डॉलर के मुकाबले फिर कमजोर पड़ा रुपया, पहुंचा सबसे निचले स्तर पर

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सबसे निचले स्तर पर पहुंचा रुपया, जानें क्या कहते हैं जानकार

नई दिल्ली। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में जारी गिरावट थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 46 पैसे टूटकर 70.56 के स्तर पर हैं। हालांकि, मंगलवार के कारोबार में रुपया हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ था। आयातकों की तरफ से डॉलर की मांग बढ़ने का असर रुपये पर देखने को मिल रहा है। मंगलवार की बात करें तो रुपये ने इस दिन मजबूत शुरुआत की। बंद होने के दौरान भी यह 6 पैसे की मजबूती के साथ बंद हुआ। मंगलवार को रुपया एक डॉलर के मुकाबले 70.16 के स्तर पर बंद होने में कामयाब रहा।

Rupee Dollar Exchange Value Rupee Open Asian Market :

एक्सपर्ट्स कहते हैं कि रुपये में आगे भी गिरावट जारी रह सकती है। दरअसल अमेरिकी अर्थव्यवस्था में आए सुधार के चलते अमेरिकी डॉलर मजबूत हो रहा है। इसीलिए दुनियाभर की करेंसी पर दबाव है। हालांकि, देश में विदेशी निवेश लगातार बढ़ रहा है। इसीलिए रुपये में ज्यादा बड़ी गिरावट की आशंका नहीं है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार मजबूत होते डॉलर और तुर्की में जारी आर्थ‍िक संकट के चलते बन रहे समीकरणों ने रुपये को कमजारे करने का काम किया है। रुपये के कमजोर होने का असर कहीं न कहीं पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी देखने को मिल रहा है।

दरअसल पहले कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में रुपये में गिरावट की वजह से तेल कंपनियों की लागत भी बढ़ रही है। इसका सीधा असर तेल कंपनियों के खर्च बढ़ने के तौर पर सामने आ रहा है। सकी वजह से लगातार देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी का स‍िलस‍िला जारी है।

नई दिल्ली। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में जारी गिरावट थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 46 पैसे टूटकर 70.56 के स्तर पर हैं। हालांकि, मंगलवार के कारोबार में रुपया हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ था। आयातकों की तरफ से डॉलर की मांग बढ़ने का असर रुपये पर देखने को मिल रहा है। मंगलवार की बात करें तो रुपये ने इस दिन मजबूत शुरुआत की। बंद होने के दौरान भी यह 6 पैसे की मजबूती के साथ बंद हुआ। मंगलवार को रुपया एक डॉलर के मुकाबले 70.16 के स्तर पर बंद होने में कामयाब रहा।एक्सपर्ट्स कहते हैं कि रुपये में आगे भी गिरावट जारी रह सकती है। दरअसल अमेरिकी अर्थव्यवस्था में आए सुधार के चलते अमेरिकी डॉलर मजबूत हो रहा है। इसीलिए दुनियाभर की करेंसी पर दबाव है। हालांकि, देश में विदेशी निवेश लगातार बढ़ रहा है। इसीलिए रुपये में ज्यादा बड़ी गिरावट की आशंका नहीं है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार मजबूत होते डॉलर और तुर्की में जारी आर्थ‍िक संकट के चलते बन रहे समीकरणों ने रुपये को कमजारे करने का काम किया है। रुपये के कमजोर होने का असर कहीं न कहीं पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी देखने को मिल रहा है।दरअसल पहले कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में रुपये में गिरावट की वजह से तेल कंपनियों की लागत भी बढ़ रही है। इसका सीधा असर तेल कंपनियों के खर्च बढ़ने के तौर पर सामने आ रहा है। सकी वजह से लगातार देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी का स‍िलस‍िला जारी है।