सपा कुनबे में फूट से कौन सा पलड़ा होगा भारी, कौन सा कमजोर

लखनऊ। यूपी की सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी दो फाड़ होने के कगार पर आ खड़ी हुई है। महीनों पहले शुरू हुए इस पारिवारिक जंग का अंत भले ही अभी न हुआ हो, लेकिन यह जरूर स्पष्ट हो गया है कि आने वाले समय में पार्टी का स्वरूप और नेता दोनों ही बदल जाएंगे। सपा कुनबे की वर्तमान स्थिति को देखकर इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि पार्टी दो टुकड़ों में बंट चुकी है। चुनावी लिस्ट ने विवाद इस कदर बढ़ा दिया कि सीएम अखिलेश यादव अपनी राह अलग करते हुए और अपने काम के दम पर सत्ता में एक बार फिर काबिज होने की कोशिश में लगे हैं।

समाजवादी पार्टी में अगर विधानसभा चुनाव के पहले फूट पड़ती है, तो पार्टी दो खेमों में बंट जायेगी। सपा की इस चुनावी लड़ाई में किसका पलड़ा भारी होंगा, यह सवाल उठना स्वाभाविक है। अगर पार्टी दो टुकड़ों में बंटी तो कौन से चेहरे किसके साथ आ सकते हैं, देखें रिपोर्ट—



अखिलेश का खेमा

राम गोपाल यादव –

चाचा राम गोपाल ने पिछले कुछ दिनों में मुलायम से ज्यादा तव्वजो अखिलेश को दी है, जिसका खामियाजा वो पिछले दिनों भुगत चुके हैं। घमासान के दौरान अखिलेश से बढ़ी नज़दीकियों के कारण ही भाई मुलायम के साथ उनके रिश्तों में खटास आई। इन तमाम बातों के बाद आज भी इस सियासी घमासान में रामगोपाल हमेशा की तरह अखिलेश के ही पक्ष में खड़े दिख रहे है।



आज़म खान

हमेशा अपने विवादित बयानों के कारण सुर्खियों में बने रहने वाले आज़म खान का पलड़ा इस बार अखिलेश की तरफ झुका देखा जा रहा है। राजनीतिक पंडितो की माने तो आज़म भारी पलड़े की तरफ ही रुख करेंगे, जो कि अभी के समय में अखिलेश का देखा जा रहा है।

धर्मेंद्र यादव

इस घमासान से पहले तक अखिलेश के चचेरे भाई धर्मेन्द्र दूर दराज तक उनके साथ कही नज़र नहीं आते थे क्योकि वे अपना डेरा मैनपुरी में ही बसाये हुए थे पर जब से इस विवाद ने फिर से तूल पकडे है तब से धर्मेन्द साये की तरह किसी भी कार्यक्रम में अखिलेश के साथ दिख रहे है। इससे एक बात तो स्पष्ट हो गयी है कि धर्मेन्द्र अपने चचेरे भाई अखिलेश के साथ जाना पसंद करेंगे।

अक्षय यादव

रामगोपाल के बेटे और फिरोजाबाद से सांसद अक्षय यादव ने मुलायम और शिवपाल को अपने पोस्टर से गायब कर अपनी मंसा जाहिर कर दी है कि वह पूर्ण रूप से अखिलेश के साथ है और अंत तक रहेंगे भी।

डिम्पल यादव

अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव साफ़ तौर पर अपने पति के साथ है हालाकि अभी तक उन्होंने इस सियासी घमासान पर अपनी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है पर पति का दामन छोड़ कही और जाये ऐसा बिलकुल मुमकिन नहीं है।





मुलायम का खेमा

शिवपाल यादव

अगर अलग खेमा बना तो शिवपाल इसकी मुख्य वजह होंगे क्योकि असली लड़ाई तो चाचा-भतीजे के बीच ही है और इस पूरी लड़ाई में उन्हें अपने बड़े भाई मुलायम का साथ मिला है जिसकी वजह से शिवपाल ने अपने चचेरे भाई रामगोपाल यादव को पार्टी से बाहर का रास्‍ता दिखा दिया था और अखिलेश के चहेतों को इस बार टिकट लिस्ट से गायब भी कर दिया है।

आदित्य यादव

शिवपाल के पुत्र आदित्‍य अपने पिता के ही साथ हैं और इस समय यूपीपीसीएफ के चेयरमैन भी हैं। इससे पहले मुलायम की मुखालफत करने वाले अखिलेश के समर्थक युवा नेताओं के खिलाफ बयान देकर अपने तेवर दिखा चुके हैं।

अमर सिंह

सपा में विवाद की खास वजह इस नेता को भी माना जा सकता है मुलायम भी उन्‍हें अपना भाई बताते हुए पार्टी से बाहर करने से इनकार कर चुके हैं। स्‍वाभाविक रूप से इस लड़ाई में ये मुलायम-शिवपाल की जोड़ी के साथ ही खड़े रहेंगे।

अपर्णा यादव

मुलायम की पुत्रवधु और प्रतीक की पत्‍नी को लेकर अभी तक अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई थी पर जबसे उनका नाम अखिलेश के टिकट लिस्ट से गायब हुआ है तो यह बात साफ़ हो गयी है कि यह अपने ससुर मुलायम के साथ खड़ी है।

बेनी प्रसाद वर्मा

बेनी प्रसाद वर्मा ने मीडिया के सामने खुल कर अपनी राय स्पष्ट कर दी है कि वो हमेशा से ही मुलायम के साथ रहे है और अंत तक भी रहेंगे