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Sawan Sakun Shastra: इन पांच सरोवरों में स्नान करने से मिलती है पाप से मुक्ति, हिन्दू धर्म में हैं ये बेहद ख़ास

आज भी आपको धरती पर देवी-देवताओं से संबंधित कोई न कोई साक्ष्‍य जरूर मिल जाएंगें. कलियुग में भी धरती पर ऐसे कई चमत्‍क‍ारिक स्‍थल हैं जो ईश्‍वर के चमत्‍कार को सिद्ध करते हैं. 

By आराधना शर्मा 
Updated Date

Sawan Sakun Shastra: आज भी आपको धरती पर देवी-देवताओं से संबंधित कोई न कोई साक्ष्‍य जरूर मिल जाएंगें. कलियुग में भी धरती पर ऐसे कई चमत्‍क‍ारिक स्‍थल हैं जो ईश्‍वर के चमत्‍कार को सिद्ध करते हैं.

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इसी कड़ी में आगे बढ़ते हुए आज हम आपको धरती के कुछ ऐसे सरावरों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका धार्मिक रूप से बहुत महत्‍व है। कहते हैं कि इन सरोवरों में स्‍नान करने से पाप से मुक्ति मिल जाती है.

तो चलिए जानते हैं इन खास सरावरों के बारे में जहाँ पाप से मुक्ति मिलती है.

पंपा सरोवर

धार्मिक और ऐतिहासिक रूप से प्रसिद्ध पंपा सरोवर मैसूर के पास अनेगुंदी गांव में स्थित है। इस गांव को प्राचीन काल में किश्‍किंधा कहा जाता था। इस गांव में पंपा सरोवर है। इसी सरोवर के पास एक शबरी गुफा भी है। कहते हैं कि इसी गुफा में भगवान राम ने शबरी के झूठे बेर खाए थे। पंपा सरोवर का संबंध रामायण काल से बताया जाता है।

नारायण सरोवर

भगवान विष्‍णु को समर्पित नारायण सरोवर गुजरात के कक्ष जिले के तहसील लखपत में स्थित है। किवदंती है कि इस सरोवर में स्‍वयं भगवान विष्‍णु ने स्‍नान किया था। पौराणिक ग्रंथों और शास्‍त्रों में भी इस सरोवर के महत्‍व का उल्‍लेख मिलता है।

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पुष्‍कर सरोवर

अजमेर से 14 किमी की दूरी पर पुष्‍कर में स्थित इस पवित्र सरोवर के पास ब्रह्मा जी ने अपने यज्ञ को संपन्‍न किया था। मान्‍यता है कि इस सरोवर में स्‍नान करने से मोक्ष की प्राप्‍ति होती है। कहते हैं कि भगवान राम ने भी अपने पिता राजा दशरथ की मृत्‍यु के पश्‍चात् इसी सरोवर में उनका श्राद्ध किया था।

बिंदु सरोवर

अहमदाबाद से 130 किमी की दूरी पर स्थित बिंदु सरोवर में स्‍नान करने से पाप से मुक्‍ति मिलती है। मान्‍यता है कि इस सरोवर के पास कर्दम ऋषि ने हज़ारों वर्ष तक तपस्‍या की थी। इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि इसी स्‍थान पर भगवान परशुराम ने अपनी माता का श्राद्ध भी किया था। इस कारण इस सरोवर का बहुत महत्‍व है।

कैलाश मानसरोवर

मान्‍यता है कि कैलाश मानसरोवर में माता पार्वती स्‍नान किया करती थीं। कहते हैं कि इस सरोवर का निर्माण ब्रह्मा जी ने किया था। इसके पास ही भगवान शिव का निवास स्‍थल कैलाश पर्वत भी है। इस कारण इस सरोवर का आध्‍यात्‍मिक महत्‍व कई गुना बढ़ जाता है।

 

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