सौर ऊर्जा से बनी बिजली से दौड़ेगी मेट्रो

नई दिल्ली: मेट्रो रेल कारपोरेशन ने ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में अदभुत पहल करते हुए तीसरे चरण में मेट्रो का संचालन सौर ऊर्जा से बनी बिजले से करने की तैयारी कर ली है। इस तैयारी के तहत डीएमआरसी ने सौर ऊर्जा खरीद के लिए मध्यप्रदेश सरकार सहित विभिन्न कंपनियों के साथ तीन एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं।




दिल्ली मेट्रो ने पर्यावरण संरक्षण तथा ऊर्जा संरक्षण को लेकर अपनी अलग पहचान बनाई है। इसी पहचान के तहत डीएमआरसी ने सोमवार को निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्र के साझा उपक्र म रेवा अल्ट्रा मेगा सोलर कंपनी, मध्य प्रदेश सरकार और निजी क्षेत्र की कंपनियों महिन्द्रा, सोलक्ष्नर्जी एवं एसीएमई सोलर के बीच तीन पक्षीय करार किया है। केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री एम वेंकैया नायडू, ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में भोपाल में हुए इस करार के तहत डीएमआरसी को अगले 25 साल तक सौर ऊर्जा से बनी विद्युत की आपूर्ति की जाएगी।

रेवा सोलर द्वारा मध्य प्रदेश में सालाना 750 मेगावाट सौर ऊर्जा की उत्पादन क्षमता वाला विश्व का सबसे बड़ा सोलर पार्क बनाया जा रहा है जहां से डीएमआरसी को तीसरे चरण के मेट्रो परिचालन के लिए बिजली की आपूर्ति की जाएगी। यह संयंत्र अगले साल जून में विद्युत उत्पादन शुरू कर देगा। इस संयंत्र से डीएमआरसी को तीसरे चरण के लिए जरूरी 345 मेगावाट बिजली आपूर्ति की जाएगी। निर्माणाधीन दौर से गुजर रहे तीसरे चरण में सात रूट पर मेट्रो कुल 160 किमी की दूरी तय करेगी।




इस चरण में नोएडा सिटी सेंटर से नोएडा सेक्टर 62, मजलिस पार्क से शिवविहार, बॉटेनिकल गार्डन से कालिंदी कुंज, बदरपुर से एस्कॉर्ट मुजेसर, मुंडका से बहादुरगढ़ और द्वारका से नजफगढ़ कॉरीडोर शामिल है। मेट्रो ने साल 2016 में सोलर रूफ टॉप प्रजेक्ट से सौर ऊर्जा उत्पादन शुरू किया था। रेलवे स्टेशनों की छत पर सोलर पैनल के जरिए मेट्रो द्वारा उत्पादित सौरऊर्जा की कीमत अपने न्यूनतम स्तर 2.97 रपए प्रति यूनिट की दर पर आ गई है। मेट्रो का इस साल के अंत तक इस तरह के 20 रूफ टॉप सोलर प्रोजेक्ट शुरू करने का लक्ष्य है।