तो क्या स्टैच्यू आफ लिबर्टी में खर्च रकम की भी होगी रिकवरी !

staue of liberty
तो क्या स्टैच्यू आफ लिबर्टी में खर्च रकम की भी होगी रिकवरी !

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में बसपा सरकार के दौरान कई शहरों मे मायावती द्वारा लगाई गई बड़ी—बड़ी मूर्तियों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के बाद अब लोग तरह—तरह की बातें करने लगे हैं। उनका कहना है कि अगर मायावती से इन मूर्तियों पर खर्च की गई रकम की रिकवरी कराई जा रही है तो क्या बीजेपी द्वारा अहमदाबाद में स्थापित कराई गई सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा पर भी खर्च की गई रकम की रिकवरी कराई जाएगी।

Reactions Of People On Recovery Of Money Spent On Staue By Mayawati :

दरअसल सुप्रीम कोर्ट में वर्ष 2009 में समाजवादी पार्टी समेत कई पार्टियों ने ​याचिका दायर की थी कि मायावती ने उत्तर प्रदेश के आगरा, नोएडा और लखनउ में करीब छह हजार करोड़ रूपए खर्च करके खुद के साथ ही भीमराव अम्बेडकर और कांशीराम समेत पार्टी के चुनाव चिन्ह हाथी की बड़ी—बड़ी मूर्तियों की स्थापना कराई थी। जिसमे करीब छह हजार करोड़ रूपए खर्च हुआ था।

इस मामले में फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आदेश दिया कि मायावती ने इन मूर्तियों को लगवाने में जो जनता का पैसा खर्च किया उसे सरकारी खजाने में जमा करवाएं। इसके साथ आगामी दो अप्रैल को मामले की अगली सुनवाई करने करने की बात कहीं।

उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए इस आदेश के बाद से बसपा समर्थकों समेत तमाम लोगों ने सवाल उठाया है कि अगर मायावती से इन मूर्तियों पर खर्च की गई रकम की रिकवरी कराई जा रही है तो क्या पीएम मोदी द्वारा अहमदाबाद में स्थापित की गई पटेल की मूर्ति पर खर्च की गई रकम की रिकवरी होगी। बता दें स्टैच्यू आफ रिबर्टी पर कुल तीन हजार करोड़ रूपए का खर्च आया था।

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में बसपा सरकार के दौरान कई शहरों मे मायावती द्वारा लगाई गई बड़ी—बड़ी मूर्तियों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के बाद अब लोग तरह—तरह की बातें करने लगे हैं। उनका कहना है कि अगर मायावती से इन मूर्तियों पर खर्च की गई रकम की रिकवरी कराई जा रही है तो क्या बीजेपी द्वारा अहमदाबाद में स्थापित कराई गई सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा पर भी खर्च की गई रकम की रिकवरी कराई जाएगी।दरअसल सुप्रीम कोर्ट में वर्ष 2009 में समाजवादी पार्टी समेत कई पार्टियों ने ​याचिका दायर की थी कि मायावती ने उत्तर प्रदेश के आगरा, नोएडा और लखनउ में करीब छह हजार करोड़ रूपए खर्च करके खुद के साथ ही भीमराव अम्बेडकर और कांशीराम समेत पार्टी के चुनाव चिन्ह हाथी की बड़ी—बड़ी मूर्तियों की स्थापना कराई थी। जिसमे करीब छह हजार करोड़ रूपए खर्च हुआ था।इस मामले में फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आदेश दिया कि मायावती ने इन मूर्तियों को लगवाने में जो जनता का पैसा खर्च किया उसे सरकारी खजाने में जमा करवाएं। इसके साथ आगामी दो अप्रैल को मामले की अगली सुनवाई करने करने की बात कहीं।उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए इस आदेश के बाद से बसपा समर्थकों समेत तमाम लोगों ने सवाल उठाया है कि अगर मायावती से इन मूर्तियों पर खर्च की गई रकम की रिकवरी कराई जा रही है तो क्या पीएम मोदी द्वारा अहमदाबाद में स्थापित की गई पटेल की मूर्ति पर खर्च की गई रकम की रिकवरी होगी। बता दें स्टैच्यू आफ रिबर्टी पर कुल तीन हजार करोड़ रूपए का खर्च आया था।