खतरे में कानपुर वासियों की सेहत, गंगाजल में मिले लाल रंग के कीड़े

Red Colour Insects Found In Ganga River In Kanpur

लखनऊ| प्रदेश के बारह जिलों की जीवनदायिनी मानी जाने वाली गंगा नदी बदहाली की शिकार है| कानपुर में आलम यह है कि नदी का पानी पीना तो छोड़िए नहाने लायक भी नहीं बचा है| हालांकि बात अब बात इससे इस कदम आगे बढ़ गई है| गंगा से वॉटर सप्लाई को भेजे जाने वाले पानी में लाल रंग के कीड़े निकल रहे हैं| ऐसा औद्योगिक इकाइयों और गंदे नालों का कचरा गंगा में लगातार गिरने की वजह से हुआ है| कहा जा रहा है कि पाने के पानी में कीड़ों की संख्या इतनी अधिक है कि इसको पीने लायक बनाने के लिए भी जलकल विभाग को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है| यह कीड़े बिठूर के रास्ते गंगा बैराज होते हुए भैरो घाटके पम्पिंग स्टेशन तक मिले हैं|




दरअसल, बीते शुक्रवार को गंगा का जलस्तर 365.1 फीट पर पहुंच गया था| इसकी वजह से भैरोघाट इंटेक प्वाइंट तक पानी लाने के लिए गंगा रीवर में जलकल को 4 ड्रेजर उतारने पड़े| ड्रेजर्स ने जो पानी खींचा धीरे-धीरे उसका रंग भूरा हो गया| शोधन के लिए जब यह पानी जलकल में वॉटर ट्रीटमेंट प्लान्ट में आया तो उसमें लाल रंग के कीड़े तैरते नजर आए| प्लान्ट के अधिकारियों ने इस बारे में जीएम आरएस सलूजा को जानकारी दी|




जीएम ने स्थिति गंभीर होते देख रीजनल पॉल्यूशनल कन्ट्रोल बोर्ड के ऑफिसर्स को इस बारे में पत्र लिखकर मदद मांगी है| हालांकि रिमाइंडर के बाद भी पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने अब तक कोई कदम नहीं उठाया है| जीएम का कहना है कि गंगा जल में कीड़े आना एक चिंता का विषय है| इसके पहले कभी ऐसा नहीं हुआ|

लखनऊ| प्रदेश के बारह जिलों की जीवनदायिनी मानी जाने वाली गंगा नदी बदहाली की शिकार है| कानपुर में आलम यह है कि नदी का पानी पीना तो छोड़िए नहाने लायक भी नहीं बचा है| हालांकि बात अब बात इससे इस कदम आगे बढ़ गई है| गंगा से वॉटर सप्लाई को भेजे जाने वाले पानी में लाल रंग के कीड़े निकल रहे हैं| ऐसा औद्योगिक इकाइयों और गंदे नालों का कचरा गंगा में लगातार गिरने की वजह से हुआ है| कहा…