‘असली’ अनामिका शुक्ला मिली तो खुल गयी शिक्षा विभाग के भ्रष्टाचार की पोल, जानिए हकीकत

Anamika Shukla
'असली' अनामिका शुक्ला मिली तो खुल गयी शिक्षा विभाग के भ्रष्टाचार की पोल, जानिए हकीकत

पिछले एक हफ्ते से जिस अनामिका शुक्ला की चर्चा थी वह आखिरकार मंगलवार को मीडिया के सामने आ ही गईं। जिस अनामिका शुक्ला के नाम पर 25 स्कूलों में एक साथ पढ़ाने और एक करोड़ रुपये कमाने का आरोप था, वह तो असल में बेरोजगार निकली। अनामिका ने गोंडा बीएसए (BSA) डॉ. इन्द्रजीत प्रजापति के सामने पेश होकर अपने डॉक्यूमेंट दिखाए। अनामिका ने कहा कि उन्होंने तीन साल पहले नौकरी के लिए आवेदन जरूर किया था मगर कहीं नौकरी ज्वाइन ही नहीं की थी। असली अनामिका शुक्ला की कहानी जानकर आप अंदाजा लगा सकता हैं कि यूपी के शिक्षा विभाग में कितने बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार पनप रहा है।

Real Anamika Shukla Has Come In Front Revealed The Corruption Of Education Department Know The Reality :

प्रदेश के नौ जिलों में अनामिका शुक्ला के नाम से कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों में विज्ञान शिक्षिका के पद पर महिलाएं कार्य कर रहीं थीं, शासन स्तर से हुई जांच में लाखों रुपये मानदेय लेने की बात भी सामने आई है।

अनामिका ने कहा कि उन्हें नहीं पता था कि यह मामला उनसे जुड़ा है, जब उन्होने मीडिया के माध्यम से खबरे देखीं तो डाक्यूमेंट्स में लिखा पता देख वह चौंक गईं। उन्होंने जिन जिलों में आवेदन ही नहीं किया था वहां भी उनकी नियुक्ति हो गई।

अनामिका शुक्ला की ओर से पेश किए गए शैक्षिक अभिलेखों के साथ ही उन्होंने निवास प्रमाण पत्र भी दिया। अनामिका ने वर्ष 2017 में आवेदन के लिए निवास प्रमाण पत्र ऑनलाइन बनवाया था। जिसमें उन्होंने अपने पिता के नाम की जगह पर पति दुर्गेश का नाम दर्शाया है, जबकि अन्य जिलों में आवेदन के समय लगाए गये निवास प्रमाण पत्रों में पिता का ही नाम दर्ज है। बीएसए ने निदेशालय से आए अभिलेखों में निवास प्रमाण पत्र मिलाया तो यह हेराफेरी सामने आई। अनामिका ने कहा कि शादी के बाद उसने आवेदन किया था तो निवास प्रमाण पत्र में पति का ही नाम लिखवाया था। अनामिका ने कहा कि एक तो वह ज्यादा टीवी या अखबार नही देखती हैं, दूसरे अनामिका शुक्ला वही हो सकती हैं, उन्हें एहसास ही नहीं था।

अनामिका शुक्ला की मेरिट हाई थी और उन्होंने पांच जिलों में वर्ष 2017 में कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूल में विज्ञान शिक्षिका के लिए आवेदन किया था। उन्होंने सुल्तानपुर, जौनपुर, बस्ती, मिर्जापुर, लखनऊ जिलों में आवेदन किया था। काउंसिलिंग का समय आया तो वह उसमें शामिल नहीं हो सकीं। उस समय उन्होंने ऑपरेशन से बेटी ने जन्म दिया था और वर्ष 2019 में बेटे का जन्म हुआ। दो छोटे बच्चे होने के कारण नौकरी करने में समर्थ नहीं थी।

बीएसए भी हैरान, कैसे हो गई इतने बड़े स्तर पर भर्ती
गोंडा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. इंद्रजीत प्रजापति ने जब अनामिका शुक्ला से पूरा हाल जाना तो वह भी अवाक रह गए। अनामिका शुक्ला ने कभी कहीं मूल अभिलेख नहीं दिए और न ही काउंसलिंग कराई। ऐसे में इन जिलों में नियुक्ति कैसे हो गई।

बता दें कि अनामिका शुक्ला के नाम व दस्तावेज के आधार पर प्रदेश के 25 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) में फर्जी अनामिका द्वारा नौकरी करने का मामला सामने आया था। यह दावा किया गया था कि इसके माध्यम से 13 महीने में सभी जगहों से करीबन एक करोड़ की रकम विभाग से ली गयी है। इस मामले में एक युवती को कासगंज से गिरफ्तार किया गया है और विभाग द्वारा बड़े स्तर पर जांच करवाई जा रही है।

