RKS भदौरिया बने IAF के नए चीफ, बीएस धनोआ ने सौंपा कार्यभार

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RKS भदौरिया बने IAF के नए चीफ, बीएस धनोआ ने सौंपा कार्यभार

नई दिल्ली। भारतीय वायु सेना के उप प्रमुख एयर मार्शल राकेश कुमार सिंह भदौरिया अब भारतीय वायुसेना के नए अध्यक्ष हो गये हैं। एयर मार्शल भदौरिया ने सोमवार को भारतीय एयरफोर्स चीफ की जिम्मेदारी संभाल ली है। वह वायुसेना के 26वें प्रमुख बने हैं। व​हीं एयर मार्शल बीएस धनोआ सोमवार को कार्यमुक्त हो गए। बीएस धनोआ ने एयर चीफ मार्शल अरुप राहा के सेवानिवृत्त होने के बाद 31 दिसंबर 2016 को पद ग्रहण किया था।

Rks Bhadauria Appointed As New Chief Of Iaf :

बीएस धनोआ के सेवानिवृत होने के बाद आज आरकेएस भदौरिया ने वायुसेना के नए चीफ का कार्यभार संभाल लिया है। सेवानिवृत होने से पहले धनोआ दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचे। यहां उन्होंने शहीद हुए जवानों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

एयर मार्शल भदौरिया नेशनल डिफेंस एकेडमी के पूर्व छात्र हैं और 15 जून 1980 को उन्हें वायुसेना के फाइटर स्ट्रीम का कमीशन अधिकारी बनाया गया था। ओवर आल मेरिट क्रम में पहला स्थान प्राप्त करने पर उन्हें स्वॉर्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित किया जा चुका है। भदौरिया के अनुभव की बात करें तो उनके पास 26 प्रकार के लड़ाकू परिवहन विमानों को उड़ाने का कुल 4250 घंटों से अधिक का अनुभव है। वे प्रयोग जांच पायलट और लेविल ए वाले फ्लाइंग इंस्ट्रक्टक और पायलट अटैक इंस्ट्रक्टर भी हैं।

एयर मार्शल भदौरिया हल्के युद्धत विमानों पर प्रारंभिक उड़ान जांचों में प्रारंभिक तौर पर शामिल रह चुके हैं। वे जगुआर स्क्वाड्रन और प्रीमियर एयर फोर्स स्टेशन का कमान, एयरक्राफ्ट और सिस्टम टेस्टिंग स्टेबलिस्टमेंट में फ्लाइट टेस्ट स्क्वाड्रन का कमान अधिकारी, फ्लाइट कोम्बेट एयरक्राफ्ट परियोजना पर आधारित राष्ट्रीय उड़ान परीक्षण केंद्र का प्रमुख जांच पायलट और परियोजना निदेशक का पद पर भी काम कर चुके हैं।

राफेल उड़ाने वाले चुनिंदा पायलट में एक

अपनी 39 साल की सेवा में आरकेएस भदौरिया ने जगुआर स्क्वाड्रन और एक प्रमुख वायु सेना स्टेशन का नेतृत्व किया। उन्होंने जीपीएस का इस्तेमाल कर जगुआर विमान से बमबारी करने का तरीका ईजाद किया। यह वर्ष 1999 में ‘ऑपरेशन सफेद’ सागर में जगुआर विमान की बमबारी में भूमिका से खासतौर से जुड़ा है। वह वायु सेना के उन चुनिंदा पायलटों में से एक हैं जिन्होंने राफेल विमान उड़ाया है। जुलाई में भारत और फ्रांस की वायु सेनाओं के बीच गरुड़ अभ्यास के दौरान भदौरिया ने राफेल विमान उड़ाया था।

हम हमेशा तैयार हैं

वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया से जब यह पूछा गया कि क्या भविष्य में वायुसेना एक और बालाकोट जैसी स्ट्राइक करने के लिए तैयार है तो उन्होंने कहा कि हम तब भी तैयार थे, हम अगली बार के लिए भी तैयार हैं। हम किसी भी चुनौती, किसी भी खतरे का सामना करने के लिए तैयार रहेंगे। भदौरिया ने पाकिस्तान के बालाकोट आतंकी शिविर के फिर से सक्रिय होने पर कहा कि हम रिपोर्टों से अवगत हैं और जब भी आवश्यक होगा, हम आवश्यक कार्रवाई करेंगे।

मिल चुके हैं कई पदक

एयर मार्शल भदौरिया प्रायोगिक टेस्ट पायलट होने के साथ कैट ‘ए’ कैटेगरी के क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और पायलट अटैक इंस्ट्रक्टर भी हैं। इनकी कुशल परिचालन क्षमता के कारण इन्हें साल 2002 में वायु सेना पदक, साल 2013 में अति विशिष्ट सेवा पदक और साल 2018 में परम विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया। राकेश कुमार सिंह भदौरिया भारतीय वायुसेना के जगुआर स्क्वाड्रन और दक्षिणी पश्चिमी सीमा पर स्थित एक प्रमुख वायुसेना स्टेशन के प्रमुख भी रह चुके हैं।

