सपा के रजत जयंती वर्ष समारोह पर रहेगी सबकी नजर

लखनऊ। यूपी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले एकबार फिर महागठबंधन की तैयारियां शुरू हो गईं हैं। इस बार महागठबंधन के तहत लोहियावादी, चरणसिंहवादी और गांधीवादी नेताओं को एक मंच पर लाने की पहल की है समाजवादी पार्टी प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव ने। शिवपाल यादव ने यह कदम उन परिस्थितियों में उठाया है जब उनकी पार्टी के भीतर ही उनके कद को चुनौती देने का काम उनका भतीजा और पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के उत्तराधिकारी अखिलेश यादव कर रहे हैं। शिवपाल यादव ने कहा है कि उन्होंने जदयू ने शरद यादव, केसी त्यागी रालोद नेता अजीत सिंह समेंत कई अन्य नेताओं से मिल कर उन्हें समाजवादी पार्टी के रजत जयंती वर्ष समारोह में आमंत्रित किया है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि बिहार विधानसभा से ठीक पहले जिस महागठबंधन का सपना अधूरा रह गया था, उसे वह यूपी विधानसभा से पहले संभव बना सकते हैं।




शिवपाल सिंह यादव ने महागठबंधन को खड़ा करने की पहल ऐसे समय की है जब उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेतृत्व की युवा पीढ़ी ने बतौर प्रदेश अध्यक्ष उनके नेतृत्व को नकार दिया है। शिवपाल यादव अपने ही भतीजे और यूपी के सीएम अखिलेश यादव से दो दो हाथ करने के बाद सरकार से बाहर होकर पार्टी को विधानसभा चुनावों के लिए दोबारा खड़ा करने की जद्दोजहद में जुट गए हैं।

उन्होंने हाल ही में बिहार चुनाव से पहले महागठबंधन को टूटने की चर्चा करते हुए अपने चचेरे भाई और अपनी ही पार्टी के बर्खास्त राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव पर आरोप लगाया था। उन्होंने सीबीआई के डर से महागठबंंधन को तोड़ने में अहम भूमिका निभाई थी। दरअसल रामगोपाल यादव के सांसद बेटे अक्षय यादव और पुत्रवधु का नाम यूपी के भ्रष्टाचारी इंजीनियर यादव सिंह के साथ जुड़ा था। इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। उस समय भी महागठबंधन के टूटने की वजह के रूप में रामगोपाल यादव और उनके परिवार के सदस्यों का नाम यादव सिंह मामले से जुड़ने के रूप में देखा गया था। कहा गया था कि सीबीआई की जद में आए सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के ​परिवार के सदस्यों को बचाने के लिए बीजेपी के ​इशारे पर पार्टी ने स्वयं को महागठबंधन से दूर कर लिया है।




आपको बता दें कि समाजवादी पार्टी लखनऊ में 5 नवंबर को अपनी स्थापना के 25 साल पूरे करने का जश्न मनाने जा रही है। देश भर के लोगों की नजर समाजवादी पार्टी के इस आयोजन पर रहेगी। इस आयोजन को राष्ट्रीय राजनीति के नजरिए से भी बड़ी संभावनाओं के अवसर के तौर पर देखा जाएगा, जबकि समाजवादी पार्टी के भीतर व्यप्त तनाव को लेकर भी मीडिया व विरोधी राजनीतिक दलों की नजरों का इस आयोजन पर टिके रहना लाजमी है। ऐसा माना जा रहा है कि आयोजन पर कांग्रेस का ​विशेष ध्यान रहेगा क्योंकि अंदरखाने यूपी के विधान सभा चुनावों को लेकर कांग्रेस और सपा के बीच गठबंधन को लेकर एक खाका तैयार किया जा चुका है। जिसे महागठबंधन बनने की दशा में बदलना पड़ सकता है। फिलहाल शिवपाल यादव ने कांग्रेस को अपने कार्यक्रम में बुलावा ​नहीं दिया है।