गोमती रिवर फ्रंट घोटाला: तत्कालीन प्रमुख सचिव-मुख्य सचिव सिंचाई से जवाब तलब

लखनऊ। गोमती रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट में अनियमितता मामले में गठित समिति ने तत्कालीन प्रमुख सचिव सिंचाई दीपक सिंघल और मुख्य सचिव आलोक रंजन से तीन दिनों के अंदर लिखित जवाब मांगा है। अखिलेश सरकार के दौरान शुरू हुए इस प्रोजेक्ट में अनियमितता की जांच जस्टिस आलोक कुमार सिंह को सौंपी गयी है।




परियोजना को पूरा करने में विलंब के लिए अभियंताओं को प्रथम दृष्टतया दोषी ठहराया गया है। तत्कालीन प्रमुख सचिव सिंचाई, तत्कालीन प्रमुख अभियंता समेत विभागाध्यक्ष सिंचाई के शामिल थे। दो वर्ष में 23 बैठक करने के बावजूद समय से कार्य पूरा नहीं हुआ, जिसके लिए अनुश्रवण समिति के अध्यक्ष भी जिम्मेदार ठहराया गया है।




बता दें कि इस योजना के लिये साल 2014-15 में गोमती नदी चैनलाइजेशन परियोजना के लिए 656 करोड़ रुपये आवंटित किये गए थे। जिसे बढ़ाकर 1513 करोड़ कर दिया गया था। इस राशि का 95 प्रतिशत हिस्सा खर्च होने के बावजूद परियोजना का 60 प्रतिशत कार्य पूरा हुआ। मुख्यमंत्री बनते ही आदित्यनाथ ने गोमती रिवर फ्रंट का निरीक्षण किया और जस्टिस आलोक सिंह की अध्यक्षता में समिति गठित कर 45 दिन में रिपोर्ट मांगी थी।


नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना की अध्यक्षता में बनी कमेटी–

सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई के लिये नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना की अध्यक्षता में कमेटी बनाई है। बैठक में इस बात का निर्णय लिया गया है कि कार्रवाई की सिफ़ारिश करने से पहले दोनों अफसरों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा।

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