नई दिल्ली। भारतीय वायु सेना के उप प्रमुख एयर मार्शल राकेश कुमार सिंह भदौरिया अब भारतीय वायुसेना के नए अध्यक्ष हो गये हैं। एयर मार्शल भदौरिया ने सोमवार को भारतीय एयरफोर्स चीफ की जिम्मेदारी संभाल ली है। वह वायुसेना के 26वें प्रमुख बने हैं। व​हीं एयर मार्शल बीएस धनोआ सोमवार को कार्यमुक्त हो गए। बीएस धनोआ ने एयर चीफ मार्शल अरुप राहा के सेवानिवृत्त होने के बाद 31 दिसंबर 2016 को पद ग्रहण किया था। बीएस धनोआ के सेवानिवृत होने के बाद आज आरकेएस भदौरिया ने वायुसेना के नए चीफ का कार्यभार संभाल लिया है। सेवानिवृत होने से पहले धनोआ दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचे। यहां उन्होंने शहीद हुए जवानों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। एयर मार्शल भदौरिया नेशनल डिफेंस एकेडमी के पूर्व छात्र हैं और 15 जून 1980 को उन्हें वायुसेना के फाइटर स्ट्रीम का कमीशन अधिकारी बनाया गया था। ओवर आल मेरिट क्रम में पहला स्थान प्राप्त करने पर उन्हें स्वॉर्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित किया जा चुका है। भदौरिया के अनुभव की बात करें तो उनके पास 26 प्रकार के लड़ाकू परिवहन विमानों को उड़ाने का कुल 4250 घंटों से अधिक का अनुभव है। वे प्रयोग जांच पायलट और लेविल ए वाले फ्लाइंग इंस्ट्रक्टक और पायलट अटैक इंस्ट्रक्टर भी हैं। एयर मार्शल भदौरिया हल्के युद्धत विमानों पर प्रारंभिक उड़ान जांचों में प्रारंभिक तौर पर शामिल रह चुके हैं। वे जगुआर स्क्वाड्रन और प्रीमियर एयर फोर्स स्टेशन का कमान, एयरक्राफ्ट और सिस्टम टेस्टिंग स्टेबलिस्टमेंट में फ्लाइट टेस्ट स्क्वाड्रन का कमान अधिकारी, फ्लाइट कोम्बेट एयरक्राफ्ट परियोजना पर आधारित राष्ट्रीय उड़ान परीक्षण केंद्र का प्रमुख जांच पायलट और परियोजना निदेशक का पद पर भी काम कर चुके हैं।

राफेल उड़ाने वाले चुनिंदा पायलट में एक

अपनी 39 साल की सेवा में आरकेएस भदौरिया ने जगुआर स्क्वाड्रन और एक प्रमुख वायु सेना स्टेशन का नेतृत्व किया। उन्होंने जीपीएस का इस्तेमाल कर जगुआर विमान से बमबारी करने का तरीका ईजाद किया। यह वर्ष 1999 में 'ऑपरेशन सफेद' सागर में जगुआर विमान की बमबारी में भूमिका से खासतौर से जुड़ा है। वह वायु सेना के उन चुनिंदा पायलटों में से एक हैं जिन्होंने राफेल विमान उड़ाया है। जुलाई में भारत और फ्रांस की वायु सेनाओं के बीच गरुड़ अभ्यास के दौरान भदौरिया ने राफेल विमान उड़ाया था।

हम हमेशा तैयार हैं

वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया से जब यह पूछा गया कि क्या भविष्य में वायुसेना एक और बालाकोट जैसी स्ट्राइक करने के लिए तैयार है तो उन्होंने कहा कि हम तब भी तैयार थे, हम अगली बार के लिए भी तैयार हैं। हम किसी भी चुनौती, किसी भी खतरे का सामना करने के लिए तैयार रहेंगे। भदौरिया ने पाकिस्तान के बालाकोट आतंकी शिविर के फिर से सक्रिय होने पर कहा कि हम रिपोर्टों से अवगत हैं और जब भी आवश्यक होगा, हम आवश्यक कार्रवाई करेंगे।

मिल चुके हैं कई पदक

एयर मार्शल भदौरिया प्रायोगिक टेस्ट पायलट होने के साथ कैट 'ए' कैटेगरी के क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और पायलट अटैक इंस्ट्रक्टर भी हैं। इनकी कुशल परिचालन क्षमता के कारण इन्हें साल 2002 में वायु सेना पदक, साल 2013 में अति विशिष्ट सेवा पदक और साल 2018 में परम विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया। राकेश कुमार सिंह भदौरिया भारतीय वायुसेना के जगुआर स्क्वाड्रन और दक्षिणी पश्चिमी सीमा पर स्थित एक प्रमुख वायुसेना स्टेशन के प्रमुख भी रह चुके हैं।