आज है गंगा दशहरा, जाने गंगा में नहाने के नियम और कैसे गंगा स्नान से खत्म होते हैं पाप

आज है गंगा दशहरा, जाने गंगा में नहाने के नियम और कैसे गंगा स्नान से खत्म होते हैं पाप
आज है गंगा दशहरा, जाने गंगा में नहाने के नियम और कैसे गंगा स्नान से खत्म होते हैं पाप

लखनऊ। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को ‘गंगा दशहरा’ मनाया जाता है। वैदिक ज्योतिष की माने तो जब सूर्य वृष और चंद्रमा कन्या राशि के हस्त नक्षत्र में थे, तब गंगा जी का हिमालय से निर्गमन हुआ था। मान्यता है कि गंगा का नाम लेने, सुनने, देखने, उसका जल ग्रहण करने, छूने और उसमें स्नान करने से मनुष्य के जन्मों के पाप समाप्त हो जाते हैं। इस बार गंगा दशहरा 12 जून यानि आज के दिन मनाया जा रहा है। आज हम आपको गंगा स्नान से खत्म होने वाले पाप और गंगा स्नान के कुछ नियम बताने जा रहे हैं…

Rules Of Ganga Snan :

गंगा स्नान के नियम

  • गंगा स्नान से पहले सामान्य जल से अच्छे से नहा लें।
  • गंगा नदी में सिर्फ डूबकी लगाएं।
  • पवित्र नदी में शरीर का मेल न निकालें।
  • गंगा नदी में मनुष्य की अशुद्धि नहीं जानी चाहिए।
  • स्नान करते समय शरीर को हाथों से नहीं रगड़ना चाहिए।
  • गंगा स्नान करने के बाद शरीर को कपड़े से नहीं पोंछना चाहिए।
  • जल को शरीर पर की सुखने देना चाहिए।
  • घर पर नहाने की स्थिति में गंगाजल की कुछ बूंदे या कम मात्रा ही नहाने के पानी में मिलाकर नहाएं।
  • मृत्यु या जन्म सूतक के समय भी गंगा स्नान किया जा सकता है, लेकिन महिलाओं को अपवित्र स्थिति में गंगा स्नान नहीं करना चाहिए।

गंगा स्नान से इन पापों से मिलती है मुक्ति

  • स्मृतिग्रंथ में दस प्रकार के पाप बताए गए हैं।
  • कायिक, वाचिक और मानसिक। इनके अनुसारकिसी दूसरे की वस्तु लेना, शास्त्र वर्जित हिंसा, परस्त्री गमन ये तीन प्रकार के कायिक यानी शारीरिक पाप हैं।
  • कटु बोलना, असत्य भाषण, परोक्ष में यानी पीठ पीछे किसी की निंदा करना, निष्प्रयोजन बातें करना ये चार प्रकार के वाचिक पाप हैं।
  • इनके अलावा परद्रव्य को अन्याय से लेने का विचार करना, मन में किसी का अनिष्ट करने की इच्छा करना, असत्य हठ करना ये तीन प्रकार के मानसिक पाप हैं।
  • गंगा दशहरा को गंगा नदी में स्नान करने मात्र से पापों का नाश होता है तथा अनंत पुण्यफल की प्राप्ति होती है।
लखनऊ। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को 'गंगा दशहरा' मनाया जाता है। वैदिक ज्योतिष की माने तो जब सूर्य वृष और चंद्रमा कन्या राशि के हस्त नक्षत्र में थे, तब गंगा जी का हिमालय से निर्गमन हुआ था। मान्यता है कि गंगा का नाम लेने, सुनने, देखने, उसका जल ग्रहण करने, छूने और उसमें स्नान करने से मनुष्य के जन्मों के पाप समाप्त हो जाते हैं। इस बार गंगा दशहरा 12 जून यानि आज के दिन मनाया जा रहा है। आज हम आपको गंगा स्नान से खत्म होने वाले पाप और गंगा स्नान के कुछ नियम बताने जा रहे हैं... गंगा स्नान के नियम
  • गंगा स्नान से पहले सामान्य जल से अच्छे से नहा लें।
  • गंगा नदी में सिर्फ डूबकी लगाएं।
  • पवित्र नदी में शरीर का मेल न निकालें।
  • गंगा नदी में मनुष्य की अशुद्धि नहीं जानी चाहिए।
  • स्नान करते समय शरीर को हाथों से नहीं रगड़ना चाहिए।
  • गंगा स्नान करने के बाद शरीर को कपड़े से नहीं पोंछना चाहिए।
  • जल को शरीर पर की सुखने देना चाहिए।
  • घर पर नहाने की स्थिति में गंगाजल की कुछ बूंदे या कम मात्रा ही नहाने के पानी में मिलाकर नहाएं।
  • मृत्यु या जन्म सूतक के समय भी गंगा स्नान किया जा सकता है, लेकिन महिलाओं को अपवित्र स्थिति में गंगा स्नान नहीं करना चाहिए।
गंगा स्नान से इन पापों से मिलती है मुक्ति
  • स्मृतिग्रंथ में दस प्रकार के पाप बताए गए हैं।
  • कायिक, वाचिक और मानसिक। इनके अनुसारकिसी दूसरे की वस्तु लेना, शास्त्र वर्जित हिंसा, परस्त्री गमन ये तीन प्रकार के कायिक यानी शारीरिक पाप हैं।
  • कटु बोलना, असत्य भाषण, परोक्ष में यानी पीठ पीछे किसी की निंदा करना, निष्प्रयोजन बातें करना ये चार प्रकार के वाचिक पाप हैं।
  • इनके अलावा परद्रव्य को अन्याय से लेने का विचार करना, मन में किसी का अनिष्ट करने की इच्छा करना, असत्य हठ करना ये तीन प्रकार के मानसिक पाप हैं।
  • गंगा दशहरा को गंगा नदी में स्नान करने मात्र से पापों का नाश होता है तथा अनंत पुण्यफल की प्राप्ति होती है।