Analysis: जानिए लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन में सीटो का फार्मूला

akhilesh mayawati
यूपी के बाद मप्र और उत्तराखंड में गठबंधन कर चुनाव लड़ेगी सपा-बसपा

लखनऊ। सपा-बसपा गठबंधन में सीटों के बंटवारे में कर्ई फार्मूले लगे। जो दल पिछले लोकसभा चुनाव में जिस सीट पर नंबर दो पर था, वो सारी सीटें उसे नहीं मिली हैं। जिताऊ ऊम्मीदवारों और वोट बैंक को देखते हुए फार्मूला बदला गया है। बड़ी संख्या में ऐसी सीटों की अदला-बदली हुई है। जहां सपा पिछले चुनाव में दो नंबर पर थी, वो बीएसपी के खाते में चली गई है और जहां बीएसपी दो नंबर पर थी वो सपा के पास आ गई है।

Read Analysis Of Sapa And Bsp Seat Sharing Formula :

सीटों के समीकरण में जीत को प्राथमिकता दी गई है। जीत सिर्फ गठबंधन की होनी चाहिए, इस मंशा के साथ सीटें बांटी गई हैं। वो सीटें जो लोकसभा के उपचुनाव में सपा ने जीती थीं, वो उसी के पास रहेंगी। ये भी साफ हो गया है। रालोद अभी तीन सीटों पर राजी है और गठबंधन के साथ खड़ा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी सीट गठबंधन में सपा के पास आ गई है।

पिछली बार इस सीट से आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल चुनाव मैदान में थे और दूसरे नंबर पर आए थे। सीटों का गणित समझें तो समाजवादी पार्टी के खाते में ऐसी 13 सीटें आईं हैं जहां पर वह 2014 के लोकसभा चुनाव में दूसरे नंबर पर नहीं थी। ये सीटें हैं हाथरस, खीरी, हरदोई, मिर्जापुर, बांदा, राबट्र्सगंज, महाराजगंज, चंदौली। ये सीटें बहुजन समाज पार्टी के कोटे से समाजवादी पार्टी के कोटे में आयी हैं।

इसके साथ ही सपा के खाते में आई गाजियाबाद, बाराबंकी और कानपुर सीटों पर पिछले चुनाव में नंबर दो पर कांग्रेस रही थी। वाराणसी सीट से अरविंद केजरीवाल चुनाव लड़े थे। इसी तरह बहुजन समाज पार्टी के पास 14 ऐसी सीटें आई हैं जहां पिछले चुनाव में दूसरे नंबर पर भी नहीं आ पायी थी। ये सीटें हैं बिजनौर, नगीना, अमरोहा, गौतम बुद्ध नगर, आंवला, फर्रुखाबाद, हमीरपुर, कैसरगंज, श्रावस्ती, बस्ती, लालगंज, गाजीपुर, भदोही।

इन सीटों पर समाजवादी पार्टी 2014 के लोकसभा चुनावों में दूसरे नंबर पर आयी थी। बीएसपी के कोटे में सहारनपुर सीट भी आयी है हालांकि इस सीट पर कांग्रेस दूसरे नंबर पर आयी थी। दरअसल, सपा-बसपा गठबंधन में पहले यह तय हुआ था कि जो पार्टी 2014 के चुनाव में जीती हो या नंबर दो पर रही हो उनकी पहली दावेदारी होगी लेकिन इसके साथ यह भी शर्त थी कि एक मंडल में हर दल को कम से कम दो लोकसभा सीटें जरुर दी जाएंगी।

ये गठबंधन के वक्त का समीकरण था। अब समीकरण बदल चुका है। अब जिसकी जहां मजबूत दावेदारी है, सीट उसके खाते में आ चुकी है। नरेश अग्रवाल जब तक एसपी में रहे हरदोई पार्टी की परंपरागत सीट रही लेकिन इस सीट पर बीएसपी दूसरे नंबर पर रही है। फिर भी ये सीट एसपी के खाते में डाल दी गई है। गठबंधन की पूरी कोशिश है जिन सीटों पर गठबंधन हुआ है, वो सभी सीटें जीतें। इसके लिए फामूलों में ढील दी गई है। नंबर दो और नंबर एक का फार्मूला शायद इसलिए यहां अप्लाई नहीं किया गया है।

