रिपोर्ट: अर्थव्यवस्था में सुस्ती का असर, इस साल कम होंगी 16 लाख नौकरियां, उद्योगों में श्रमिकों की मांग घटी

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रिपोर्ट: अर्थव्यवस्था में सुस्ती का असर, इस साल कम होंगी 16 लाख नौकरियां, उद्योगों में श्रमिकों की मांग घटी

नई दिल्ली। बढ़ती बेरोजगारी को लेकर देशभर में हंगाम जारी है। इस बीच एक रिपोर्ट ने युवाओं के माथे पर चिंता की लकीर खींच दी है। दरसअल यह रिपोर्ट घटते रोजगार सृजन को लेकर आई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अर्थवयवस्था में सुस्ती के कारण रोजगार सृजन बुरी तरह से प्रभावित ​हुआ है। चालू वित्त वर्ष में नई नौकरियों के अवसर एक साल पहले की तुलना में 16 लाख कम सृजन होने का अनुमान है।

Sbi Report Impact Of Sluggishness In Economy 16 Lakh Jobs Will Be Reduced This Year :

यह रिपोर्ट आने के बाद रोजगार को लेकर बड़ा संकट दिखने लगा है। एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट इकोरैप से यह जानकारी मिली है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि चालू वित्त वर्ष 2019—20 में इससे पिछले वित्त वर्ष 2018-19 की तुलना में 16 लाख कम नौकरियों का सृजन होने का अनुमान है। पिछले वित्त वर्ष में कुल 89.7 लाख रोजगार के अवसर पैदा हुए थे। एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट इकोरैप के अनुसार असम, बिहार, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों में नौकरी मजदूरी के लिए बाहर गए व्यक्तियों की ओर से घर भेजे जाने वाले धन में कमी आयी है।

यह दर्शाता है कि ठेका श्रमिकों की संख्या कम हुई है। वहीं, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के आंकड़ों के अनुसार 2018-19 में 89.7 लाख नए रोजगार के अवसर उत्पन्न हुए थे। चालू वित्त वर्ष में इसमें 15.8 लाख की कमी आने का अनुमान है। ईपीएफओ के आंकड़े में मुख्य रूप से कम वेतन वाली नौकरियां शामिल होती हैं जिनमें वेतन की अधिकत सीमा 15,000 रुपये मासिक है। रिपोर्ट में की गई गणना के अनुसार अप्रैल-अक्तूबर के दौरान शुद्ध रूप से ईपीएफओ के साथ 43.1 लाख नए अंशधारक जुड़े। सालाना आधार पर यह आंकड़ा 73.9 लाख बैठेगा।

वहीं, एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट इकोरैप में बताया गया है कि उद्योग जगत में छाई सुस्ती के कारण नए श्रमिकों की मांग घटी है। कई कंपनियां दिवालिया प्रक्रिया का सामना कर रही हैं, जिनके समाधान में देरी की वजह से ठेके पर श्रमिकों की भर्ती में बड़ी गिरावट आई है।

नई दिल्ली। बढ़ती बेरोजगारी को लेकर देशभर में हंगाम जारी है। इस बीच एक रिपोर्ट ने युवाओं के माथे पर चिंता की लकीर खींच दी है। दरसअल यह रिपोर्ट घटते रोजगार सृजन को लेकर आई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अर्थवयवस्था में सुस्ती के कारण रोजगार सृजन बुरी तरह से प्रभावित ​हुआ है। चालू वित्त वर्ष में नई नौकरियों के अवसर एक साल पहले की तुलना में 16 लाख कम सृजन होने का अनुमान है। यह रिपोर्ट आने के बाद रोजगार को लेकर बड़ा संकट दिखने लगा है। एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट इकोरैप से यह जानकारी मिली है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि चालू वित्त वर्ष 2019—20 में इससे पिछले वित्त वर्ष 2018-19 की तुलना में 16 लाख कम नौकरियों का सृजन होने का अनुमान है। पिछले वित्त वर्ष में कुल 89.7 लाख रोजगार के अवसर पैदा हुए थे। एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट इकोरैप के अनुसार असम, बिहार, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों में नौकरी मजदूरी के लिए बाहर गए व्यक्तियों की ओर से घर भेजे जाने वाले धन में कमी आयी है। यह दर्शाता है कि ठेका श्रमिकों की संख्या कम हुई है। वहीं, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के आंकड़ों के अनुसार 2018-19 में 89.7 लाख नए रोजगार के अवसर उत्पन्न हुए थे। चालू वित्त वर्ष में इसमें 15.8 लाख की कमी आने का अनुमान है। ईपीएफओ के आंकड़े में मुख्य रूप से कम वेतन वाली नौकरियां शामिल होती हैं जिनमें वेतन की अधिकत सीमा 15,000 रुपये मासिक है। रिपोर्ट में की गई गणना के अनुसार अप्रैल-अक्तूबर के दौरान शुद्ध रूप से ईपीएफओ के साथ 43.1 लाख नए अंशधारक जुड़े। सालाना आधार पर यह आंकड़ा 73.9 लाख बैठेगा। वहीं, एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट इकोरैप में बताया गया है कि उद्योग जगत में छाई सुस्ती के कारण नए श्रमिकों की मांग घटी है। कई कंपनियां दिवालिया प्रक्रिया का सामना कर रही हैं, जिनके समाधान में देरी की वजह से ठेके पर श्रमिकों की भर्ती में बड़ी गिरावट आई है।