राजद प्रमुख ने जेल से बांटे टिकट, चुनाव आयोग से हुई शिकायत

lalu-yadav
राजद प्रमुख ने जेल से बांटे टिकट, चुनाव आयोग से हुई शिकायत

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2019 के माहौल के बीच राजनीतिक पार्टियों में अपनी दावेदारी को लेकर घमासान मचा हुआ है। इस बीच जनता दल यूनाईटेड ने आरोप लगाया है कि राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव जेल से अपनी पार्टी के प्रत्याशियों के टिकट बांट रहे हैं। जेडीयू ने इस मामले की शिकायत चुनाव आयोग से की और राजद के सभी उम्मीदवारों का नामांकन रद्द करने की मांग की है।

Rjd Chief Distributed Tickets From Jail Complaint Filed :

दरअसल, जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने चुनाव आयोग को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि जेल में रहते हुए लालू ने लोकसभा चुनाव में अपने हस्ताक्षर से ही टिकट बांटा। तो क्या इसके लिए अदालत से इजाजत ली गई थी? वहीं, पत्र में लिखा गया है कि लालू चारा घोटाला मामले में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत सजायाफ्ता होकर रांची के होटवार जेल में बंद हैं। वे एक क्रिमिनल केस में दोषसिद्ध अपराधी हैं, न कि किसी जन आंदोलन के नेता हैं। फिलहाल स्वास्थ्य कारणों से रिम्स, रांची के पेइंग वार्ड में इलाज करा रहे हैं।

बता दें, जेल मैनुअल में साफ लिखा है कि लालू को केवल परिजनों से मिलने की इजाजत है। वह भी सप्ताह में एक दिन सिर्फ शनिवार को। इसके लिए पहले से इजाजत लेनी पड़ती है। नीरज ने कहा कि लालू ने अपने हस्ताक्षर से टिकट बांटे हैं। अगर अदालत से इजाजत नहीं ली गई तो लालू द्वारा बांटे गए टिकट पर चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के नामांकन को अवैध घोषित किया जाना चाहिए।

साथ ही मैनुअल में ये भी स्पष्ट है कि लालू को मुलाकात के समय राजनीतिक बातें नहीं करनी थी। लेकिन वे तो राजनीतिक उद्देश्य से सिर्फ राजनीतिक हस्तियों से ही मुलाकात करते रहे। यही नहीं लालू लगातार सोशल मीडिया पर भी अपने विचार व्यक्त करते हैं, जिससे चुनाव को प्रभावित किया जा रहा है। अगर, लालू का ट्विटर हैंडल कोई दूसरा व्यक्ति चला रहा है, तब भी लालू को बताना चाहिए कि लालू जेल से अपने विचार किससे साझा करते हैं।

कानूनी विशेषज्ञों ने जानकारी दी कि जेल अधीक्षक की स्वीकृति के बिना कोई भी सजायाफ्ता कैदी जेल से किसी तरह की सामग्री बाहर नहीं भेज सकता। पटना हाईकोर्ट के वरीय अधिवक्ता और चुनाव याचिका विशेषज्ञ पीके वर्मा ने कहा, “लालू प्रसाद चारा घोटाले में सजायाफ्ता हैं। वह राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। जेल में रहते हुए अध्यक्ष की हैसियत से अगर वे अपने हस्ताक्षर से पार्टी उम्मीदवारों के लिए जेल अधीक्षक की स्वीकृति के बिना चुनाव चिह्न आवंटित कर रहे हैं, तो उसे वैध नहीं माना जाएगा।”

गौरतलब है कि अगर लालू जेल अधीक्षक की स्वीकृति के साथ चुनाव चिह्न का आवंटन करते हैं, तो उसे अवैध नहीं माना जाएगा। जनप्रतिनिधित्व कानून में चुनाव चिह्न आवंटित करने पर रोक नहीं है। चूंकि लालू अभी जेल में सजायाफ्ता कैदी हैं, इसलिए उन पर जेल मैनुअल के नियम लागू होंगे।

हालांकि, अधिवक्ता प्रभाकर टेकरीवाल और शशिभूषण कुमार मंगलम ने भी पीके वर्मा की राय से सहमति जताई। उन्होने कहा कि जेल में बंद कोई कैदी अगर वकालतनामा पर अपना हस्ताक्षर करना चाहता है या किसी प्रकार का कोई आवेदन देना चाहता है तो उसे जेल अधीक्षक से न केवल स्वीकृति लेनी पड़ती है बल्कि उनका हस्ताक्षर और मुहर भी अनिवार्य होता है।

