LAC के ठीक पीछे पूर्वी लद्दाख में PLAGF का जमवाड़ा, सैटेलाइट तस्वीरों से दिखा

Galwan-Valley-PTI

नई दिल्ली: देपसांग मैदान चीन के छल-कपट का ताजा गवाह है. ये साइट भारत और चीन की अल्प-परिभाषित सीमा पर स्थित है. हालिया सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि चीन ने LAC के ठीक पीछे पूर्वी लद्दाख में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ग्राउंड फोर्स (PLAGF) का भारी जमावड़ा कर रखा है.

Satellite Photos Of Plagf In Eastern Ladakh Just Behind Lac Shown From Satellite Photos :

15 जून की रात के खूनी संघर्ष के बाद, जैसा कि चीन ने पीछे हटने का वादा किया था, वैसे PLA नहीं कर रही है. हालांकि चीन से जो भी तमाम बयान आ रहे हैं वो उलटा ही बयान कर रहे हैं. मैक्सार टेक्नोलॉजिस की ओर से ली गई 22 जून की सैटेलाइट तस्वीरों से साफ संकेत मिलता है कि असल में चीनी सेना गलवान मुहाने पर अपने दावे को और आगे बढ़ाने के लिए आई.

भारत के दौलत बेग ओल्डी (DBO) सेक्टर के सामने देपसांग मैदानों में बुधवार को एक अहम घटनाक्रम देखा गया. चीनी सैनिक आगे आकर इस क्षेत्र में अपनी मौजूदा पोजीशन्स के आसपास तैनात हो गए. इंडियाटुडे ने ओपन सोर्स सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए इस क्षेत्र में स्थित दो चीनी पोस्ट (चौकियों) पर उनकी अहमियत और ले-आउट को समझने के लिए बारीकी से नजर डाली.

तियानवेंदियन पोस्ट
तियानवेंदियन पोस्ट इस क्षेत्र की सबसे पुरानी पोस्ट है. 1962 के चीन-भारत युद्ध के बाद एक खगोलीय वेधशाला की आड़ में इसे स्थापित किया गया. 1980 के दशक में, भारत ने महसूस किया कि वेधशाला और कुछ नहीं इस क्षेत्र में PLA सैनिकों को तैनात करने का सिर्फ बहाना थी. इस पोस्ट का 1998 और 2006 में और विस्तार किया गया. बाद में जैसे जैसे समय बीतता गया, इसे और मजबूत किया जाता रहा.

तियानवेंदियन पोस्ट में एक मुख्य दोमंजिला इमारत (60 मीटर X 10 मीटर के क्षेत्र में) के अलावा कई सपोर्ट इमारतें हैं- जैसे कि वाहनों के लिए शेड और कुकहाउस. बेस में सैनिकों के लिए संभवतः तीन बड़ी इमारतें हैं. इसकी एक बाउंड्री वॉल है जिसके पूर्वी हिस्से में मेन गेट है.

पहले ये पोस्ट एक कंपनी के लिए ही बनाई गई थी. अब यहां संभवत: PLA की एक बटालियन को बास्केटबॉल कोर्ट्स समेत अन्य प्रशासनिक सुविधाओं के साथ रखा गया हो सकता है. पोस्ट में एक मजबूत ढांचा है जिसका इस्तेमाल वाहन पार्किंग या हेलीकाप्टर लैंडिंग के लिए किया जा सकता है. इस बंजर भूमि में सैनिकों की पानी की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पाइप लाइन के साथ एक छोटा पंप हाउस भी है.

पोस्ट के आसपास सुरक्षा

पोस्ट की पश्चिमी दिशा में कम्युनिकेशन गड्ढों के साथ सुरक्षा खाई मौजूद है. ग्राउंड तस्वीरें इंगित करती हैं कि ये कम्युनिकेशन गड्ढे सीमेंटेड हैं और पिलबॉक्स के साथ इनकी छत मजबूत सुरक्षा कवच वाली है.

5,170 मीटर की ऊंचाई पर सबसे ऊंचे पाइंट पर एक चौकोर ऑब्जर्वेशन पोस्ट है. इस पोस्ट के ऊपर एक इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल इंस्ट्रूमेंट है जो सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों में भी दिखता है. पोस्ट और डिफेन्स, दोनों के चारों ओर कंटीले तारों की दोहरी बाढ़ मौजूद है.

नए लंबी रेज वाले रडार
2013 के आसपास की सैटेलाइट तस्वीरों में यहां 11 मीटर का रेडोम (रडार का सुरक्षा कवर) देखा गया था. ये पोस्ट से 2,750 मीटर की दूरी पर उत्तर-पश्चिम में स्थित था. रेडोम का आकार इंगित करता है कि रडार लगभग 10 मीटर चौड़ा होगा और इसमें लगभग 200-500 किलोमीटर की रेंज हो सकती है.

