SC सख्त, अब राजनीतिक पार्टियों को दागी उम्मीदवारों की देनी होगी सोशल मीडिया पर पूरी जानकारी

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मध्यप्रदेश: SC ने स्पीकर से पूछा 6 विधायकों के इस्तीफे स्वीकार, बाकी के क्यों नहीं

नई दिल्ली। लगातार राजनीति में बढ़ते जा रहे अपराधी प्रवत्ति के उम्मीदवारों के चलते अब सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रूख अपनाया है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि राजनीतिक पार्टियां ऐसे उम्मीदवारों के आपराधिक मामलों की जानकारी अपनी वेबसाइटों पर अपलोड करेंगी। यही नही कोर्ट ने दिशा निर्देश देते हुए कहा कि अगर आपराधिक पृष्ठभूमि के व्यक्ति को चुनावी टिकट देती है तो उसका कारण भी बताएंगी कि आखिर वो किसी बेदाग प्रत्याशी को टिकट क्यों नहीं दे पाई?

Sc Strict Now Political Parties Will Have To Give Full Information On Tainted Candidates On Social Media :

आपको बता दें कि गुरुवार को जस्टिस आर एफ़ नरीमन और जस्टिस एस रविन्द्रभट ने चुनाव आयोग और याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय की दलीलें सुनने के बाद अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था और आज फैसला सुनाया गया। इस दौरान कोर्ट ने ये भी निर्देश दिया है कि राजनीतिक पार्टियों को उम्मीदवार के आपराधिक रिकॉर्ड के बारे में तमाम जानकारी अपने आधिकारिक फेसबुक और ट्विटर हैंडल पर देनी होगी। वहीं, पार्टियों को इस बारे में एक स्थानीय और राष्ट्रीय अखबार में भी जानकारी देनी होगी।

इसके साथ ही ऐसे उम्मीदवार के जीतने की संभावना ही नहीं बल्कि पार्टी आपराधिक पृष्ठभूमि के व्यक्ति को टिकट देने पर उसकी योग्यता, उपलब्धियों और मेरिट की उम्मीदवार चुने जाने बाद 72 घंटे के भीतर चुनाव आयोग को देनी होगी। कोर्ट का साफ रूख है कि अगर किसी पार्टी ने इन दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया तो उसके खिलाफ चुनाव आयोग कानून के तहत कार्रवाई करेगा।

नई दिल्ली। लगातार राजनीति में बढ़ते जा रहे अपराधी प्रवत्ति के उम्मीदवारों के चलते अब सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रूख अपनाया है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि राजनीतिक पार्टियां ऐसे उम्मीदवारों के आपराधिक मामलों की जानकारी अपनी वेबसाइटों पर अपलोड करेंगी। यही नही कोर्ट ने दिशा निर्देश देते हुए कहा कि अगर आपराधिक पृष्ठभूमि के व्यक्ति को चुनावी टिकट देती है तो उसका कारण भी बताएंगी कि आखिर वो किसी बेदाग प्रत्याशी को टिकट क्यों नहीं दे पाई? आपको बता दें कि गुरुवार को जस्टिस आर एफ़ नरीमन और जस्टिस एस रविन्द्रभट ने चुनाव आयोग और याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय की दलीलें सुनने के बाद अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था और आज फैसला सुनाया गया। इस दौरान कोर्ट ने ये भी निर्देश दिया है कि राजनीतिक पार्टियों को उम्मीदवार के आपराधिक रिकॉर्ड के बारे में तमाम जानकारी अपने आधिकारिक फेसबुक और ट्विटर हैंडल पर देनी होगी। वहीं, पार्टियों को इस बारे में एक स्थानीय और राष्ट्रीय अखबार में भी जानकारी देनी होगी। इसके साथ ही ऐसे उम्मीदवार के जीतने की संभावना ही नहीं बल्कि पार्टी आपराधिक पृष्ठभूमि के व्यक्ति को टिकट देने पर उसकी योग्यता, उपलब्धियों और मेरिट की उम्मीदवार चुने जाने बाद 72 घंटे के भीतर चुनाव आयोग को देनी होगी। कोर्ट का साफ रूख है कि अगर किसी पार्टी ने इन दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया तो उसके खिलाफ चुनाव आयोग कानून के तहत कार्रवाई करेगा।