1. हिन्दी समाचार
  2. शिक्षा
  3. नई शिक्षा नीति की हो रही तैयारी, जाने क्या क्या हो सकते हैं बदलाव

नई शिक्षा नीति की हो रही तैयारी, जाने क्या क्या हो सकते हैं बदलाव

Recommendation Of Twice The Board Exams On The Basis Of Semester

By आस्था सिंह 
Updated Date

नई दिल्ली। मानव संसाधन मंत्रालय के विशेषज्ञों की कमेटी ने नई शिक्षा नीती की तर्ज पर काम करने का फैसला लिया है। जिसकी वजह से अब कई नए बदलाव देखने को मिल सकते हैं। बता दें कि सेमेस्टर सिस्टम की तरह ही बोर्ड परीक्षाएं भी साल में दो बार आयोजित करने की बात सामने आई है। इसरो के पूर्व प्रमुख डॉ. के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में एक कमेटी तैयार की गई है जिसने शुक्रवार शाम को नए मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को नया राष्ट्रीय शिक्षा नीति का ड्राफ्ट सौंप दिया।

पढ़ें :- सरकारी नौकरी: JKSSB ने कई पदों पर निकाली भर्ती, ऐसे करें जल्द अप्लाई...

इन मुद्दों पर दिए अहम सुझाव

  • विश्व के शीर्ष 200 संस्थानों के कैंपस भारत में खोले जाएं। नालंदा, तक्षशिला की तर्ज पर भारतीय प्राचीन विश्वविद्यालयों को आगे बढ़ाया जाए।
  • मल्टीडिस्पलिनेरी यूनिवर्सिटी व कॉलेज खोले जाएं, जो एक साथ कई विषयों की पढ़ाई करवाते हों। साहित्य, भाषा, खेल, योग, – आयुर्वेद, प्राचीन, मध्यकालीन इतिहास और संगीत पर फोकस किया जाना चाहिए।
  • यूजीसी को भंग कर हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया (एचईसीआई) एक्ट-2018 बनाया जाए।
  • नेशनल टेस्टिंग एजेंसी से सभी प्रवेश और प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित की जाएं।
  • कंप्यूटर आधारित परीक्षा पर जोर दिया जाए।
  • नेशनल स्कॉलरशिप फंड ईजाद हो, ताकि छात्रों को शिक्षा में आगे बढ़ने का मौका मिले। इसके अलावा गरीब छात्रों को फीस माफी मिले।
  • ड्राफ्ट के अनुसार 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा में बच्चों के तनाव कम को करने के लिए छात्रों को बोर्ड परीक्षा में विषयों को दोहराने की अनुमति देने के लिए एक नीति बनाने को कहा गया है। जिसमें छात्र को जिस सेमेस्टर में लगता है कि वह परीक्षा देने के लिए तैयार है, उस समय उसकी परीक्षा ली जानी चाहिए।
  • कमेटी ने अंग्रेजी के साथ भारतीय भाषाओं व संस्कृत या लिबरल आर्ट्स को बढ़ावा देने पर जोर दिया है।
  • नर्सरी से पांचवीं कक्षा तक बच्चों को उनकी मातृभाषा में पढ़ाई कराने और 1 से 18 वर्ष आयु तक के बच्चों को मुफ्त गुणवत्ता युक्त शिक्षा देने को कहा है।
  • मौजूदा स्कूल पाठ्यक्रम और पुस्तकों में गणित, खगोल विज्ञान, दर्शनशास्त्र, मनोविज्ञान, योग, वास्तुकला, चिकित्सा के साथ साथ राजनीति, शासन, समाज और भारतीय ज्ञान प्रणाली में योगदान देने वाले भारतीयों के विषयों को शामिल किया जाना चाहिए।

मनमाने तरीके से फीस न बढ़ाएं निजी स्कूल

  • निजी स्कूलों को अपनी फीस तय करने की स्वतंत्रता हो, लेकिन मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने की मनाही होनी चाहिए।
  • उचित स्थिति में फीस बढ़ोतरी स्वीकार्य है।
  • इसके लिए महंगाई दर और दूसरे अहम फैक्टर देखकर तय करना होगा कि कितने प्रतिशत तक फीस बढ़ाई जाए।
  • हर तीन साल में राज्यों की स्कूल नियामक प्राधिकरण इसकी समीक्षा करेगा।

डिग्री को लेकर कमिटी ने बनाई योजना

  • कमिटी ने स्नातक प्रोग्राम में तीन और चार वर्षीय डिग्री का सुझाव दिया है।
  • चार वर्षीय डिग्री प्रोग्राम में पढ़ाई करने के बाद छात्र एक साल में सीधे मास्टर डिग्री कर सकता है।
  • एमफिल प्रोग्राम को खत्म करने की सिफारिश की गई है।
  • लिबरल एजुकेशन इंस्टीट्यूशन के तहत बैचलर ऑफ लिबरल आर्ट्स, बैचलर ऑफ लिबरल एजुकेशन डिग्री विद रिसर्च शुरू करने का सुझाव दिया है।

पढ़ें :- DRDO Recruitment 2020: आपके पास है ये डिग्री तो जल्द करें अप्लाई, ये है लास्ट डेट

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे...