बार डांस रोक याचिका पर महाराष्ट्र को नोटिस

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरूवार को बार डांसरों के एक संगठन की उस याचिका पर महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा, जिसमें वहां बार और होटलों में महिलाओं के नृत्य पर शत्रे लगाने वाले 2016 के प्रदेश के एक कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी।न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन की पीठ ने कहा कि नोटिस जारी किया जाता है। चार हफ्तों में जवाब दिया जाए।




इसके बाद अदालत ने ‘‘भारतीय बार गर्ल्स यूनियन’ की नई याचिका को इस मुद्दे पर ‘‘इंडियन होटल एंड रेस्तरां एसोसिएशन’ (आईएचआरए) की विचाराधीन याचिका के साथ संलग्न किया। अदालत ने याचिकाओं पर सुनवाई के लिए 20 अप्रैल की तारीख तय की। शीर्ष अदालत पहले से ही उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है जिसमें बार एवं होटलों में महिलाओं के नृत्य पर शत्रे लगाने वाले महाराष्ट्र के एक कानून के कुछ खास प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी। इनमें आईएचआरए की याचिका भी शामिल है।




भारतीय बार गर्ल्स यूनियन द्वारा दायर नई याचिका में नए कानून को एकतरफा और कानूनी तरीके से आजीविका कमाने के उनके अधिकार का उल्लंघन बतया गया है। यूनियन ने आरोप लगाया कि कानून में निहित अश्लील नृत्य को जानबूझकर अस्पष्ट रखा गया है, ताकि पुलिस महिला कलाकारों को परेशान कर सके। गौरतलब है कि पिछले साल 21 सितम्बर को शीर्ष अदालत ने नये कानून के क्रियान्वयन पर रोक से इनकार करते हुए राज्य सरकार को अंतरिम राहत दी थी। हालांकि अदालत ने कुछ प्रावधानों पर चिंताएं जताई थीं।