19 साल बाद भारत लाया गया सटोरिया संजीव चावला, कई बड़े चेहरे होंगे बेनकाब

sajeev chawla
19 साल बाद भारत लाया गया सटोरिया संजीव चावला, कई बड़े चेहरे होंगे बेनकाब

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिक संजीव चावला को आखिरकार 19 साल बाद लंदन से भारत लाने में सफल रही। संजीव चावला को कई कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद प्रत्यर्पण कर भारत लाया जा सका है। भारत और ब्रिटेन के बीच साल 1992 में प्रत्यर्पण संधि होने के बाद से यह किसी हाई प्रोफाइल मामले का पहला सफल प्रत्यर्पण है। साल 2000 के मैच फिक्सिंग कांड में तब साउथ अफ्रीकी टीम के कप्तान हैंसी क्रोन्ये (Hansie Cronje) की संलिप्तता ने दुनियाभर के क्रिकेटरों और इस खेल के प्रशंसकों को हैरान कर दिया था।  

Sanjeev Chawla Accused Of Match Fixing Has Been Put In India Many Big Faces Will Be Exposed :

डी-कंपनी के धन को सुरक्षित ठिकाने लगाया

सूत्रों ने कहा कि चावला ने मुंबई के उद्योगपतियों और डी-कंपनी के संचालकों के संरक्षण में 90 के दशक के अंतिम पड़ाव के सबसे बड़े सट्टेबाजी गिरोहों में से एक गिरोह का संचालन किया था. जहां चावला ने दक्षिण अफ्रीका, भारत, पाकिस्तान और अन्य देशों के शीर्ष क्रिकेटरों के माध्यम से मैच फिक्स किए, वहीं डी-कंपनी ने उस धन को अंतर्राष्ट्रीय हवाला के माध्यम से सुरक्षित ठिकाने पर लगाना सुनिश्चित किया।

कई बड़े चेहरे बेनकाब होंगे

साल 2000 में खेल जगत को हिला कर रख देने वाले मैच फिक्सिंग कांड के समय दिल्ली पुलिस के आयुक्त रहे अजय राज शर्मा ने कहा, “चावला को 19 साल बाद भारत लाया जा रहा है तो दिल्ली में उससे पूछताछ में क्रिकेट जगत के कई बड़े चेहरे बेनकाब होंगे।”

अजहरुद्दीन पर लगा था बैन

तब शर्मा की निगरानी में ही जांच हुई थी, जिसके बाद दक्षिण अफ्रीकी टीम के कप्तान हैंसी क्रोनिए और उनके बाद भारतीय कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन को ‘जेंटलमेंस गेम’ से आजीवन प्रतिबंधित कर दिया गया।

स्पॉट फिक्सिंग कांड का खुलासा

कुमार ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में भी स्पॉट फिक्सिंग कांड का खुलासा किया, जिसमें भी कई शीर्ष क्रिकेटर फंस गए। स्पॉट फिक्सिंग कांड डी-कंपनी के सरगना दाऊद इब्राहिम और उसके सहयोग छोटा शकील के संरक्षण में हुआ।

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिक संजीव चावला को आखिरकार 19 साल बाद लंदन से भारत लाने में सफल रही। संजीव चावला को कई कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद प्रत्यर्पण कर भारत लाया जा सका है। भारत और ब्रिटेन के बीच साल 1992 में प्रत्यर्पण संधि होने के बाद से यह किसी हाई प्रोफाइल मामले का पहला सफल प्रत्यर्पण है। साल 2000 के मैच फिक्सिंग कांड में तब साउथ अफ्रीकी टीम के कप्तान हैंसी क्रोन्ये (Hansie Cronje) की संलिप्तता ने दुनियाभर के क्रिकेटरों और इस खेल के प्रशंसकों को हैरान कर दिया था।   डी-कंपनी के धन को सुरक्षित ठिकाने लगाया सूत्रों ने कहा कि चावला ने मुंबई के उद्योगपतियों और डी-कंपनी के संचालकों के संरक्षण में 90 के दशक के अंतिम पड़ाव के सबसे बड़े सट्टेबाजी गिरोहों में से एक गिरोह का संचालन किया था. जहां चावला ने दक्षिण अफ्रीका, भारत, पाकिस्तान और अन्य देशों के शीर्ष क्रिकेटरों के माध्यम से मैच फिक्स किए, वहीं डी-कंपनी ने उस धन को अंतर्राष्ट्रीय हवाला के माध्यम से सुरक्षित ठिकाने पर लगाना सुनिश्चित किया। कई बड़े चेहरे बेनकाब होंगे साल 2000 में खेल जगत को हिला कर रख देने वाले मैच फिक्सिंग कांड के समय दिल्ली पुलिस के आयुक्त रहे अजय राज शर्मा ने कहा, "चावला को 19 साल बाद भारत लाया जा रहा है तो दिल्ली में उससे पूछताछ में क्रिकेट जगत के कई बड़े चेहरे बेनकाब होंगे।" अजहरुद्दीन पर लगा था बैन तब शर्मा की निगरानी में ही जांच हुई थी, जिसके बाद दक्षिण अफ्रीकी टीम के कप्तान हैंसी क्रोनिए और उनके बाद भारतीय कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन को 'जेंटलमेंस गेम' से आजीवन प्रतिबंधित कर दिया गया। स्पॉट फिक्सिंग कांड का खुलासा कुमार ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में भी स्पॉट फिक्सिंग कांड का खुलासा किया, जिसमें भी कई शीर्ष क्रिकेटर फंस गए। स्पॉट फिक्सिंग कांड डी-कंपनी के सरगना दाऊद इब्राहिम और उसके सहयोग छोटा शकील के संरक्षण में हुआ।