गोलियों के बीच बस भागता रहा ड्राईवर सलीम, दिलेरी नहीं दिखाई होती तो क्या होता…

जम्मू. अनंतनाग में अमरनाथ यात्रियों से भरी बस पर कल रात आतंकियों ने हमला कर दिया, जिसमे 7 श्रद्धालुयों ने जान गंवा दी वहीं 20 लोग इस हमले में घायल हो गए। बस में सवार यात्रियों की माने तो यह मंज़र और भी दर्दनाक होता अगर बस के चालन सलीम ने साहस नहीं दिखाया होता। सलीम के भाई जावेद की माने तो जब आतंकियों ने बस के सामने से अंधाधुंध फायरिंग शुरू की तो लोग दहशत में आ गए थे लेकिन बस चालाक सलीम का हौसला कम नहीं हुआ और गोलियों के बीच बस को भागता रहा। वह बस को तब तक भगाता रहा जब तक कि बस आतंकियों के पहुँच से दूर नहीं हो गयी इसके बाद सलीम ने अपने भाई को फोन कर हादसे के बारे में बताया। ड्राइवर सलीम के चचेरे भाई जावेद ने कहा, “वो (सलीम) 7 लोगों की जान नहीं बचा पाया, लेकिन बस को सेफ जगह ले जाकर उसने 46 पैसेंजर्स की जान बचा ली।’ इसमें 54 लोग सवार थे।

आतंकियों की ओर से गोलियों की बौछार जारी थी लेकिन सलीम ने एक भी सेकेंड के लिए बस नहीं रोकी। उन्‍हें यह बात बखूबी मालूम थी कि बस को रोकने का मतलब और ज्‍यादा नुकसान होगा। आतंकी हमले के बीच ही वह बस चलाते रहे और यात्रियों की सुरक्षा का ध्‍यान रखा। अगर वह यह करने का फैसला नहीं लेते तो शायद मौत का आंकड़ा सात से बढ़कर और ज्‍यादा हो सकता था। फायरिंग के बीच ही सलीम बस को ड्राइव करके पास के आर्मी कैंप तक ले गए और फिर उन्‍होंने बस रोकी। आर्मी कैंप घटनास्‍थल से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर था।

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टूर ऑपरेटर हर्ष देसाई जो बस में मौजूद था उसकी माने तो ड्राईवर सलीम ने अपने सहस और सुझबुझ के दम पर हम सब की जान बचा ली, नहीं तो जिस तरह से आतंकी हमला कर रहें थे किसी का भी बच पाना बेहद मुश्किल लग रहा था। एक आतंकी ने तो बस में घुसने की कोशिश भी की, लेकिन उसे हेल्पर ने धक्का दे दिया। जब आतंकियों ने हमला बोला और अंधाधुंध फायरिंग करने लगे तब बस के ड्राइवर ने संयम का शानदार प्रदर्शन किया और डरे बिना बस को आगे भगाते ले गए। बस के ड्राइवर का पूरा नाम शेख सलीम गफूर भाई है। गोलियों के बीच बस को भगाकर आगे ले जाने के लिए उनकी काफी तारीफ हो रही है। बस चालक के इस कारनामे की वजह से गुजरात सरकार इन्हें वीरता पुरस्कार से नवाजी, जिसके लिए इनका नाम भेज दिया गया है।

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