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अवैध खनन मामला: अखिलेश-गायत्री से जल्द पूछताछ करेगी CBI, जारी हुई लिस्ट

Sand Mining Case Akhilesh Yadav And Gayatri Prajapati

By टीम पर्दाफाश 
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लखनऊ। यूपी में अवैध खनन मामले को लेकर सीबीआई की छापेमारी के बाद एक के बाद एक खुलासे होने शुरू हो गए हैं। सीबीआई ने दावा किया है कि 17 फरवरी 2013 को जो 13 लीज जिलाधिकारी चन्द्रकला ने प्रदान की थी उसकी मंजूरी चीफ मिनिस्टर के दफ़्तर से आई थी जो कि 2012 की राज्य सरकार की ई-टेंडर पॉलिसी का उल्लंघन है। जिस पॉलिसी को हाईकोर्ट ने 29 जनवरी 2013 को मान्य भी किया था। उस वक्त में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के दफ़्तर से कुल 14 लीज को मान्यता दिया गया था जिसमें की 13 एक साथ और एक बाद में जून के महीने में मंजूरी दी गयी थी। इस मामले में गायत्री प्रजापति के समय में कुल 8 लीज को मान्यता प्रदान किया था। उपरोक्त्त सभी लीज लाख रुपये ज्यादा की थी।

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अखिलेश यादव ने सीएम रहते हुए माइनिंग की 14 लीज़ अवैध तरीके से अपने खास लोगों को दीं, इसमें एक लीज़ उस समय के जालौन से समाजवादी पार्टी के सांसद घनश्याम अनुरागी(16 नम्बर) को दी गयी। सीबीआई का कहना है कि यूपी सरकार ने अपने और इलाहाबाद हाइकोर्ट के आदेश के हिसाब से ई-टेंडरिंग की प्रक्रिया का पालन नहीं किया। उसके बाद दूसरे माइनिंग मिनिस्टर गायत्री प्रजापति ने भी 8 लीज़ ऐसे ही दीं, ये मामला केवल हमीरपुर का है, जहां बी चन्द्रकला उस समय डीएम थीं।

सीबीआई की जांच का मेंन फोकस माइनिंग की लीज को देने के गैरकानूनी तरीके की जांच करने का है। 29/01/2013 इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश था, कोई भी माइनिंग लीज ई-टेंडरिंग के जरिये ही दी जाएंगी। 17/02/2013 को एक साथ 13 लीज हमीरपुर में लीज एक साथ दे दी गई(उस वक़्त आखिलेश यादव माइनिंग मिनिस्टर थे) आखिलेश के समय मे कुल 14 लीज दी गई।

29/01/2013 में इलाहाबाद हाइकोर्ट ने आदेश किया कि आगे से जो भी माइनिंग की लीज के लिए आवेदन करेगा वो नए तरीके से ई टेंडरिंग के जरिये होगी, हाइकोर्ट के आदेश में साफ है कि जिन्होंने पहले से आवेदन किया है या जिनकों लीज मिल भी चुकी है उनको रद्द करके नए सिरे से ई-टेंडरिंग के माध्यम से दोबारा आवेदन करना पड़ेगा, लेकिन अखिलेश सरकार ने सभी 22 आवेदन बिना ई-टेंडरिंग के उन ही लोगों को दे दिए।

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