RRB RRC Group D PET 2019: डी -ग्रुप अभ्यार्थियों को जाने क्यों उठानी पड़ी 35 किलों रेत की बोरी

RRB RRC Group D PET 2019
RRB RRC Group D PET 2019: बेरोज़गारी के चलते रेलवे के डी-ग्रुप में बीटेक, डिप्लोमा इंजीनियर, बीएससी एजी व एमए अभयर्थियों ने 35 किलो उठाई रेत की बोरी

लखनऊ। रेलवे की सबसे छोटी नौकरी ग्रुप डी को पाने के लिए गुरूवार  दिन सभी अभ्यार्थियों  ने  डीएसए ग्राउंड में चल रही शारीरिक दक्षता परीक्षा दिया। जहां बेरोजगारी साफ़ दिखाई दी।  सरकारी नौकरी की चाह में 35 किलो रेत की बोरी सिर पर उठाकर दौड़ने वालों में 10वीं पास के साथ-साथ बीटेक, डिप्लोमा इंजीनियर, बीएससी एजी व एमए पास युवा भी शामिल हो रहे हैं।  वहीं इलाहाबाद में ग्रुप डी पदों की शारीरिक दक्षता परीक्षा में दूसरे दिन आए 831 अभ्यार्थी में से दो अभ्यार्थी बोझ उठाने में विफल रहें और 562  अभ्यार्थी  गुरुवार को पास हुए।   

Rrb Rrc Group D Pet 2019 For The Job Of Group D Why Do These Candidates Have To Carry 35 Kg Sand Sack :


दूसरी ओर जब अन्य अभ्यर्थियों से पूछा गया की शैक्षिक योग्यता ज़्यादा होने पर उन्होंने ग्रुप- डी में क्यों अप्लाई किया तो उनका कहना था कि “नौकरी नहीं मिली तो रेलवे की ग्रुप डी भर्ती में शामिल होने चले आए, इंजीनियरिंग न सही, कोई नौकरी तो मिल जाए। कुछ समय बाद योग्यता के दम पर प्रमोशन पा लेंगे।” वहीं  राजकीय पॉलीटेक्निक लखनऊ से डिप्लोमा फाइनल के छात्र पंकज कुमार भी गुरुवार को 35 किलो कंधे पर उठाकर दौड़े। उनका कहना है कि “कोई एक नौकरी तो मिल जाए ताकि जिन्दगी कुछ आसान हो।”  

इस परीक्षा में कुल 831 अभ्यर्थी पहुंचे जिनमें अधिकतर की शैक्षिक योग्यता 10वीं से अधिक है। आगरा से आए कुंवरजीत सिंह ग्रेजुएट हैं। सहायक लोको पायलट भर्ती का मेन्स दे चुके हैं। नैनी और यूपी पुलिस में चुने जा चुके हैं लेकिन अभी बुलावा नहीं मिला है। बीएससी एजी विष्णु इंदौलिया भी चतुर्थ श्रेणी नौकरी के लिए दौड़ने वालों में शामिल रहें।   

शुक्रवार को 1500 अभ्यर्थी बुलाए गए हैं। रेलवे की ग्रुप डी भर्ती के लिए गुरुवार को डीएसए ग्राउंड पर हुई शारीरिक दक्षता परीक्षा में अभ्यर्थियों को बोझ उठाकर भी दौड़ना पड़ा। गुरुवार को 1000 अभ्यर्थियों में 831 अभ्यर्थी शारीरिक दक्षता परीक्षा देने के लिए जुटे। इनमें दो 35 किलो का बोझ नहीं उठा पाए लेकिन 562 अभ्यर्थी चुने गए। रेलवे भर्ती प्रकोष्ठ के चेयरमैन विवेक प्रकाश ने बताया कि गुरुवार को 269 अभ्यर्थी छांट दिए गए।

लखनऊ। रेलवे की सबसे छोटी नौकरी ग्रुप डी को पाने के लिए गुरूवार  दिन सभी अभ्यार्थियों  ने  डीएसए ग्राउंड में चल रही शारीरिक दक्षता परीक्षा दिया। जहां बेरोजगारी साफ़ दिखाई दी।  सरकारी नौकरी की चाह में 35 किलो रेत की बोरी सिर पर उठाकर दौड़ने वालों में 10वीं पास के साथ-साथ बीटेक, डिप्लोमा इंजीनियर, बीएससी एजी व एमए पास युवा भी शामिल हो रहे हैं।  वहीं इलाहाबाद में ग्रुप डी पदों की शारीरिक दक्षता परीक्षा में दूसरे दिन आए 831 अभ्यार्थी में से दो अभ्यार्थी बोझ उठाने में विफल रहें और 562  अभ्यार्थी  गुरुवार को पास हुए।   


दूसरी ओर जब अन्य अभ्यर्थियों से पूछा गया की शैक्षिक योग्यता ज़्यादा होने पर उन्होंने ग्रुप- डी में क्यों अप्लाई किया तो उनका कहना था कि "नौकरी नहीं मिली तो रेलवे की ग्रुप डी भर्ती में शामिल होने चले आए, इंजीनियरिंग न सही, कोई नौकरी तो मिल जाए। कुछ समय बाद योग्यता के दम पर प्रमोशन पा लेंगे।" वहीं  राजकीय पॉलीटेक्निक लखनऊ से डिप्लोमा फाइनल के छात्र पंकज कुमार भी गुरुवार को 35 किलो कंधे पर उठाकर दौड़े। उनका कहना है कि "कोई एक नौकरी तो मिल जाए ताकि जिन्दगी कुछ आसान हो।"  

इस परीक्षा में कुल 831 अभ्यर्थी पहुंचे जिनमें अधिकतर की शैक्षिक योग्यता 10वीं से अधिक है। आगरा से आए कुंवरजीत सिंह ग्रेजुएट हैं। सहायक लोको पायलट भर्ती का मेन्स दे चुके हैं। नैनी और यूपी पुलिस में चुने जा चुके हैं लेकिन अभी बुलावा नहीं मिला है। बीएससी एजी विष्णु इंदौलिया भी चतुर्थ श्रेणी नौकरी के लिए दौड़ने वालों में शामिल रहें।   

शुक्रवार को 1500 अभ्यर्थी बुलाए गए हैं। रेलवे की ग्रुप डी भर्ती के लिए गुरुवार को डीएसए ग्राउंड पर हुई शारीरिक दक्षता परीक्षा में अभ्यर्थियों को बोझ उठाकर भी दौड़ना पड़ा। गुरुवार को 1000 अभ्यर्थियों में 831 अभ्यर्थी शारीरिक दक्षता परीक्षा देने के लिए जुटे। इनमें दो 35 किलो का बोझ नहीं उठा पाए लेकिन 562 अभ्यर्थी चुने गए। रेलवे भर्ती प्रकोष्ठ के चेयरमैन विवेक प्रकाश ने बताया कि गुरुवार को 269 अभ्यर्थी छांट दिए गए।