SC ने केंद्र सरकार से मांगा जबाब, क्यों केंद्रीय विद्यालयों में होनी चाहिए हिन्दी प्रार्थना

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Sc To Decide If Kendriya Vidyalayas Promote A Religion Through Prayer Seeks Centre Response

नई दिल्ली। केंद्रीय विद्यालयों में होने वाली प्रार्थना को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से है कि आखिर क्या वजह है कि इस स्कूलों में हिन्दी में ही प्रार्थना होनी चाहिए। हिंदी प्रार्थना में संस्कृत के अधिकतर शब्द होने की वजह यह विशेष धर्म के लोगों को प्रभावित करता है। एससी ने सरकार से सवाल पूछा है कि ऐसे स्कूल जब सरकारी सहयोग से चलते हैं फिर ऐसा क्यों ?

असतो मा सदगमय!
तमसो मा ज्योतिर्गमय!
मृत्योर्मामृतं गमय!
ऊँ शान्तिः शांतिः शान्तिः..

जैसी ऋचाओं पर कोर्ट ने नोटिस जारी कर सवाल किया है कि क्या रोजाना सुबह स्कूल में होने वाली हिंदी और संस्कृत की प्रार्थना से किसी धार्मिक मान्यता को बढ़ावा मिल रहा है? इसकी जगह कोई सर्वमान्य प्रार्थना क्यों नहीं कराई जा सकती? इन सभी सवालों के जवाब कोर्ट ने 4 हफ्ते में मांगे हैं। विनायक शाह ने कोर्ट में याचिका लगाई, इनके बच्चे केंद्रीय विद्यालय में पढ़ रहे हैं। याचिका में उन्होंने कहा कि देशभर में पिछले 50 सालों से 1125 केंद्रीय विद्यालयों की प्रार्थना में ये ऋचाएं शामिल हैं। इस प्रार्थना में और भी ऋचाएं शामिल हैं, जिनमें एकता और संगठित होने का संदेश है।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि केंद्रीय विद्यालयों में होने वाली हिंदी प्रार्थना हिन्दू धर्म को बढ़ावा दे रही है। इन प्रार्थनाओं में संस्कृत के शब्द भी आते हैं। सरकार द्वारा चलाए जा रहे स्‍कूलों में ऐसा नहीं होना चाहिए। याचिका में कहा गया है कि ये संविधान के अनुच्छेद 25 और 28 के खिलाफ है और इसे इजाजत नहीं दी जा सकती है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से अपील की है कि सरकारी मदद से चलने वाले विद्यालयों में एक खास धर्म को बढ़ावा देने वाली प्रार्थना पर रोक लगनी चाहिए।

नई दिल्ली। केंद्रीय विद्यालयों में होने वाली प्रार्थना को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से है कि आखिर क्या वजह है कि इस स्कूलों में हिन्दी में ही प्रार्थना होनी चाहिए। हिंदी प्रार्थना में संस्कृत के अधिकतर शब्द होने की वजह यह विशेष धर्म के लोगों को प्रभावित करता है। एससी ने सरकार से सवाल पूछा है कि ऐसे स्कूल जब सरकारी सहयोग से चलते हैं फिर ऐसा क्यों…