यूपी विधानसभा चुनाव : सपा-कांग्रेस के बीच गठबंधन पक्का, जल्द हो सकती है घोषणा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के 2017 विधानसभा चुनावों को देखते हुए शुरू हुई राजनीति में एक बड़ा दलगत गठबंधन जल्द समाने आता दिख रहा है। ऐसी खबरें आ रहीं हैं कि यूपी की सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की बात तय हो गई है। सपा यूपी विधानसभा की 403 सीटों में से 110 सीटें कांग्रेस को देने को राजी हो गई है। सपा का ये आॅफर कांग्रेस ने स्वीकार भी कर लिया है।




सूत्रों की माने तो सपा और कांग्रेस के गठबंधन की घोषणा 25 दिसंबर को हो सकती है। इस गठबंधन को संभव बनाने में यूपी सरकार के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की भूमिका अहम मानी जा रही है। ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है क्योंकि पिछले एक सप्ताह से अखिलेश यादव कई बार सार्वजनिक मंचों से कांग्रेस के साथ गठबंधन को अगली सरकार बनाने के लिए बेहतर बता चुके हैं।




जानकारों की माने तो कांग्रेस और सपा के बीच गठबंधन की संभावनाएं कई बार बनीं और बिगड़ी। पिछले छह—आठ महीनों से कांग्रेस के कई बड़े नेता सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव से मुलाकात कर चुके हैं। गुलाम नवी आजाद और मुलायम सिंह यादव की मुलाकात के बाद ऐसा माना जाने लगा था कि दोनों दल किसी भी समय गठबंधन की घोषणा कर सकते हैं। जिसके बाद सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों दलों के बीच कोई निष्कर्ष नहीं निकला।




इस गठबंधन की संभावनाओं को दूसरी बार हवा उस समय मिली जब सपा सुप्रीमो के परिवार में महाभारत छिड़ा हुआ था और कांग्रेस के लिए यूपी में चुनाव की रणनीति तैयार कर रहे प्रशांत किशोर ने सीएम अखिलेश यादव से मुलाकात की। इस दौरान ये भी खबरें आईं थी कि अगर परिवार में शुरू हुई वार्चस्व की जंग और तेज होती है तो सीएम अखिलेश यादव अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस में शामिल होकर अगला चुनाव लड़ सकते हैं। इन खबरों को सीएम अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव ने ही पुष्टि की थी।




फिलहाल यह तीसरा मौका है जब सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन की खबरें सामने आ रहीं हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि दोनों पार्टियों के बीच सीटों के बटवारे समेंत तमाम शर्तें तय हो चुकीं हैं। अब केवल यह तय होना बाकी है कि 110 में से कौन सी सीटें हैं जो कांग्रेस को मिलेंगी। निश्चित ही यह गठबंधन राजनीतिक दृष्टिकोण सें दोनों पार्टियों के लिए फायदे का सौदा और विपक्षी दलों के लिए नई चुनावी चुनौती के रूप में नजर आ रहा हो, लेकिन इसके नकारात्मक परिणाम भी होंगे। जिनका सबसे ज्यादा असर सत्तारूढ़ सपा पर पड़ेगा।

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