पुरानी और बोरिंग है ‘साहेब बीवी और गैंगस्टर 3’

पुरानी और बोरिंग है 'साहेब बीवी और गैंगस्टर 3
पुरानी और बोरिंग है 'साहेब बीवी और गैंगस्टर 3

Saheb Biwi Aur Gangster 3 Movie Review Sanjay Dutt Films Is Old And Boring

मुंबई। साहेब बीवी और गैंगस्टर 3’ संजय दत्त की जेल से छूटने के बाद ये दूसरी मूवी है इसके पहले वे भूमि में नजर आये थे लेकिन दोनों फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कोई कमाल नहीं कर पाए। ‘साहेब बीवी और गैंगस्टर 3 (Saheb Biwi Aur Gangster 3 )’ भी उसी कड़ी की अगली फिल्म है। पुराने जमाने की कहानी, खराब ट्रीटमेंट और लचर डायरेक्शन। ऐसा लगता ही नहीं है कि ये फिल्म ‘पान सिंह तोमर’ जैसी सधी हुई फिल्म बनाने वाले तिग्मांशू धूलिया की है।

‘साहेब बीवी और गैंगस्टर 3’ की कहानी साहेब जिमी शेरगिल, बीवी माही गिल और गैंगस्टर संजय दत्त की है। साहेब को ताकत की दरकार है, बीवी पहले से ही ताकत के नशे में चूर है और गैंगस्टर सबकुछ अपने मुताबिक करना चाहता है। लेकिन इश्क, सेक्स, ताकत और धोखे की ये अगली कड़ी उलझी हुई है। तिग्मांशु धूलिया ने’साहेब बीवी और गैंगस्टर 3’में सत्ता का पावर, चालाकी और षड़यंत्र को जारी रखा है। माधवी देवी (माही गिल) और साहेब (जिमी शेरगिल) लड़ते नजर आए हैं। इस बार ऐसा लगता है कि माधवी साहेब से आगे निकल गईं हैं।साहेब के जेल जाने के बाद वे मेंबर ऑफ पार्लियामेंट बन गईं हैं।

कहानी और स्क्रीनप्ले के मोर्चे पर कमजोर है। ‘साहेब बीवी और गैंगस्टर 3’ को बनने में पांच साल लगे, और इसे पहली दो फिल्मों की तुलना में भव्य बनाने की कोशिश में चौपट कर दिया गया है। फिल्म की कहानी बांध पाने में पूरी तरह असफल है। सबसे बड़ी बात फिल्म की कहानी आज के दौर की कहीं से भी नहीं लगती है। संजू की ये फिल्म बासी लगती है और बोर भी।

फिल्म का म्यूजिक भी कैची नहीं है, और आज के दौर की फिल्म न होने की वजह से ‘साहेब बीवी और गैंगस्टर 3’ मुश्किल में नजर आती है। वैसे भी फिल्म का बजट 30 से 35 करोड़ रुपये का बताया जाता है। लेकिन कमजोर फिल्म होने की वजह से इससे किसी बड़े चमत्कार की उम्मीद कम ही है।

मुंबई। साहेब बीवी और गैंगस्टर 3’ संजय दत्त की जेल से छूटने के बाद ये दूसरी मूवी है इसके पहले वे भूमि में नजर आये थे लेकिन दोनों फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कोई कमाल नहीं कर पाए। 'साहेब बीवी और गैंगस्टर 3 (Saheb Biwi Aur Gangster 3 )' भी उसी कड़ी की अगली फिल्म है। पुराने जमाने की कहानी, खराब ट्रीटमेंट और लचर डायरेक्शन। ऐसा लगता ही नहीं है कि ये फिल्म 'पान सिंह तोमर' जैसी सधी हुई फिल्म बनाने…