प्रधानमंत्री मोदी अजेय, 2019 में उनकी जीत पक्की : नीतीश कुमार

पटना। बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर छठी बार शपथ लेने के बाद पहली बार मीडिया के सामने आए नीतीश कुमार ने करीब एक घंटे चली प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि महागठबंधन की सरकार को चलाने के लिए उन्होंने तमाम कोशिशें की। तमाम तरह की बयानबाजी को बर्दाश्त किया, गठबंधन धर्म का निर्वहन किया। इसके बावजूद जो परिस्थितियां खड़ी हुईं उनमें काम करने की स्थिति ही नहीं बची थी। मजबूरत उन्हें गठबंधन से अलग होने का फैसला लेना पड़ा। उन्होंने इसी प्रेस कांफ्रेंस में पत्रकार द्वारा विपक्ष को एकजुट होकर पीएम मोदी से मुकाबले को लेकर सवाल किया गया तो नीतीश कुमार ने जवाब देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मुकाबला करने की क्षमता अब किसी में नहीं है। वास्तविकता यह है कि मोदी अजेय हैं और 2019 में उनकी जीत पक्की है।

भाजपा के साथ गठबंधन में जाकर सरकार बनाने के सवाल पर नीतीश कुमार ने कहा कि भाजपा में जाने की कोई योजना नहीं थी। परिस्थितियां ऐसी बनी कि भाजपा के साथ जाने का फैसला लेना पड़ा। बीजेपी एक बड़ी राजनीतिक पार्टी है जिसके साथ बिहार के लिए जदयू ने पहले भी काम किया है। हम हमेशा सहयोगी की तरह काम करते रहे, लेकिन कभी ऐसी परिस्थितियां नहीं बनी जो महागठबंधन सरकार में बनीं। उन्होंने पूरे तरह से सोच समझकर भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाने का फैसला लिया है, जिस पर वह कायम रहेंगे।

नीतीश कुमार ने प्रेस कांफ्रेंस की शुरूआत करते हुए कहा कि महागठबंधन की सरकार को चलाने के लिए गठबंधन धर्म का निर्वहन करते हुए उन्होंने पूरी कोशिश की। मीडिया में बातें चलतीं रहीं उनको नजरंदाज किया। आरजेडी के नेताओं की ओर से जिस तरह के आपत्तिजनक बयान आए वह गठबंधन धर्म के मुताबिक नहीं थे। आरजेडी सुप्रीमों ने अपने सहयोगियों के ऐसे बयानों को पूरी तरह से नजरंदाज किया। हमने भी उसे भी झेला।

उन्होंने कहा कि हम यही सोचते रहे कि यह गठबंधन है इसलिए यह सब झेलना पड़ेगा। जिस तरह की बातें जदयू को लेकर हुईं उन्हें लेकर हमारी पार्टी के ही कुछ वरिष्ठ नेताओं ने आपत्ति भी की लेकिन माना गया कि गठबंधन में ऐसी परेशानियां आती रहतीं हैं। तमाम बातों को नजरंदाज करते हुए हम काम करते रहे। जितनी भी योजनाएं शुरू की, शराब बंदी का फैसला लिया। जिलेवार जाकर क्रियांवयन का जायजा लिया। मीडिया ने भी कई जिलों में शराब के अवैध कारोबार को उजागर किया उन पर कार्रवाई की। जनप्रतिनिधियों से फीडबैक लेकर हम काम करते रहे।

उन्होंने कहा कि हमने गठबंधन का नाम ही महागठबंधन रखा था इसलिए हम पेरशानियों को किनारे कर काम करने में लगे रहे। इस बीच भ्रष्टाचार के मामले सामने आने शुरू किए। मीडिया ने भी प्रमुखता दिखाते हुए इन मामलों को उठाया। ये आरोप इतने गंभीर थे कि इन्हें नजरंदाज नहीं किया जा सकता था। संपत्तियां अटैच की जा रहीं थीं। इसलिए इस मामले में समझौता नहीं किया जा सकता था।

उन्होंने कहा कि जिस समय यह मामला सामने आया मेरी तबियत खराब थी। डॉक्टरों की निगरानी में इलाज चल रहा था। जब वापस काम पर लौटा तो आरजेडी के लोगों से बातचीत कर इस मामले पर स्पष्टीकरण देने की बात कही। आखिर जनता के बीच भ्रष्टाचार के मामलों की चर्चा ज्यादा हो रही थी। इस बीच जदयू ने 11 जुलाई को कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाई जिसमें शामिल हुए नेताओं ने इस मामले पर पार्टी और सरकार की छवि को लेकर उठ रहे सवालों का जिक्र किया। जिसके बाद यह त​य किया गया कि इस मामले में समझौता करना सरकार और पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है।