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संत रविदास ने अस्पृश्यता को दूर करने का काम किया : डा. रामेश्वर दास

महापुरुष स्मृति समिति द्वारा नाका स्थित जगत कुटी आश्रम पर गुरुवार को  "संत रविदास एवं सामाजिक समरसता" विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में महामण्डलेश्वर स्वामी डा.रामेश्वर दास जी महाराज उपस्थित रहे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्वामी मुरारी दास थे। संत रविदास के चित्र पर पुष्पांजलि व माल्यार्पण के बाद कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया।

By संतोष सिंह 
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लखनऊ। महापुरुष स्मृति समिति द्वारा नाका स्थित जगत कुटी आश्रम पर गुरुवार को  “संत रविदास एवं सामाजिक समरसता” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में महामण्डलेश्वर स्वामी डा.रामेश्वर दास जी महाराज उपस्थित रहे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्वामी मुरारी दास थे। संत रविदास के चित्र पर पुष्पांजलि व माल्यार्पण के बाद कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया।

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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महामण्डलेश्वर डा.स्वामी रामेश्वर दास जी महाराज ने कहा कि संत रविदास ने अस्पृश्यता जैसी कुरीति को समाज से दूर करने का काम किया। संत रविदास ने कहा था जाति—पांत पूछे नहीं ​कोई हरि को भजै सो हरि का होई। उन्होंने कहा कि संत व महापुरूषों की तुलना ​नहीं की जाती। संतों की कोई जाति नहीं होती और संतों को जाति के आधार पर नहीं देखना चाहिए।

महामंडलेश्वर रामेश्वर दास जी महाराज ने कहा कि राजनीति ही सब कुछ नहीं होती। संतों की ज्ञान व तपस्या से राजतंत्र डरता है। बड़ी—बड़ी राजनैतिक सत्ताओं को खत्म होने में समय नहीं लगता। संतों ने सामाजिक क्रान्ति लाई और सबको समानता का संदेश देकर समाज को जोड़ने का काम किया। उन्होंने कहा कि वामपंथी साहित्यकारों ने समाज में भ्रम फैलाने का काम किया। संत रविदास के शिष्य सभी जातियों में थे।

स्वामी रामेश्वर दास ने कहा संत रविदास का जन्म ऐसे समय में हुआ था जब भारत में मुगलों का शासन था। दिल्ली में उस समय सिकन्दर लोधी का शासन था। हिन्दुओं को धर्मान्तरण के लिए विवश किया जा रहा था। संत रविदास ने समाज को भक्ति का संदेश दिया।

राजनैतिक वातावरण समाज को तोड़ने का काम कर रहा : स्वामी मुरारी दास

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स्वामी मुरारी दास ने कहा कि वर्तमान में राजनैतिक वातावरण समाज को तोड़ने का काम कर रहा है। संत रविदास सर्व समाज के थे। यह कहना ठीक नहीं कि संत रविदास केवल एक जाति विशेष के संत थे। मुरारी दास ने बताया कि संत रविदास के समय मेवाड़ राजघराने की देश में बड़ी प्रतिष्ठा थी। उस समय मेवाड़ की महारानी झालीबाई और उनकी पुत्रवधू मीराबाई उनकी शिष्या थीं। मेवाड़ के किले में संत रविदास की समाधि बनी हुई है। उनका अंतिम समय वहीं बीता।

महापुरूष स्मृति समिति के अध्यक्ष भारत सिंह ने कहा कि संत रविदास के जीवन से हम सभी लोग प्रेरणा लें और उनके बताये मार्ग पर हम लोग चलने का प्रयास करें। उन्होंने सारा जीवन मानवता के कल्याण में लगाया। महापुरूष स्मृति समित ऐसे महापुरूषों को उभारकर लाने का काम करती है जिन्होंने समाज के उत्थान के लिए काम किया। उनका मानना था कि जाति पांत का भेद मानवता के विकास में बाधक है।

विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार पदमाकर पाण्डेय ‘पदम्’ ने कहा कि आज हम लोग संत रविदास जी को इसलिए याद कर रहे हैं कि उन्होंने मानवता के कल्याण के लिए काम किया।
सामाजिक समरसता विभाग प्रान्त प्रचार प्रमुख बृजनन्दन राजू ने कहा कि संत रविदास ने सामाजिक समरसता के साथ—साथ समाज को स्वावलंबन का भी संदेश दिया था। वह स्वयं नित्य जूता बनाते थे। उन्होंने समाज को संदेश दिया कि परिश्रम करो, समाज की सेवा करो और भगवान का नित्य स्मरण करो। संत रविदास धर्मान्तरण के घोर विरोधी थे। हिन्दू धर्म छोड़कर जा चुके लोगों का वापस हिन्दू धर्म में वापसी भी कराई थी।

इस अवसर पर आशीष मौर्य, हेमंत कृष्ण, अनूप मिश्रा, संतोष कुमार सिंह, उमेश जायसवाल, भास्कर सिंह, एडवोकेट अनुरक्त सिंह, सनी विक्रम सिंह, संदीप, अरुणा सिन्हा, वैग्मीज कम्पनी के शैलेश कुमार श्रीवास्तव, बृजेश श्रीवास्तव ने अपने विचार रखे।

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