रोहतास प्लूमेरिया का बड़ा घोटाला : कब्जा देकर बैंकों में गिरवी रख दिए फ्लैट, लिया 92 करोड़ का लोन

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रोहतास प्लूमेरिया का बड़ा घोटाला : कब्जा देकर बैंकों में गिरवी रख दिए फ्लैट, 92 करोड़ लिया लोन

लखनऊ। विभूतिखंड स्थित रोहतास प्लूमेरिया में एक बड़ा घोटाला सामने आया है। बिल्डर्स ने कब्जा देने के बाद फ्लैटों को ​बैंकों में गिरवी रखकर 92 करोड़ रुपये का लोन ले लिया। वहीं, लोन लेने के बाद बिल्डर्स फरार हो गए हैं। ऐसे में बैंकों ने अब फ्लैट खाली करवाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया है। इसको लेकर आवंटी काफी परेशान हैं और वह कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

Rohtas Plumeria Big Scam :

वहीं, बैंकों ने रकम डूबने से बचाने के लिए आवंटियों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। रोहतास प्लूमेरिया रेजिडेंट वेलफेयर असोसिएशन के अध्यक्ष डॉ़ विनय राज पांडेय ने बताया कि बैंकों की तरफ से जिला प्रशासन और पुलिस को भी पत्र भेजा जाने लगा है। उधर, इसकी जानकारी आवंटियों को हुई तो वह अपना फ्लैट बचाने के लिए कभी एसएसपी तो कभी जिलाधिकारी कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। इनमें से कई आवंटी ऐसे हैं, जो शहर के बाहर नौकरी करते हैं और उनका परिवार इन फ्लैट्स में रहता है।

बता दें कि, बिल्डर्स ने आंवटियों को फ्लैट का कब्जा दे दिया लेकिन कंप्लीशन  सर्टिफिकेट न होने की बात कहते हुए रजिस्ट्री नहीं की थी। बिल्डर्स ने ऐसे सभी फ्लैट्स के रजिस्ट्री पेपर लगाकर डिवेलपर ने बैंकों से करोड़ों रुपये का लोन ले लिया और फरार हो गए हैं। वहीं, अब आवंटियों के सामने बड़ी समस्या आ गयी है। उन्होंने बिल्डर्स को पूरे रुपये दे दिये थे लेकिन फ्लैट के कागज बैंकों के पास हैं। डिवेपलर फरार है और एलडीए से लेकर रेरा तक के आदेश बेमानी हो चुके हैं। ऐसे में आवंटियों को रास्ता नहीं सूझ रहा है।

आवंटियों की नहीं हो रही सुनवाई
रोहतास ​प्यूमेरिया के बिल्डर्स के खिलाफ पहले भी कई शिकायते आ चुकी हैं। पीड़ित बिल्डर्स के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर इधर—उधर भटक रहे हैं लेकिन इन पर शिकंजा नहीं कसा जा पा रहा है। वहीं, जिन आवंटियों को फ्लैट मिला वह भी बदहाली की स्थिति में हैं। अपार्टमेंट में स्विमिंग पूल नाममात्र का बनाया गया, जो सूखा पड़ा है। जगह-जगह बिजली के तार इधर-उधर पड़े हैं। मैनहोल खुले पड़े हैं, जिनमें किसी भी समय हादसे की आशंका बनी रहती है। वहीं, पार्किंग के लिए खाली छोड़ी गई जगह पर डिवेलपर के ही गुर्गे कब्जा कर अवैध निर्माण करवा रहे थे, जिसे रोकने के लिए आवंटियों को मोर्चा लेना पड़ा। पुलिस और एलडीए की तरफ से इसे नहीं रोका गया तो आवंटियों ने बुलडोजर किराए पर मंगाकर इसे तुड़वाया।

लखनऊ। विभूतिखंड स्थित रोहतास प्लूमेरिया में एक बड़ा घोटाला सामने आया है। बिल्डर्स ने कब्जा देने के बाद फ्लैटों को ​बैंकों में गिरवी रखकर 92 करोड़ रुपये का लोन ले लिया। वहीं, लोन लेने के बाद बिल्डर्स फरार हो गए हैं। ऐसे में बैंकों ने अब फ्लैट खाली करवाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया है। इसको लेकर आवंटी काफी परेशान हैं और वह कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं, बैंकों ने रकम डूबने से बचाने के लिए आवंटियों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। रोहतास प्लूमेरिया रेजिडेंट वेलफेयर असोसिएशन के अध्यक्ष डॉ़ विनय राज पांडेय ने बताया कि बैंकों की तरफ से जिला प्रशासन और पुलिस को भी पत्र भेजा जाने लगा है। उधर, इसकी जानकारी आवंटियों को हुई तो वह अपना फ्लैट बचाने के लिए कभी एसएसपी तो कभी जिलाधिकारी कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। इनमें से कई आवंटी ऐसे हैं, जो शहर के बाहर नौकरी करते हैं और उनका परिवार इन फ्लैट्स में रहता है। बता दें कि, बिल्डर्स ने आंवटियों को फ्लैट का कब्जा दे दिया लेकिन कंप्लीशन  सर्टिफिकेट न होने की बात कहते हुए रजिस्ट्री नहीं की थी। बिल्डर्स ने ऐसे सभी फ्लैट्स के रजिस्ट्री पेपर लगाकर डिवेलपर ने बैंकों से करोड़ों रुपये का लोन ले लिया और फरार हो गए हैं। वहीं, अब आवंटियों के सामने बड़ी समस्या आ गयी है। उन्होंने बिल्डर्स को पूरे रुपये दे दिये थे लेकिन फ्लैट के कागज बैंकों के पास हैं। डिवेपलर फरार है और एलडीए से लेकर रेरा तक के आदेश बेमानी हो चुके हैं। ऐसे में आवंटियों को रास्ता नहीं सूझ रहा है। आवंटियों की नहीं हो रही सुनवाई रोहतास ​प्यूमेरिया के बिल्डर्स के खिलाफ पहले भी कई शिकायते आ चुकी हैं। पीड़ित बिल्डर्स के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर इधर—उधर भटक रहे हैं लेकिन इन पर शिकंजा नहीं कसा जा पा रहा है। वहीं, जिन आवंटियों को फ्लैट मिला वह भी बदहाली की स्थिति में हैं। अपार्टमेंट में स्विमिंग पूल नाममात्र का बनाया गया, जो सूखा पड़ा है। जगह-जगह बिजली के तार इधर-उधर पड़े हैं। मैनहोल खुले पड़े हैं, जिनमें किसी भी समय हादसे की आशंका बनी रहती है। वहीं, पार्किंग के लिए खाली छोड़ी गई जगह पर डिवेलपर के ही गुर्गे कब्जा कर अवैध निर्माण करवा रहे थे, जिसे रोकने के लिए आवंटियों को मोर्चा लेना पड़ा। पुलिस और एलडीए की तरफ से इसे नहीं रोका गया तो आवंटियों ने बुलडोजर किराए पर मंगाकर इसे तुड़वाया।