पिछले एक हफ्ते से जिस अनामिका शुक्ला की चर्चा थी वह आखिरकार मंगलवार को मीडिया के सामने आ ही गईं। जिस अनामिका शुक्ला के नाम पर 25 स्कूलों में एक साथ पढ़ाने और एक करोड़ रुपये कमाने का आरोप था, वह तो असल में बेरोजगार निकली। अनामिका ने गोंडा बीएसए (BSA) डॉ. इन्द्रजीत प्रजापति के सामने पेश होकर अपने डॉक्यूमेंट दिखाए। अनामिका ने कहा कि उन्होंने तीन साल पहले नौकरी के लिए आवेदन जरूर किया था मगर कहीं नौकरी ज्वाइन ही नहीं की थी। असली अनामिका शुक्ला की कहानी जानकर आप अंदाजा लगा सकता हैं कि यूपी के शिक्षा विभाग में कितने बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार पनप रहा है। प्रदेश के नौ जिलों में अनामिका शुक्ला के नाम से कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों में विज्ञान शिक्षिका के पद पर महिलाएं कार्य कर रहीं थीं, शासन स्तर से हुई जांच में लाखों रुपये मानदेय लेने की बात भी सामने आई है। अनामिका ने कहा कि उन्हें नहीं पता था कि यह मामला उनसे जुड़ा है, जब उन्होने मीडिया के माध्यम से खबरे देखीं तो डाक्यूमेंट्स में लिखा पता देख वह चौंक गईं। उन्होंने जिन जिलों में आवेदन ही नहीं किया था वहां भी उनकी नियुक्ति हो गई। अनामिका शुक्ला की ओर से पेश किए गए शैक्षिक अभिलेखों के साथ ही उन्होंने निवास प्रमाण पत्र भी दिया। अनामिका ने वर्ष 2017 में आवेदन के लिए निवास प्रमाण पत्र ऑनलाइन बनवाया था। जिसमें उन्होंने अपने पिता के नाम की जगह पर पति दुर्गेश का नाम दर्शाया है, जबकि अन्य जिलों में आवेदन के समय लगाए गये निवास प्रमाण पत्रों में पिता का ही नाम दर्ज है। बीएसए ने निदेशालय से आए अभिलेखों में निवास प्रमाण पत्र मिलाया तो यह हेराफेरी सामने आई। अनामिका ने कहा कि शादी के बाद उसने आवेदन किया था तो निवास प्रमाण पत्र में पति का ही नाम लिखवाया था। अनामिका ने कहा कि एक तो वह ज्यादा टीवी या अखबार नही देखती हैं, दूसरे अनामिका शुक्ला वही हो सकती हैं, उन्हें एहसास ही नहीं था। अनामिका शुक्ला की मेरिट हाई थी और उन्होंने पांच जिलों में वर्ष 2017 में कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूल में विज्ञान शिक्षिका के लिए आवेदन किया था। उन्होंने सुल्तानपुर, जौनपुर, बस्ती, मिर्जापुर, लखनऊ जिलों में आवेदन किया था। काउंसिलिंग का समय आया तो वह उसमें शामिल नहीं हो सकीं। उस समय उन्होंने ऑपरेशन से बेटी ने जन्म दिया था और वर्ष 2019 में बेटे का जन्म हुआ। दो छोटे बच्चे होने के कारण नौकरी करने में समर्थ नहीं थी। बीएसए भी हैरान, कैसे हो गई इतने बड़े स्तर पर भर्ती गोंडा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. इंद्रजीत प्रजापति ने जब अनामिका शुक्ला से पूरा हाल जाना तो वह भी अवाक रह गए। अनामिका शुक्ला ने कभी कहीं मूल अभिलेख नहीं दिए और न ही काउंसलिंग कराई। ऐसे में इन जिलों में नियुक्ति कैसे हो गई। बता दें कि अनामिका शुक्ला के नाम व दस्तावेज के आधार पर प्रदेश के 25 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) में फर्जी अनामिका द्वारा नौकरी करने का मामला सामने आया था। यह दावा किया गया था कि इसके माध्यम से 13 महीने में सभी जगहों से करीबन एक करोड़ की रकम विभाग से ली गयी है। इस मामले में एक युवती को कासगंज से गिरफ्तार किया गया है और विभाग द्वारा बड़े स्तर पर जांच करवाई जा रही है।