सरकारें जो 50 सालों में ना कर पाई, रिटायर्ड फौजी ने छह महीने में कर दिखाया

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Retired Lieutenant Bhagguram Maurya From Varanasi

वाराणसी। सरहद पर हमारी रक्षा करने के लिये दिन-रात एक करने वाले एक रिटायर्ड फौजी ने अपने गांव में भी एक मिशाल कायम की है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में रहने वाले भग्गुराम मौर्य ने वो कर दिखाया जिसे 50 साल से सरकारें करने में नाकाम रहीं। भग्गुराम ने रिटायरमेंट फंड के पैसों से गांव में डेढ़ किलोमीटर सड़क का निर्माण करा दिया। ये सड़क गांव को कई बस्तियों से जोड़ती है। एक रिटायर्ड फौजी की इस पहल ने आम जनमानस और प्रदेश की सरकार के लिये एक नजीर पेश की है।
वाराणसी के जंसा थाना क्षेत्र के रामेश्वर गांव की एक छोटी सी बस्ती हीरमपुर के भग्गुराम मौर्य सेना के इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में रहे। मौर्य ने गांव वालों की सुविधा के लिए अपने पीएफ के पैसों से गांव में डेढ़ किलोमीटर की सड़क बनवा डाली जो अब कई बस्तियों को आपस में जोड़ती है। इस काम में भग्गुराम मौर्य के तकरीबन चार लाख रुपये खर्च हुए। सात महीने की कोशिश के बाद अब उस रास्ते से साइकल, बाइक ही नहीं बल्कि फोर व्हीलर और ट्रैक्टर भी आसानी से गुजरने लगे हैं।

नौकरी की सारी पूंजी ‘विकास पथ’ के लिये लगा दी-

नौकरी से रिटायर होने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए उसकी सबसे बड़ी पूंजी उसके पीएफ का पैसा होता है। वह उस पैसे से अपने और अपने परिवार के ढेर सारे सपने पूरी करने की सोचता है पर मौर्य ने अपने गांव के लोगों को अपने परिवार से ऊपर रखा और सात महीने के अपने अथक प्रयास से अपने सपने को साकार कर इस समाज के लिए एक नायाब मिसाल पेश कर दी।
भग्गुराम मौर्या ने बताया कि गांव में फोर व्हीलर तो दूर साइकिल, मोटरसाइकिल आने तक का रास्ता नहीं था। सड़क नहीं होने पर जरुरत का कोई भी सामान सर पर रख कर लाना पड़ता था। सबकी तकलीफ देखते हुए उन्होंने संकल्प लिया कि जो सड़क 50 सालो में भी नहीं बनी वे उसे बनवाएंगे और एक दिन पूरे गांव वालो की तकलीफ को दूर करेंगे।

वाराणसी। सरहद पर हमारी रक्षा करने के लिये दिन-रात एक करने वाले एक रिटायर्ड फौजी ने अपने गांव में भी एक मिशाल कायम की है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में रहने वाले भग्गुराम मौर्य ने वो कर दिखाया जिसे 50 साल से सरकारें करने में नाकाम रहीं। भग्गुराम ने रिटायरमेंट फंड के पैसों से गांव में डेढ़ किलोमीटर सड़क का निर्माण करा दिया। ये सड़क गांव को कई बस्तियों से जोड़ती है। एक रिटायर्ड फौजी की इस पहल ने…