर 4.90 फीसदी की जाएगी। अगर ऐसा होता, तो इस साल रेपो दर में कुल 160 आधार अंकों की कटौती होती और रेपो रेट 10 सालों में पहली बार इतना कम होता।

क्या होती है रेपो रेट?
रेपो रेट वह दर होती है जिस पर आरबीआई बैंकों को कर्ज देता है। अगर रेपो रेट में कटौती का फायदा बैंक आप तक पहुंचाते हैं तो का आम लोगों को इससे फायदा होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि आरबीआई द्वारा रेपो रेट घटाने से बैंकों पर ब्याज दरों में कटौती करने का दबाव रहता है। इससे लोगों को लोन सस्ते में मिलता है।

नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक ने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की समीक्षा बैठक में रेपो दर में कोई बदलाव नहीं किया है। आरबीआई ने जीडीपी का अनुमान घटा दिया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के नतीजे जारी किए हैं। इसके तहत रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। आरबीआई ने रेपो रेट 5.15 फीसदी पर बरकरार रखा है। आरबीआई की क्रेडिट पॉलिसी की समीक्षा में रेपो रेट नहीं घटाने पर सहमति बनी है। दरअसल एमपीसी के 6 में से 5 सदस्यों ने कटौती नहीं करने के पक्ष में वोट किया है। तीन दिसंबर को मौद्रिक नीति समिति की बैठक शुरू हुई थी और आज पांच दिसंबर को रेपो रेट की घोषणा हुई। बता दें कि आरबीआई खुदरा महंगाई को ध्यान में रखते हुए प्रमुख नीतिगत दरों पर फैसला लेता है। इस साल रेपो दर में कुल 135 आधार अंकों की कटौती हुई है। बीते नौ सालों में पहली बार रेपो रेट इतना कम है। मार्च 2010 के बाद यह रेपो रेट का सबसे निचला स्तर है। रिवर्स रेपो रेट 4.90 फीसदी है बैंक रेट 5.40 फीसदी पर है। रेपो रेट के फैसले के अतिरिक्त आरबीआई ने जीडीपी का अनुमान जताया है। केंद्रीय बैंक के अनुसार साल 2019-20 के दौरान जीडीपी में और गिरावट आएगी और यह 6.1 फीसदी से गिरकर पांच फीसदी पर आ सकती है। इससे अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है। बता दें कि दिसंबर, 2018 में शक्तिकांत दास के गवर्नर पद संभालने के बाद से आरबीआई ने हर एमपीसी बैठक में रेपो दरें घटाई हैं। लेकिन इस बार इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। 2019 में छह बार की बैठक में कुल 1.35 फीसदी की कटौती की जा चुकी है। बावजूद इसके अर्थव्यवस्था को गति मिलना तो दूर, लगातार गिरावट दिख रही है। पहले ये अनुमान जताया गया था कि आरबीआई द्वारा मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की समीक्षा बैठक में रेपो दर 25 आधार अंक घटाकर 4.90 फीसदी की जाएगी। अगर ऐसा होता, तो इस साल रेपो दर में कुल 160 आधार अंकों की कटौती होती और रेपो रेट 10 सालों में पहली बार इतना कम होता। क्या होती है रेपो रेट? रेपो रेट वह दर होती है जिस पर आरबीआई बैंकों को कर्ज देता है। अगर रेपो रेट में कटौती का फायदा बैंक आप तक पहुंचाते हैं तो का आम लोगों को इससे फायदा होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि आरबीआई द्वारा रेपो रेट घटाने से बैंकों पर ब्याज दरों में कटौती करने का दबाव रहता है। इससे लोगों को लोन सस्ते में मिलता है।