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शोध: कोरोना का ये रूप दूसरे कोरोना से 10 गुना ज्यादा खतरनाक

By रवि तिवारी 
Updated Date

कोरोना के असरदार इलाज की लगातार कोशिशें चल रही हैं. इस बीच तेजी से फैलता हुआ ये दुनियाभर के 78 लाख से ज्यादा लोगों को संक्रमित कर चुका है. अब हाल ही में रिसर्च बता रही है कि कोरोना वायरस के म्यूटेशन से जो वायरस बना है, वो उस वायरस के कई गुना खतरनाक है, जो चीन से फैला था. बताया जा रहा है कि इस वायरस में पाई जाने वाली कांटेदार संरचना, जो हमारे शरीर में प्रवेश करने में मदद करती है, वो चार गुना से भी ज्यादा है. D614G नाम के इस वायरस स्ट्रेन को इसी बढ़ी हुई संचरना के कारण 10 गुना ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है.

इससे पहले दो तरह के म्यूटेशन दिखे थे, जिनके वायरस स्ट्रेन को G614 और D614 नाम दिया गया था. वायरस के नए स्ट्रेन को D614G नाम दिया गया है, जो ज्यादा देर तक शरीर में बना रहता है. इससे मरीज में वायरल लोड बढ़ जाता है, जिससे इलाज में ज्यादा परेशानी होती है. वैसे इससे पहले से ही वैज्ञानिक ये समझने की कोशिश कर रहे थे कि वायरस का असर दुनिया के कुछ देशों में कम, कहीं ज्यादा क्यों दिख रहा है. इसी बीच म्यूटेशन से बने इस वायरस के बारे में पता चल चुका था. ये भी देखा जा चुका था कि अमेरिका, इटली और स्पेन जैसे देशों में वायरस का यही स्ट्रेन फैला है.

अब म्यूटेशन से गुजरे वायरस का स्ट्रेन अलग करने में सफलता मिली है. इससे ये पता चल सका है कि क्यों इसका संक्रमण और तेजी से फैल रहा है. फ्लोरिडा में स्थित अमेरिकन मेडिकल रिसर्च फैसिलिटी Scripps Research के मुताबिक नए वायरस में जो कांटेदार संरचना ज्यादा होती है, उसके जरिए वो शरीर में और आसानी से घुस जाता है. डेली मेल में इस बारे में एक रिपोर्ट आई है. इसमें ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग में वायरोलॉजिस्ट इयान जोन्स कहते हैं कि ये मुमकिन है कि इसकी संरचना इसे और खतरनाक बना रही हो. लैब में इसके कल्चर में भी यही नतीजे दिखे.

बता दें कि कोरोना वायरस असल में स्पाइक यानी नुकीली संरचना वाला होता है. ये एक तरह का प्रोटीन होता है जो हमारे शरीर की कोशिकाओं में पाए जाने वाले प्रोटीन से काफी अच्छे से जुड़ पाता है. दूसरे वायरसों की बजाए कोरोना की यह कांटेदार संरचना ही उसे हमारे लिए ज्यादा घातक बना चुकी है. इसी लाइन को लेकर दुनिया के तमाम वैज्ञानिक जुटे हुए हैं कैसे वायरस और शरीर में उपस्थित कोशिका के इस बॉन्ड को कमजोर किया जाए.

स्टडी के मुख्य शोधकर्ता और वायरोलॉजिस्ट Dr Hyeryun Choe के अनुसार जितने ज्यादा स्पाइक होंगे, वायरस उतना ही ज्यादा घातक होता जाएगा. स्पाइक्स के जरिए हमला करके ये शरीर की कोशिकाओं को एक तरह से हाईजैक कर लेता है और तुरंत बढ़ जाता है. यानी अगर ये कांटेदार प्रोटीन हमारे शरीर से नहीं जुड़ सकें तो वायरस के संपर्क में आने के बाद भी हम सुरक्षित रह सकते हैं. या फिर अगर वायरस और हमारी कोशिकाओं के इस बॉन्ड को कमजोर किया जा सके तो भी वायरल लोड कम हो जाएगा और मरीज जल्दी रिकवर हो सकेगा.

क्या है वायरस में म्यूटेशन

वायरस खुद को लंबे समय तक प्रभावी रखने के लिए लगातार अपनी जेनेटिक संरचना में बदलाव लाते रहते हैं ताकि उन्हें मारा न जा सके. ये सर्वाइवल की प्रक्रिया ही है, जिसमें जिंदा रहने की कोशिश में वायरस रूप बदल-बदलकर खुद को ज्यादा मजबूत बनाते हैं. म्यूटेशन की ये प्रक्रिया वायरस को काफी खतरनाक बना देती है और ये जब होस्ट सेल यानी हमारे शरीर की किसी कोशिका पर हमला करते हैं तो कोशिका कुछ ही घंटों के भीतर उसकी हजारों कॉपीज बना देती है. यानी शरीर में वायरस लोड तेजी से बढ़ता है और मरीज जल्दी ही बीमारी की गंभीर अवस्था में पहुंच जाता है.

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