नई दिल्ली: देपसांग मैदान चीन के छल-कपट का ताजा गवाह है. ये साइट भारत और चीन की अल्प-परिभाषित सीमा पर स्थित है. हालिया सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि चीन ने LAC के ठीक पीछे पूर्वी लद्दाख में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ग्राउंड फोर्स (PLAGF) का भारी जमावड़ा कर रखा है. 15 जून की रात के खूनी संघर्ष के बाद, जैसा कि चीन ने पीछे हटने का वादा किया था, वैसे PLA नहीं कर रही है. हालांकि चीन से जो भी तमाम बयान आ रहे हैं वो उलटा ही बयान कर रहे हैं. मैक्सार टेक्नोलॉजिस की ओर से ली गई 22 जून की सैटेलाइट तस्वीरों से साफ संकेत मिलता है कि असल में चीनी सेना गलवान मुहाने पर अपने दावे को और आगे बढ़ाने के लिए आई. भारत के दौलत बेग ओल्डी (DBO) सेक्टर के सामने देपसांग मैदानों में बुधवार को एक अहम घटनाक्रम देखा गया. चीनी सैनिक आगे आकर इस क्षेत्र में अपनी मौजूदा पोजीशन्स के आसपास तैनात हो गए. इंडियाटुडे ने ओपन सोर्स सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए इस क्षेत्र में स्थित दो चीनी पोस्ट (चौकियों) पर उनकी अहमियत और ले-आउट को समझने के लिए बारीकी से नजर डाली. तियानवेंदियन पोस्ट तियानवेंदियन पोस्ट इस क्षेत्र की सबसे पुरानी पोस्ट है. 1962 के चीन-भारत युद्ध के बाद एक खगोलीय वेधशाला की आड़ में इसे स्थापित किया गया. 1980 के दशक में, भारत ने महसूस किया कि वेधशाला और कुछ नहीं इस क्षेत्र में PLA सैनिकों को तैनात करने का सिर्फ बहाना थी. इस पोस्ट का 1998 और 2006 में और विस्तार किया गया. बाद में जैसे जैसे समय बीतता गया, इसे और मजबूत किया जाता रहा. तियानवेंदियन पोस्ट में एक मुख्य दोमंजिला इमारत (60 मीटर X 10 मीटर के क्षेत्र में) के अलावा कई सपोर्ट इमारतें हैं- जैसे कि वाहनों के लिए शेड और कुकहाउस. बेस में सैनिकों के लिए संभवतः तीन बड़ी इमारतें हैं. इसकी एक बाउंड्री वॉल है जिसके पूर्वी हिस्से में मेन गेट है. पहले ये पोस्ट एक कंपनी के लिए ही बनाई गई थी. अब यहां संभवत: PLA की एक बटालियन को बास्केटबॉल कोर्ट्स समेत अन्य प्रशासनिक सुविधाओं के साथ रखा गया हो सकता है. पोस्ट में एक मजबूत ढांचा है जिसका इस्तेमाल वाहन पार्किंग या हेलीकाप्टर लैंडिंग के लिए किया जा सकता है. इस बंजर भूमि में सैनिकों की पानी की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पाइप लाइन के साथ एक छोटा पंप हाउस भी है. पोस्ट के आसपास सुरक्षा पोस्ट की पश्चिमी दिशा में कम्युनिकेशन गड्ढों के साथ सुरक्षा खाई मौजूद है. ग्राउंड तस्वीरें इंगित करती हैं कि ये कम्युनिकेशन गड्ढे सीमेंटेड हैं और पिलबॉक्स के साथ इनकी छत मजबूत सुरक्षा कवच वाली है. 5,170 मीटर की ऊंचाई पर सबसे ऊंचे पाइंट पर एक चौकोर ऑब्जर्वेशन पोस्ट है. इस पोस्ट के ऊपर एक इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल इंस्ट्रूमेंट है जो सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों में भी दिखता है. पोस्ट और डिफेन्स, दोनों के चारों ओर कंटीले तारों की दोहरी बाढ़ मौजूद है. नए लंबी रेज वाले रडार 2013 के आसपास की सैटेलाइट तस्वीरों में यहां 11 मीटर का रेडोम (रडार का सुरक्षा कवर) देखा गया था. ये पोस्ट से 2,750 मीटर की दूरी पर उत्तर-पश्चिम में स्थित था. रेडोम का आकार इंगित करता है कि रडार लगभग 10 मीटर चौड़ा होगा और इसमें लगभग 200-500 किलोमीटर की रेंज हो सकती है.