SC ने टेलीकॉम कंपनियों के साथ सरकार को भी लगाई फटकार, कहा- बंद कर दें क्या सुप्रीम कोर्ट?

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SC ने टेलीकॉम कंपनियों के साथ सरकार को भी लगाई फटकार, कहा- बंद कर दें क्या सुप्रीम कोर्ट?

नई दिल्ली। समायोजित सकल राजस्व ‘एजीआर’ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम कंपनियों के साथ साथ केन्द्र सरकार को भुगतान में देरी पर फटकार लगाई है। सुनवाई के दौरान जस्टिस अरुण मिश्रा ने डाली गयी याचिकाओं पर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने साफ शब्दो में कहा कि ये याचिकाएं दाखिल नहीं करनी चाहिए थीं। ये सब बकवास है। जज ने कहा कि सरकारी डेस्क अफसर सुप्रीम कोर्ट से बढ़कर है क्या जिसने हमारे आदेश पर रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा आदेश के बावजूद अभी तक एक पाई भी जमा नहीं की गई है। वहीं कोर्ट ने कहा क्या हम सुप्रीम कोर्ट को बंद कर दें? क्या देश में कोई कानून बचा है? क्या ये मनी पॉवर नहीं है?

Sc Reprimands Telecom Companies Government Says Should The Supreme Court Stop :

ऑयल इंडिया की ओर से पेश हुए वकील मुकुल रोहतगी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। बेंच ने कहा कि आखिर ये हो क्यों रहा है? हम सख्त लहजे में कहना चाहते हैं, ये सब क्या बकवास है? हमें जो कहना था कह दिया गया है, आपने सिस्टम का क्या कर दिया है? पैसे वापस करने ही होंगे। कोर्ट ने कहा कि हम सरकार के डेस्क अफसर और टेलीकॉम कंपनियों पर अवमानना की कार्रवाई करेंगे।

जस्टिस मिश्रा ने कहा कि ये नोटिफिकेशन कैसे जारी किया कि अभी भुगतान ना करने पर कंपनियों के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम कंपनियों को अवमानना नोटिस जारी किया है, कोर्ट ने पूछा है कि क्यों ना उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने सभी कंपनियों के MD को कोर्ट में पेश होकर ये बताने को कहा कि अब तक रुपये क्यों नहीं जमा कराए गए? सुप्रीम कोर्ट ने 17 मार्च को भारती एयरटेल, वोडाफोन- आइडिया, रिलायंस कंम्युनिकेशन, टाटा टेलीसर्विसेज और अन्य कंपनियों के एमडी और डेस्क अफसर को तलब किया है।

आपको बता दें कि याचिका में कंपनियों ने सुप्रीम कोर्ट से अपने उस आदेश में संशोधन करने की गुहार लगाई है जिसमें उन्हें केंद्र को 23 जनवरी तक पूरी राशि चुकाने के निर्देश दिए गए थे। अपनी याचिका में कंपनियों ने अदालत से अनुरोध किया है कि वो अपने पुराने आदेश में संशोधन करे और टेलीकॉम कंपनियों को ये राहत दे कि वो केंद्र सरकार के सम़क्ष भुगतान के लिए शेड्यूल तैयार कर सके। लेकिन कोर्ट ने इन सारी याचिकाओं को खरिज कर दिया था। अब दूरसंचार आय को भी AGR में शामिल किया गया है। इस फैसले से टेलीकॉम कंपनियों को केंद्र को करीब 1.33 लाख करोड रुपये चुकाने हैं।

नई दिल्ली। समायोजित सकल राजस्व 'एजीआर' मामले में सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम कंपनियों के साथ साथ केन्द्र सरकार को भुगतान में देरी पर फटकार लगाई है। सुनवाई के दौरान जस्टिस अरुण मिश्रा ने डाली गयी याचिकाओं पर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने साफ शब्दो में कहा कि ये याचिकाएं दाखिल नहीं करनी चाहिए थीं। ये सब बकवास है। जज ने कहा कि सरकारी डेस्क अफसर सुप्रीम कोर्ट से बढ़कर है क्या जिसने हमारे आदेश पर रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा आदेश के बावजूद अभी तक एक पाई भी जमा नहीं की गई है। वहीं कोर्ट ने कहा क्या हम सुप्रीम कोर्ट को बंद कर दें? क्या देश में कोई कानून बचा है? क्या ये मनी पॉवर नहीं है? ऑयल इंडिया की ओर से पेश हुए वकील मुकुल रोहतगी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। बेंच ने कहा कि आखिर ये हो क्यों रहा है? हम सख्त लहजे में कहना चाहते हैं, ये सब क्या बकवास है? हमें जो कहना था कह दिया गया है, आपने सिस्टम का क्या कर दिया है? पैसे वापस करने ही होंगे। कोर्ट ने कहा कि हम सरकार के डेस्क अफसर और टेलीकॉम कंपनियों पर अवमानना की कार्रवाई करेंगे। जस्टिस मिश्रा ने कहा कि ये नोटिफिकेशन कैसे जारी किया कि अभी भुगतान ना करने पर कंपनियों के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम कंपनियों को अवमानना नोटिस जारी किया है, कोर्ट ने पूछा है कि क्यों ना उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने सभी कंपनियों के MD को कोर्ट में पेश होकर ये बताने को कहा कि अब तक रुपये क्यों नहीं जमा कराए गए? सुप्रीम कोर्ट ने 17 मार्च को भारती एयरटेल, वोडाफोन- आइडिया, रिलायंस कंम्युनिकेशन, टाटा टेलीसर्विसेज और अन्य कंपनियों के एमडी और डेस्क अफसर को तलब किया है। आपको बता दें कि याचिका में कंपनियों ने सुप्रीम कोर्ट से अपने उस आदेश में संशोधन करने की गुहार लगाई है जिसमें उन्हें केंद्र को 23 जनवरी तक पूरी राशि चुकाने के निर्देश दिए गए थे। अपनी याचिका में कंपनियों ने अदालत से अनुरोध किया है कि वो अपने पुराने आदेश में संशोधन करे और टेलीकॉम कंपनियों को ये राहत दे कि वो केंद्र सरकार के सम़क्ष भुगतान के लिए शेड्यूल तैयार कर सके। लेकिन कोर्ट ने इन सारी याचिकाओं को खरिज कर दिया था। अब दूरसंचार आय को भी AGR में शामिल किया गया है। इस फैसले से टेलीकॉम कंपनियों को केंद्र को करीब 1.33 लाख करोड रुपये चुकाने हैं।