गोरक्षा समूहों पर बैन संबंधी याचिका पर कोर्ट ने यूपी समेत छह राज्यों को जारी किया नोटिस

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गोरक्षा समूहों पर प्रतिबंध की मांग करने वाली याचिका पर राजस्थान समेत छह राज्यों से शुक्रवार को जवाब मांगा। न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति एएम खानविलकर ने राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, झारखंड, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश को नोटिस जारी किए और उन्हें तीन सप्ताह में अपना जवाब दायर करने को कहा। पीठ ने मामले की आगे की सुनवाई के लिए तीन मई की तारीख तय की। याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील ने संक्षिप्त सुनवाई में राजस्थान के अलवर में हाल में हुई घटना का जिक्र किया जिसमें एक व्यक्ति की गोरक्षक समूह ने कथित रूप से हत्या कर दी थी।




वकील ने कहा कि इन राज्यों में जमीनी स्थिति चिंताजनक है क्योंकि गोरक्षा समूह वहां हिंसा कर रहे हैं। केंद्र की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने पीठ से कहा कि याचिका पर राज्यों को औपचारिक नोटिस नहीं दिए गए हैं जिसके बाद न्यायालय ने इन छह राज्यों से जवाब मांगा। न्यायालय ने पिछले साल 21 अक्टूबर को याचिका की समीक्षा पर सहमति जताई थी। याचिका में गोरक्षा समूहों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है जो कथित रूप से हिंसा कर रहे हैं और दलितों एवं अल्पसंख्यकों पर अत्याचार कर रहे हैं।





सामाजिक कार्यकर्ता तहसीन ए. पूनावाला ने अपनी याचिका में कहा कि इन ‘गोरक्षा’ समूहों द्वारा की जाने वाली कथित हिंसा इस हद तक बढ़ गई है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इन लोगों के बारे में कहा था कि वे समाज को नष्ट कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अलवर मामले का खुद संज्ञान लेते हुए राजस्थान के मुख्य सचिव से घटना की विस्तृत रिपोर्ट और अपराधियों के खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में जानकारी मांगी है। आयोग ने माना है कि इस तरह की यह पहली घटना नहीं है इससे पूूर्व भी इस तरह की घटना घटित हो चुकी है। आयोग ने केंद्रीय गृह सचिव को भी नोटिस जारी कर पूछा है कि केंद्र द्वारा देश में घट रही इस तरह की घटना पर क्या कार्रवाई की गई है और प्रस्तावित कार्रवाई के बारे में चार सप्ताह में जवाब पेश करने को कहा गया है।