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सावन 2021: सावन में मां दुर्गा की करें पूजा, इन मंत्रों से माता होती हैं प्रसन्न

सावन में भगवान शिव की अराधना करने का विशेष महत्व है। इस समय सावन का महीना चल रहा है। शास्त्रों में बताया गया है कि सावन में भगवान शिव की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।सावन में मां दुर्गा की भी पूजा की जाती है। मां दुर्गा शक्ति स्वरूपा हिन्दुओं की प्रमुख देवी हैं।

By अनूप कुमार 
Updated Date

सावन दुर्गाष्टमी 2021: सावन में भगवान शिव की अराधना करने का विशेष महत्व है। इस समय सावन का महीना चल रहा है। शास्त्रों में बताया गया है कि सावन में भगवान शिव की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस माह में भगवान और भक्त के बीच की दूरी कम हो जाती है। शिवजी बहुत भोले माने जाते हैं, उनका नाम मात्र लेने से वह प्रसन्न हो जाते हैं।

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सावन में मां दुर्गा की भी पूजा की जाती है। मां दुर्गा शक्ति स्वरूपा हिन्दुओं की प्रमुख देवी हैं। जिन्हें देवी, शक्ति और जग्दम्बा और आदि नामों से भी जाना जाता हैं । मां दुर्गा को आदि शक्ति, प्रधान प्रकृति, गुणवती योगमाया, बुद्धितत्व की जननी तथा विकार रहित बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि वे शान्ति, समृद्धि तथा धर्म पर आघात करने वाली राक्षसी शक्तियों का विनाश करतीं हैं। पुराणिक कथाओ के अनुसार महिषासुर एक असुर था।मां दुर्गा ने महिषासुर नामक असुर का वध किया।

मां दुर्गा के पवित्र शक्ति पीठ पूरे भारत के अलग-अलग स्‍थानों पर स्थापित हैं। देवी पुराण में 51 शक्तिपीठों का वर्णन है। देवी भागवत में 108 और देवी गीता में 72 शक्तिपीठों का वर्णन मिलता है। वहीं तन्त्र चूड़ामणि में 52 शक्तिपीठ बताए गए हैं। देवी पुराण के मुताबिक 51 शक्तिपीठ में से कुछ विदेश में भी स्थापित हैं। भारत में 42, पाकिस्तान में 1, बांग्लादेश में 4, श्रीलंका में 1, तिब्बत में 1 तथा नेपाल में 2 शक्तिपीठ हैं।

आइए, जानते हैं माता को प्रसन्न करने के मंत्र

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।

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ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

*या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

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