नीतीश ने इस्तीफे से पहले लालू से मांगी थी माफी, इन कदमों से गठबंधन तोड़ने के दे रहे थे लगातार सिग्नल

बिहार में अब नई सरकार बन चुकी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को अपने मंत्रिमंडल में 27 मंत्रियों को भी शामिल कर लिया है और उनके बीच विभागों का बंटवारा भी कर दिया है। बावजूद इसके सियासी गहमा-गहमी अभी नहीं थमी है। उधर, इस बात की चर्चा तेज है कि इस्तीफा देने और आरजेडी से गठबंधन तोड़ने से पहले नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद यादव को फोन किया था। एनडीटीवी की खबर के मुताबिक, फोन पर नीतीश ने कहा, ‘लालू जी, मैं आपसे निवेदन करता हूं कि मुझे माफ कर दें। 20 महीने सरकार चलाने के बाद मुझे लगने लगा है कि मैं इसको आगे नहीं लेकर जा पाऊंगा। मैं पद छोड़ रहा हूं।’ इसके आधे घंटे के अंदर ही हर टीवी चैनल पर फ्लैश होने लगा कि नीतीश कुमार ने महागठबंधन को तोड़कर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है।

लालू-नीतीश के बीच खटास पहले से चल रही थी। इसका सबसे पहले पता तब चला जब अगस्त में होने वाली रैली के लिए लालू ने नीतीश को न्योता भेजा। न्योता पाकर नीतीश ने शामिल होने के लिए सोचने का वक्त मांगा जबकि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने तुरंत न्योता कबूल कर लिया था। उस वक्त भी नीतीश कुमार ने लालू को इशारों ही इशारों में यह जता दिया था कि वो पहली नजर में उनकी रैली में शामिल होना नहीं चाहते हैं। हालांकि, बाद में उन्होंने कुछ हफ्तों के बाद यह जताया कि वो रैली में शामिल हो सकते हैं।

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लालू यादव को गठबंधन में खटास का आभास तब हुआ, जब उनका और बेटे तेजस्वी का नाम सात जुलाई को करप्शन केस में नामित हुआ। लालू को तब इस बात का अहसास हुआ कि सचमुच गठबंधन को तोड़ने का चक्र चल रहा है। इस प्रकरण के बाद नीतीश चाहते थे कि 28 वर्षीय तेजस्वी यादव उप मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दें। अगर वो ऐसा नहीं करते हैं तो आम जनता के बीच वो इस बात का स्पष्टीकरण दें कि सीबीआई ने जो आरोप लगाए हैं, उनमें कितनी सच्चाई है लेकिन लालू यादव ने नीतीश द्वारा अपने प्रवक्ताओं और कांग्रेस नेताओं के जरिए भेजे जा रहे संदेशों को दरकिनार कर दिया।

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