समलैंगिक विवाह को मान्यता देने वाला पहला एशियाई देश बना ताइवान

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समलैंगिक विवाह को मान्यता देने वाला पहला एशियाई देश बना ताइवान

नई दिल्ली। ताइवान में पहली बार समलैंगिक विवाह को वैध घोषित हो गया है और एशिया में ऐसा करनेवाला वह पहला देश बन गया है। ताइवान के सांसदों ने शुक्रवार को विधेयक को मंजूरी दे दी। समलैंगिक विवाह को मंजूरी देने वाला यह कानून 24 मई से प्रभावी होगा। दुनियाभर के लाखों समलैंगिकों में ताइवान की संसद के फैसले से खुशी की लहर है।

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2017 में देश की संवैधानिक अदालत ने ये फ़ैसला दिया था कि समलैंगिकों जोड़े को शादी करने की अनुमति नहीं देना संविधान का उल्लंघन होगा। संसद को दो साल का समय दिया गया था और 24 मई तक इस कानून को पारित करने का समय था।

संसद में मतदान के बीच भारी बारिश के बावजूद सैकड़ों समलैंगिक अधिकार समर्थक संसद के समीप एकत्रित हुए। इस मुद्दे को लेकर देश के लोगों की राय बंटी हुई है। समलैंगिक अधिकार समूहों ने शुक्रवार को मतदान की तारीफ करते हुए कहा कि विवाह पंजीकरण के लिए आवेदन देने का अधिकार मिलने से उनके समुदाय को अलग-अलग लिंग के दंपत्तियों के समान अधिकार मिल गया है।

दुनिया में सबसे पहले नीदरलैंड ने साल 2000 में समलैंगिक शादी को मंजूरी दी थी। तब से अब तक 28 देश इस संबंध में कानून पारित कर चुके हैं।

नई दिल्ली। ताइवान में पहली बार समलैंगिक विवाह को वैध घोषित हो गया है और एशिया में ऐसा करनेवाला वह पहला देश बन गया है। ताइवान के सांसदों ने शुक्रवार को विधेयक को मंजूरी दे दी। समलैंगिक विवाह को मंजूरी देने वाला यह कानून 24 मई से प्रभावी होगा। दुनियाभर के लाखों समलैंगिकों में ताइवान की संसद के फैसले से खुशी की लहर है। 2017 में देश की संवैधानिक अदालत ने ये फ़ैसला दिया था कि समलैंगिकों जोड़े को शादी करने की अनुमति नहीं देना संविधान का उल्लंघन होगा। संसद को दो साल का समय दिया गया था और 24 मई तक इस कानून को पारित करने का समय था। संसद में मतदान के बीच भारी बारिश के बावजूद सैकड़ों समलैंगिक अधिकार समर्थक संसद के समीप एकत्रित हुए। इस मुद्दे को लेकर देश के लोगों की राय बंटी हुई है। समलैंगिक अधिकार समूहों ने शुक्रवार को मतदान की तारीफ करते हुए कहा कि विवाह पंजीकरण के लिए आवेदन देने का अधिकार मिलने से उनके समुदाय को अलग-अलग लिंग के दंपत्तियों के समान अधिकार मिल गया है। दुनिया में सबसे पहले नीदरलैंड ने साल 2000 में समलैंगिक शादी को मंजूरी दी थी। तब से अब तक 28 देश इस संबंध में कानून पारित कर चुके हैं।