लालू : नीतीश पीठ में ख़ंजर घोपने वाले, पिछड़ों के दुश्मन नंबर एक

पटना: महागठबंधन टूटने के बाद आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव सहित पूरा परिवार नीतीश को निशाने पर लिए हुए है. बुधवार को तेजस्वी यादव ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके नीतीश कैबिनेट में दागी मंत्रियों का जिक्र करके उनकी नैतिकता पर सवाल खड़े किए. लालू ने भी हमालवर रुख जारी रखा.

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री ने बाकयदा फेसबुक पर आज एक और लिखकर नीतीश कुमार से जुड़े इतिहास को सामने लाने की कोशिश की. लालू ने नीतीश को आरएसएस का एजेंट बताते हुए उन्हें पिछड़ों का सबसे बड़ा दुश्मन करार दिया. मंगलवार को भी लालू ने पोस्ट लिखकर नीतीश की खिचाई की थी.

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लालू ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा, “बाबरी मस्जिद ध्वस्त करने के बाद जब आडवाणी देशभर में घूम रहे थे तो नीतीश 1994 में बंबई में आडवाणी का हाथ अपने हाथ से उठाकर एकता का प्रदर्शन कर रहा था. जब पूरे देश में मंडल की राजनीति उफान पर थी, बिहार में हमारी और यूपी में मुलायम सिंह और मान्यवर कांशीराम की सरकार थी.

सदियों से सतायें वंचित, उपेक्षित, दलित, अकलियत और पिछड़ों की एकता चरम पर थी, सभी पीड़ित लोग एक दूसरे के दर्द के साझेदार बनकर एक ही माला के सुंदर मोती बन रहे थे. उस दौर में अपनी संकीर्ण मानसिकता और अतिमहत्वकांक्षी होने के कारण नीतीश कुमार बहुजनों के हितों की तिलांजलि देकर RSS की गोद में जाकर खेलने वाला पहला पिछड़ा नेता था. नीतीश कुमार भाजपा नेताओं के साथ घूम घूमकर उस वक़्त आरएसएस को मज़बूत करने की वकालत करता था जिस वक़्त भाजपा और आरएसएस मंडल कमीशन, आरक्षण और वंचितों की भागीदारी का विरोध कर रही थी.”

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