रिलायंस समूह ने बीते दस माह में चुकाई 35 हजार करोड़ की देनदारी : अनिल अंबानी

relaince anil ambani
रिलायंस समूह ने बीते दस माह में चुकाई 35 हजार करोड़ की देनदारी : अनिल अंबानी

नई दिल्ली। रिलायंस समूह ने बीते 14 महीने में कुल 35 हजार करोड़ रूपए की देनदारी चुकाई हैं। कंपनी के चेयरमैन अनिल अंबानी ने मंगलवार को कंपनी आगे भी अपने देनदारी को समय-समय पर चुकाती रहेगी। उन्होने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि एक साल में कंपनी 24, 800 करोड़ रुपये का मूलधन और 10,600 करोड़ रुपये का ब्याज वापस कर चुकी है।

Reliance Group Pay 35k Crore Rupees Debt In 14 Months Says Anil Ambani :

बता दें कि अनिल अंबानी एक पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होने कहा कि समूह की कंपनियों के बारे में अफवाह फैलाने के कारण शेयर धड़ाम हो गए। बताया जा रहा है कि रिलायंस ने जिन कंपनियों की देनदारी को चुकाया है, उनमें रिलायंस कैपिटल, रिलायंस पावर और रिलायंस इंफ्रा शामिल हैं। वहीं उन्होने कहा कि विभिन्न अदालतों में लंबित मामलों के चलते समूह को 30 हजार करोड़ रुपये मिलने में पांच से 10 साल की देरी हो गई है। जिससे कंपनी को काफी नुकसान हुआ हैं।

इसके अलावा उन्होने कहा कि उनके समूह को वित्तीय कंपनियों या फिर बैंकों से भी मदद नहीं मिल रही है। 35 हजार करोड़ रुपये जमा करने के बाद भी बीमा कंपनियां, म्यूचुअल फंड कंपनियां, प्रोविडेंट फंड और नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों ने पैसा देने से हाथ खड़े कर दिए हैं। इससे समूह को काफी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

नई दिल्ली। रिलायंस समूह ने बीते 14 महीने में कुल 35 हजार करोड़ रूपए की देनदारी चुकाई हैं। कंपनी के चेयरमैन अनिल अंबानी ने मंगलवार को कंपनी आगे भी अपने देनदारी को समय-समय पर चुकाती रहेगी। उन्होने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि एक साल में कंपनी 24, 800 करोड़ रुपये का मूलधन और 10,600 करोड़ रुपये का ब्याज वापस कर चुकी है। बता दें कि अनिल अंबानी एक पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होने कहा कि समूह की कंपनियों के बारे में अफवाह फैलाने के कारण शेयर धड़ाम हो गए। बताया जा रहा है कि रिलायंस ने जिन कंपनियों की देनदारी को चुकाया है, उनमें रिलायंस कैपिटल, रिलायंस पावर और रिलायंस इंफ्रा शामिल हैं। वहीं उन्होने कहा कि विभिन्न अदालतों में लंबित मामलों के चलते समूह को 30 हजार करोड़ रुपये मिलने में पांच से 10 साल की देरी हो गई है। जिससे कंपनी को काफी नुकसान हुआ हैं। इसके अलावा उन्होने कहा कि उनके समूह को वित्तीय कंपनियों या फिर बैंकों से भी मदद नहीं मिल रही है। 35 हजार करोड़ रुपये जमा करने के बाद भी बीमा कंपनियां, म्यूचुअल फंड कंपनियां, प्रोविडेंट फंड और नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों ने पैसा देने से हाथ खड़े कर दिए हैं। इससे समूह को काफी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।