लखनऊ। सपा-बसपा गठबंधन में सीटों के बंटवारे में कर्ई फार्मूले लगे। जो दल पिछले लोकसभा चुनाव में जिस सीट पर नंबर दो पर था, वो सारी सीटें उसे नहीं मिली हैं। जिताऊ ऊम्मीदवारों और वोट बैंक को देखते हुए फार्मूला बदला गया है। बड़ी संख्या में ऐसी सीटों की अदला-बदली हुई है। जहां सपा पिछले चुनाव में दो नंबर पर थी, वो बीएसपी के खाते में चली गई है और जहां बीएसपी दो नंबर पर थी वो सपा के पास आ गई है। सीटों के समीकरण में जीत को प्राथमिकता दी गई है। जीत सिर्फ गठबंधन की होनी चाहिए, इस मंशा के साथ सीटें बांटी गई हैं। वो सीटें जो लोकसभा के उपचुनाव में सपा ने जीती थीं, वो उसी के पास रहेंगी। ये भी साफ हो गया है। रालोद अभी तीन सीटों पर राजी है और गठबंधन के साथ खड़ा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी सीट गठबंधन में सपा के पास आ गई है। पिछली बार इस सीट से आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल चुनाव मैदान में थे और दूसरे नंबर पर आए थे। सीटों का गणित समझें तो समाजवादी पार्टी के खाते में ऐसी 13 सीटें आईं हैं जहां पर वह 2014 के लोकसभा चुनाव में दूसरे नंबर पर नहीं थी। ये सीटें हैं हाथरस, खीरी, हरदोई, मिर्जापुर, बांदा, राबट्र्सगंज, महाराजगंज, चंदौली। ये सीटें बहुजन समाज पार्टी के कोटे से समाजवादी पार्टी के कोटे में आयी हैं। इसके साथ ही सपा के खाते में आई गाजियाबाद, बाराबंकी और कानपुर सीटों पर पिछले चुनाव में नंबर दो पर कांग्रेस रही थी। वाराणसी सीट से अरविंद केजरीवाल चुनाव लड़े थे। इसी तरह बहुजन समाज पार्टी के पास 14 ऐसी सीटें आई हैं जहां पिछले चुनाव में दूसरे नंबर पर भी नहीं आ पायी थी। ये सीटें हैं बिजनौर, नगीना, अमरोहा, गौतम बुद्ध नगर, आंवला, फर्रुखाबाद, हमीरपुर, कैसरगंज, श्रावस्ती, बस्ती, लालगंज, गाजीपुर, भदोही। इन सीटों पर समाजवादी पार्टी 2014 के लोकसभा चुनावों में दूसरे नंबर पर आयी थी। बीएसपी के कोटे में सहारनपुर सीट भी आयी है हालांकि इस सीट पर कांग्रेस दूसरे नंबर पर आयी थी। दरअसल, सपा-बसपा गठबंधन में पहले यह तय हुआ था कि जो पार्टी 2014 के चुनाव में जीती हो या नंबर दो पर रही हो उनकी पहली दावेदारी होगी लेकिन इसके साथ यह भी शर्त थी कि एक मंडल में हर दल को कम से कम दो लोकसभा सीटें जरुर दी जाएंगी। ये गठबंधन के वक्त का समीकरण था। अब समीकरण बदल चुका है। अब जिसकी जहां मजबूत दावेदारी है, सीट उसके खाते में आ चुकी है। नरेश अग्रवाल जब तक एसपी में रहे हरदोई पार्टी की परंपरागत सीट रही लेकिन इस सीट पर बीएसपी दूसरे नंबर पर रही है। फिर भी ये सीट एसपी के खाते में डाल दी गई है। गठबंधन की पूरी कोशिश है जिन सीटों पर गठबंधन हुआ है, वो सभी सीटें जीतें। इसके लिए फामूलों में ढील दी गई है। नंबर दो और नंबर एक का फार्मूला शायद इसलिए यहां अप्लाई नहीं किया गया है।