मोटी कमाई का जरिया बना वेंटिलेटर, लाश का सौदा कर रहा नर्सिंग होम!

कानपुर: “वेंटीलेटर” ये नाम निजी नर्सिंग होम्स के लिए मोटी कमाई का सबसे अच्छा जरिया है जिसमे इंसानियत और मानवता तार-तार हो जाती है क्योकि ज्यादातर मामलो में इस तरीके की कमाई में डॉक्टर्स लाशो का सौदा करते है और मृतको के परिजन अपना सबकुछ दाँव पर रखकर उन लाशो की कीमत चुकाते है। ये निजी नर्सिंग होम्स इन्ही लाशो का सौदा कर दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की करते है और स्वास्थ महकमा उनके इस रवैये को देखकर भी चुप्पी साधे रहता है क्योकि इन्ही निजी नर्सिंग होम्स की आढ़ में कई सरकारी डॉक्टर्स भी मोटी कमाई करते है। आइये हम आपको दिखाते है कानपुर के सबसे बड़े और सभी सुविधाओ से युक्त एक निजी नर्सिंग होम की जहाँ किस तरीके से एक मजबूर परिवार से एक लाश का सौदा किया जाता है।




कहते है रियल लाईफ और रील लाईफ (बॉलीवुड फिल्म्स) में बहुत अंतर होता है लेकिन इन तस्वीरो को देखकर शायद आपको अक्षय कुमार की “गब्बर इस बैक” मूवी याद आ जाए क्योकि कानपुर में हुई इस घटना और फिल्म का एक द्रश्य बिलकुल एक जैसा है। दोनों दृश्यों में निजी अस्पताल में भर्ती मरीज की मौत के बाद उनके परिवार वालो से उसकी लाश का सौदा किया जाता है और वो भी लाखो में। निजी नर्सिंग होम चलाने वाले बेदर्द डॉक्टर्स की इंसानियत और मानवता मर चुकी है और एक बार इनके अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीज के परिवार की मजबूरी का फायदा उठाकर ये डॉक्टर्स उनका घर बार , सुख चैन सब लूट लेते है जिसका सबसे अच्छा जरिया बनता है “वेंटीलेटर” ।

कानपुर के कोतवाली थाना क्षेत्र के शिवाला में रहने वाला सचिन सैनी (27) प्राइवेट नौकरी करता था, परिवार में बूढ़े माँ बाप, बड़ा भाई, भाभी और गर्भवती पत्नी है। सचिन को हफ्ते भर पहले अचानक घबराहट और सीने में दर्द हुआ तो परिजन उसे पास के अस्पताल ले गए लेकिन सचिन की हालात देख कर उसको वहां से रेफर कर दिया गया। परिजन सचिन को शहर के सबसे बड़े नर्सिंग होम रीजेन्सी हॉस्पिटल लेकर आए लेकिन उन्हें क्या पता था कि जिस हॉस्पिटल में सचिन को इलाज के लिए ला रहे है वो लूट का एक बड़ा अड्डा है जहाँ वो अपने परिवार का सुख चैन और सारी खुशियाँ लुटा कर खाली हाँथ लौटेंगे।





रीजेन्सी पहुँचने पर अनुमान के मुताबिक डॉक्टर ने सचिन के हार्ट का वॉल्व खराब बताकर तुरंत ऑपरेशन करने को बोला और परिजनों को साढ़े तीन लाख रूपए जमा करने को कहा। डॉक्टर्स के अनुसार सचिन का ऑपरेशन सफल हुआ और उसको दो दिन बाद डिस्चार्ज कर दिया गया लेकिन घर पहुँचने के दूसरे दिन सचिन को फिर से सीने में तकलीफ होने पर परिजन उसे रीजेन्सी हॉस्पिटल लाए तो डॉक्टर्स ने जांच के बाद बोला कि सचिन को पेस मेकर लगाना पडेगा जिसके लिए तीन लाख रूपए का इंतजाम करने को कहा। मजबूर परिजनों ने सचिन की माँ और पत्नी सारे जेवर बेंच दिए, बड़े भाई ने अपना ऑटो रिक्शा बेंच दिया और लोगो से उधार लेकर सचिन को पेस मेकर लगवाया। पेस मेकर लगने के तीसरे दिन सचिन की हालत बिगड़ गई तो डॉक्टर ने फिर से ऑपरेशन करने का कहकर ढाई लाख रूपए जमा करने को बोला और सचिन को वेंटीलेटर पर रख दिया।

परिजनों के अनुसार सचिन को दो दिनों से वेंटीलेटर पर रखे हुए थे और उससे मिलने और देखने की इज़ाज़त भी नहीं थी जबकि परिवार के एक शख्स ने धोखे से जाकर सचिन को देख लिया था कि वेंटीलेटर में रखे सचिन की नब्ज़ बन्द है और उसकी मौत हो चुकी है। जब परिजनों ने सचिन की मौत की बात कहकर उसके शव की मांग की तो हॉस्पिटल प्रशासन ने पैसो के बिना शव देने से इनकार कर दिया जबकि वेंटीलेटर पर होने के समय परिजन 30 हज़ार रूपए अस्पताल को दे चुके थे और मृतक सचिन का बड़ा भाई 9 हज़ार रूपए और दे रहा था और चिल्ला चिल्ला कर बोल रहा था कि सबकुछ बेंचने के बाद अब यही बचा है लेकिन मानवता को शर्मसार करते ये बेदर्द नर्सिंग होम्स उससे लगातार डेढ़ लाख रूपए की मांग कर उसके बाद शव देने को कह रहे थे। हड़ कर परिजनों के सब्र का बाँध टूट गया और सचिन के शव की मांग कर जमकर हंगामा किया तो स्थानीय थाना पुलिस मौके पर पहुँच गई और आक्रोशित परिजनों को शांत कर सचिन के शव को परिजनों के हवाले कराया।