फवाद खान से सीखें सलमान खान, देशभक्ति का हुनर

नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच आतंकवाद को लेकर माहौल गरम है। जिसका असर दोनों देशों के बीच कारोबार और मनोरंजन जगत पर भी पड़ा है। सैन्य कार्रवाई के बीच सबसे बड़ी जुबानी जंग छिड़ी है पाकिस्तानी कलाकारों पर भारत में बैन लगाए जाने पर। मुंबई में सियासतदाओं ने जिस तरह 18 सितंबर को हुए उरी आर्मी बेस कैंप आतंकी हमले के दो दिन बाद पाकिस्तानी कलाकारों को भारत छोड़ने की धमकी दी, उससे देशभर की नजरें भारत से करोड़ों रूपए हर साल कमा कर पाकिस्तान ले जाने वाले कलाकारों की ओर गई। पाकिस्तानी मूल के ये कलाकार चुप्पी साधे आतंकवाद के घाव झेल रहे भारत में पूरी शान के साथ जमे बैठे थे। जब इस कलाकारों से भारतीय मीडिया ने प्रतिक्रिया मांगी तो सभी मीडिया से दूरी बनाकर खुद को मिली धमकी का हवाला देकर पाकिस्तान वापस लौट गए। पाकिस्तान की जमीन पर उतरते ही जिस तरह की प्रतिक्रिया उनकी जुबान से निकली वह भारत को ठगा महसूस करवाने वाली थी। क्योंकि जिन्हें भारत की फिल्म इंडस्ट्री अपनी सरआंखों पर बैठाए थी वे अपने मुल्क में वापस लौटते ही एक दुश्मन की तरह भारत के घावों पर नमक छिड़कर रहे थे।




हम बात कर रहे हैं पाकिस्तानी कलाकार फवाद खान के बयान की जिन्होंने करांची हवाई अड्डे पर उतरते ही पाकिस्तानी मीडिया को बयान देते हुए कहा नेशन फर्स्ट। यह बयान भारतीयों के दिल को ठेस पहुंचाने वाला था। भारतवासियों को उम्मीद थी कि जिन कलाकारों को हम शांतिदूत के रूप में देखते हैं, जिन्हें वे अपने देश में प्यार देते हैं, वे कम से कम दुख के समय में उनकी भावनाओं को समझेंगे। उरी आतंकी हमले की कम से कम निन्दा तो करेंगे। ऐसा हुआ नहीं।

अब बॉलीवुड सुपर स्टार सलमान खान इन धोखेबाजों के पक्ष खड़े हो गए हैं। उनका तर्क है कि ये पाकिस्तानी कलाकार वर्क वीजा और पासपोर्ट पर भारत आते हैं। उन्हें वीजा भारत सरकार देती है। ऐसे में उनको देश से निकाले जाने की बात करना गलत है। कलाकारों के साथ आतंकवादियों जैसा व्यवहार नहीं किया जा सकता। लेकिन सवाल उठता है कि जो हमारे बीच रहते हैं उन्हें जब हमारे जख्म नहीं दिखते हमारा दर्द महसूस नहीं होता, हमें संवेदना देने के बजाय वे जख्म देने वालों पर गर्व कर रहे हैं। सलमान खान को सोचना चाहिए कि जो जुबाने उनके दर्द पर संवेदना प्रकट करने के लिए दो शब्द नहीं कह सकी उन्हें केवल कलाकार नहीं कहा जा सकता। जो आतंकी घटनाओं की निन्दा तक नहीं कर सकते वे के​वल पाकिस्तानी ही हो सकते है कोई कलाकार नहीं।




ये खबर पाकिस्तान के लिए तो अच्छी है कि उसके कलाकार पैसे कमाने तो भारत जाते है लेकिन उनके दिल में आतंकवाद और पाकिस्तान ही बसता है। वे कलाकार आतंकवाद के संरक्षक अपनी देश पर गर्व करते हैं, भारत की जमीन को केवल अपनी रोजी रोटी का जरिया भर मानते हैं।

शायद सलमान खान जैसे भारतीय कलाकारों को पाकिस्तानी कलाकारों से देशभक्ति का हुनर सीखने की जरूरत है। कलाकारों और कला को लेकर जो बातें हमारे कलाकारों के जहन में हैं वे महज किताबी बातें हैं। देश से ऊपर कुछ नहीं होता न कला और न कलाकार। जो देश कलाकारों और कला को मंच देता है जब उस देश का सम्मान नहीं होगा तो कलाकार और कला के सम्मान की चर्चा करना बेईमानी होगी।