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2019 के माहौल के बीच राजनीतिक पार्टियों में अपनी दावेदारी को लेकर घमासान मचा हुआ है। इस बीच जनता दल यूनाईटेड ने आरोप लगाया है कि राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव जेल से अपनी पार्टी के प्रत्याशियों के टिकट बांट रहे हैं। जेडीयू ने इस मामले की शिकायत चुनाव आयोग से की और राजद के सभी उम्मीदवारों का नामांकन रद्द करने की मांग की है। दरअसल, जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने चुनाव आयोग को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि जेल में रहते हुए लालू ने लोकसभा चुनाव में अपने हस्ताक्षर से ही टिकट बांटा। तो क्या इसके लिए अदालत से इजाजत ली गई थी? वहीं, पत्र में लिखा गया है कि लालू चारा घोटाला मामले में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत सजायाफ्ता होकर रांची के होटवार जेल में बंद हैं। वे एक क्रिमिनल केस में दोषसिद्ध अपराधी हैं, न कि किसी जन आंदोलन के नेता हैं। फिलहाल स्वास्थ्य कारणों से रिम्स, रांची के पेइंग वार्ड में इलाज करा रहे हैं। बता दें, जेल मैनुअल में साफ लिखा है कि लालू को केवल परिजनों से मिलने की इजाजत है। वह भी सप्ताह में एक दिन सिर्फ शनिवार को। इसके लिए पहले से इजाजत लेनी पड़ती है। नीरज ने कहा कि लालू ने अपने हस्ताक्षर से टिकट बांटे हैं। अगर अदालत से इजाजत नहीं ली गई तो लालू द्वारा बांटे गए टिकट पर चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के नामांकन को अवैध घोषित किया जाना चाहिए। साथ ही मैनुअल में ये भी स्पष्ट है कि लालू को मुलाकात के समय राजनीतिक बातें नहीं करनी थी। लेकिन वे तो राजनीतिक उद्देश्य से सिर्फ राजनीतिक हस्तियों से ही मुलाकात करते रहे। यही नहीं लालू लगातार सोशल मीडिया पर भी अपने विचार व्यक्त करते हैं, जिससे चुनाव को प्रभावित किया जा रहा है। अगर, लालू का ट्विटर हैंडल कोई दूसरा व्यक्ति चला रहा है, तब भी लालू को बताना चाहिए कि लालू जेल से अपने विचार किससे साझा करते हैं। कानूनी विशेषज्ञों ने जानकारी दी कि जेल अधीक्षक की स्वीकृति के बिना कोई भी सजायाफ्ता कैदी जेल से किसी तरह की सामग्री बाहर नहीं भेज सकता। पटना हाईकोर्ट के वरीय अधिवक्ता और चुनाव याचिका विशेषज्ञ पीके वर्मा ने कहा, "लालू प्रसाद चारा घोटाले में सजायाफ्ता हैं। वह राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। जेल में रहते हुए अध्यक्ष की हैसियत से अगर वे अपने हस्ताक्षर से पार्टी उम्मीदवारों के लिए जेल अधीक्षक की स्वीकृति के बिना चुनाव चिह्न आवंटित कर रहे हैं, तो उसे वैध नहीं माना जाएगा।" गौरतलब है कि अगर लालू जेल अधीक्षक की स्वीकृति के साथ चुनाव चिह्न का आवंटन करते हैं, तो उसे अवैध नहीं माना जाएगा। जनप्रतिनिधित्व कानून में चुनाव चिह्न आवंटित करने पर रोक नहीं है। चूंकि लालू अभी जेल में सजायाफ्ता कैदी हैं, इसलिए उन पर जेल मैनुअल के नियम लागू होंगे। हालांकि, अधिवक्ता प्रभाकर टेकरीवाल और शशिभूषण कुमार मंगलम ने भी पीके वर्मा की राय से सहमति जताई। उन्होने कहा कि जेल में बंद कोई कैदी अगर वकालतनामा पर अपना हस्ताक्षर करना चाहता है या किसी प्रकार का कोई आवेदन देना चाहता है तो उसे जेल अधीक्षक से न केवल स्वीकृति लेनी पड़ती है बल्कि उनका हस्ताक्षर और मुहर भी अनिवार्य होता है।