रिसर्च : गंगा के किनारे रहने वालों में बढ़ा गंभीर बीमारियों का खतरा, सरकार दावों में मसगूल

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रिसर्च : गंगा के किनारे रहने वालों में बढ़ा गंभीर बीमारियों का खतरा, सरकार दावों में मसगूल

वाराणसी। प्रधानमंत्री की महात्वकांक्षी योजना ‘नमामि गंगे’ परवान नहीं चढ़ सकी। हजारों करोड़ रुपये खर्च के बाद भी गंगा प्रदूषित है। दूषित जल को गंगा में गिरने से रोकने का दावा पूरी तरह से फेल साबित होती जा रही है, जिसके कारण गंगा के किनारे रहने वाले लोगों पर बीमारियों का खतरा मंडराने लगा है। एक शोध में पाया गया है कि कई ऐसी बीमारियां भी हैं, जिनका उपचार भी संभव नहीं है। प्रयागराज, मीरजापुर, भदोही, बनारस, बलिया, चंदौली से लेकर बक्सर तक तीन सौ किमी के इलाके में गंगा से 25 किमी के इलाके में रहने वाले लोगों पर यह खतरा मंडरा रहा है।

Research People Living On The Banks Of Ganga Have Increased Risk Of Serious Diseases Government Claims :

ऐसे में केंद्र सरकार की गंगा सफाई के दावों की पोल खुलने लगी है। बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के सर सुंदरलाल अस्पताल में न्यूरॉलाजी विभागाध्यक्ष डॉ. वीएन मिश्र ने गंगा के 25 किमी दायरे में रहने वाले लोगों पर रिसर्च किया है। इस रिसर्च में यह हैरान करने वाला मामला सामने आया है। रिसर्च में पता चला कि गंगाजल में मटैलिक प्रदूषण के चलते खतरे बढ़ते जा रहे हैं।

इस कारण प्रयागराज, मीरजापुर, भदोही, बनारस, बलिया, चंदौली से लेकर बक्सर तक तीन सौ किमी के इलाके में गंगा से 25 किमी के इलाके में रहने वाले लोगों में कई गंभीर बीमारियां बढ़ती जा रहीं हैं। इस रिसर्च में सामने आया कि यह बीमारी बच्चों से लेकर बढ़ों तक बढ़ती जा रही है। इन क्षेत्रों में रोगियों के परीक्षण में पता चला कि मोटर न्यूरॉन डिसीज (एमएनडी) तेजी से बढ़ रही है। रिसर्च में सामने आया कि गंगा के तटीय इलाकों में रहने वालों लोगों में कैंसर महामारी की तरह फैल रहा है।

डॉक्टरों के पास लिवर और गॉल ब्लेडर के कैंसर के मरीज सामने आ रहे हैं। बता दें कि, गंगा के किनारे रहने वाले लोगों में गैंगेटिक पार्किंसन, गैंगेटिक डिमेंशिया के रोगियों में इजाफा हो गया है। बीएचयू में ही अकेले दो साल के दौरान मोटर न्यूरॉन डिसीज (एमएनडी) के 45 ऐसे गंभीर मरीज मिले। बीएचयू के न्यूरॉलजी विभागाध्यक्ष ने कहा कि अभी तक यह खतरनाक बीमारी लाइलाज है। बीएचयू के रिसर्च में चौंकाने वाले तथ्य सामने आने के बाद अब इन रोगों के प्रभाव पर अध्ययन किया जा रहा है।

वाराणसी। प्रधानमंत्री की महात्वकांक्षी योजना 'नमामि गंगे' परवान नहीं चढ़ सकी। हजारों करोड़ रुपये खर्च के बाद भी गंगा प्रदूषित है। दूषित जल को गंगा में गिरने से रोकने का दावा पूरी तरह से फेल साबित होती जा रही है, जिसके कारण गंगा के किनारे रहने वाले लोगों पर बीमारियों का खतरा मंडराने लगा है। एक शोध में पाया गया है कि कई ऐसी बीमारियां भी हैं, जिनका उपचार भी संभव नहीं है। प्रयागराज, मीरजापुर, भदोही, बनारस, बलिया, चंदौली से लेकर बक्सर तक तीन सौ किमी के इलाके में गंगा से 25 किमी के इलाके में रहने वाले लोगों पर यह खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में केंद्र सरकार की गंगा सफाई के दावों की पोल खुलने लगी है। बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के सर सुंदरलाल अस्पताल में न्यूरॉलाजी विभागाध्यक्ष डॉ. वीएन मिश्र ने गंगा के 25 किमी दायरे में रहने वाले लोगों पर रिसर्च किया है। इस रिसर्च में यह हैरान करने वाला मामला सामने आया है। रिसर्च में पता चला कि गंगाजल में मटैलिक प्रदूषण के चलते खतरे बढ़ते जा रहे हैं। इस कारण प्रयागराज, मीरजापुर, भदोही, बनारस, बलिया, चंदौली से लेकर बक्सर तक तीन सौ किमी के इलाके में गंगा से 25 किमी के इलाके में रहने वाले लोगों में कई गंभीर बीमारियां बढ़ती जा रहीं हैं। इस रिसर्च में सामने आया कि यह बीमारी बच्चों से लेकर बढ़ों तक बढ़ती जा रही है। इन क्षेत्रों में रोगियों के परीक्षण में पता चला कि मोटर न्यूरॉन डिसीज (एमएनडी) तेजी से बढ़ रही है। रिसर्च में सामने आया कि गंगा के तटीय इलाकों में रहने वालों लोगों में कैंसर महामारी की तरह फैल रहा है। डॉक्टरों के पास लिवर और गॉल ब्लेडर के कैंसर के मरीज सामने आ रहे हैं। बता दें कि, गंगा के किनारे रहने वाले लोगों में गैंगेटिक पार्किंसन, गैंगेटिक डिमेंशिया के रोगियों में इजाफा हो गया है। बीएचयू में ही अकेले दो साल के दौरान मोटर न्यूरॉन डिसीज (एमएनडी) के 45 ऐसे गंभीर मरीज मिले। बीएचयू के न्यूरॉलजी विभागाध्यक्ष ने कहा कि अभी तक यह खतरनाक बीमारी लाइलाज है। बीएचयू के रिसर्च में चौंकाने वाले तथ्य सामने आने के बाद अब इन रोगों के प्रभाव पर अध्ययन किया जा रहा है।