एंबी वैली टाउनशिप बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंची सहारा इंडिया

सहारा इंडिया
एंबी वैली की नीलामी का आदेश जारी, सहारा इंडिया को बड़ा झटका

नई दिल्ली। सहारा इंडिया परिवार के प्रमुख सुब्रत रॉय सहारा ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर अपने ग्रुप के स्वामित्व वाली पुणे स्थित एंबी वैली टाउनशिप की नीलामी प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की है। सहारा समूह ने अपनी याचिका में कहा है कि निवेशकों की रकम जल्द से जल्द लौटाने के लिए समूह प्रयास कर रहा है। जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सहारा समूह की याचिका को स्वीकार करते हुए अदालत ने शीघ्र सुनवाई करने की बात कही है।

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई याचिका में कहा गया है कि सहारा समूह निवेशकों का पैसा लौटाने के लिए पूरी तरह से गंभीर है। चूंकि रकम बहुत बड़ी है इसलिए इसके जमा करवाने के लिए निर्धारित प्लान की एकबार समीक्षा कर समूह को थोड़ा और समय दिया जाए। तब तक के लिए एंबी वैली के नीलामी नोटीफिकेशन को रोक दिया जाए।

निवेशकों से धोखाधड़ी के मामले में सेबी की कार्रवाई के तहत अदालती प्रक्रिया का सामना कर रहे सहारा समूह को अपने निवेशकों का मूलधन और ब्याज मिलाकर करीब 36000 करोड़ रुपया सेबी के साझा खाते में जमा करवाने हैं। अदालत ने इस रकम की बसूली के लिए सहारा समूह के स्वामित्व वाली 35000 करोड़ कीमत की एंबी वैली टाउनशिप की नीलामी करने के निर्देश दिए थे। सहारा द्वारा रकम को किश्तों में जमा करवाने की अपील को संज्ञान में लेते हुए अदालत ने उसे राहत देते हुए नीलामी की प्रक्रिया को स्थगित कर दिया था।

अब तक सहारा समूह करीब 16000 करोड़ की​ किश्तें जमा करवा चुका है। 25 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने 7 सितंबर तक की मोहलत देते हुए सहारा समूह को 1500 करोड़ रुपए सेबी के खाते में जमा करवाने को कहा था। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में सहारा समूह को चेतावनी दी थी कि अगर 7 सितंबर तक 1500 करोड़ सेबी के खातों में जमा नहीं हुई तो अदालत एंबी वैली की नीलामी प्रक्रिया को आगे बढ़ा देगा।

आपको बता दें कि सहारा समूह ने सेबी के कानून को दर किनार करते हुए करीब 15000 करोड़ की रकम कन्वर्टेबल डिवेंचर जारी करके अपनी दो रियल इस्टेट कंपनियों के नाम से जमा की थी। गलत तरीके से जमा किए गए निवेश के मामले में सेबी की जांच में सहारा समूह को दोषी पाया गया। 2011 में सेबी और सहारा के बीच इसी मामले को लेकर विवाद शुरू हुआ। सेबी ने सहारा समूह के खिलाफ कार्रवाई करते हुए निवेशकों की रकम 15 प्रतिशत वार्षिक की दर से वापस लौटाने को कहा। सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय ने इस मामले को अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया। सुब्रत रॉय सहारा के रुख को देखते हुए सेबी ने सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया। जिसके बाद सुब्रत रॉय सहारा को लंबे समय तक जेल में भी रहना पड़ा। इस विवाद के लंबे खिंचने के चलते सेबी ने सहारा समूह पर 36000 करोड़ की देनदारी थोप दी है।