योगी सरकार में भी नहीं माने घोटालेबाज, 5000 नर्सों की भर्ती में सामने आई धांधली

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के ईमानदार छवि वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार को सबसे बड़ा खतरा उनके जिम्मेदार मंत्रियों के सिपहसलार नौकरशाहों से है। ये नौकरशाह जिस तरह से नियमों और कायदों की अनदेखी कर रहे हैं, उसका नतीजा 22 दिसंबर को सामने आए 5000 नर्सों की भर्ती प्रक्रिया में घोटाले के रूप में सामने आया है। जहां 90 अंकों की लिखित परीक्षा में 3 अंक पाने वाले उम्मीदवार को नौकरी मिल गई है, लेकिन 64 अंक पाकर अपनी काबलियत साबित करने वाले उम्मीदवार को निराशा हाथ लगी है। जिसके बाद परीक्षा के परिणाम पर उंगलियां उठने लगीं हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश में नेशनल हेल्थ मिशन के तहत 5000 नर्सों की भर्ती के लिए 5 दिसंबर को लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। 90 अंकों की लिखित परीक्षा के बाद जिलास्तर पर काउंसिलिंग के माध्यम से उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया को पूरा कर एनआईसी की वेबसाइट के माध्यम से परिणामों की घोषणा की गई।

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इस पूरी चयन प्रक्रिया में शीर्ष अधिकारियों ने कटआॅफ सिस्टम को शामिल नहीं किया। जिस वजह से लिखित परीक्षा 3.33 प्रतिशत अंक हासिल करने वाले उम्मीदवारों ने भी काउंसलिंग में हिस्सा लिया। कुछ जिले ऐसे रहे जहां काउंसलिंग में भारी संख्या में अभ्यार्थी शामिल हुए और मेरिट काफी हाई हो गई। वहीं कुछ जिलों में काउंसलिंग में शामिल होने के लिए पर्याप्त संख्या में अभ्यार्थी न होने की स्थिति में लिखित परीक्षा में न्यूनतम अंक पाने वालों का चयन ​कर लिया गया।

कहां हुई झोल —

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नेशनल हेल्थ मिशन, परिवार कल्याण मंत्री रीता बहुगुणा जोशी के अधिका​र क्षेत्र में आता है। नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के तहत चलने वाली तमाम योजनाओं की निगरानी के लिए एक आईएएस अधिकारी को प्रबंध निदेशक के रूप में तैनात किया जाता है। वर्तमान समय में एनएचएम के प्रंबध निदेशक पंकज कुमार हैं। इस ​मामले पर एमडी पंकज कुमार के कार्यालय के दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया। जहां एमडी साहब के बैठक में होने की बात कहकर बाद में बात करवाने का हवाला देते हुए हमारा मोबाइल नंबर लिख लिया गया। खबर लिखे जाने तक एनएचएम की ओर से किसी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।

विभाग में नियुक्ति की परीक्षा एक निजी एजेंसी की ओर से करवाई गई थी। जिसे प्रमुख सचिव परिवार कल्याण और एमडी एनएचएम की ओर से भर्ती प्रक्रिया की गाइड लाइन दी गई थी। इस गाइड लाइन में कटआॅफ लिस्ट जारी करने का कोई प्रावधान नहीं रखा गया था।

क्या हैं आरोप —

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सूत्रों की माने तो 5000 नर्सों की भर्ती के मामले में बड़े स्तर पर धांधली हुई है। एक सोची समझी साजिश के तहत कटआॅफ लिस्ट जारी करने का प्रवधान हटाया गया था। कट आॅफ लिस्ट जारी न होने की वजह से आवेदकों को इस बात की जानकारी नहीं मिल सकी कि वे किस जिले की काउंसलिंग में हिस्सा लें। परिणामस्वरूप आवेदकों ने अपनी सुविधा को देखते हुए जिले का चुनाव किया। कुछ जिले ऐसे रहे जहां लिखित परीक्षा के आधार पर बनी मेरिट हाई रही और जबकि कुछ जिलों में मेरिट का मतलब केवल परीक्षा में सम्मलित होना भर रह गया।

लिखित परीक्षा के नाम पर हुआ खिलवाड़—

किसी 90 अंको की परीक्षा में 64 अंक पाने वाले को फेल और 90 में से 3 अंक पाने वाले को नौकरी मिल जाना अपने आप में सवाल खड़ा करता है। लिखित परीक्षा का औचित्य ही योग्य आवेदकों का चुनाव करने के लिए होता है, लेकिन जब योग्यता को नजरंदाज कर अयोग्य आवेदक का चुनाव किया जाए, तो लिखित परीक्षा को खिलवाड़ कहा ही उचित होगा।

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के ईमानदार छवि वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार को सबसे बड़ा खतरा उनके जिम्मेदार मंत्रियों के सिपहसलार नौकरशाहों से है। ये नौकरशाह जिस तरह से नियमों और कायदों की अनदेखी कर रहे हैं, उसका नतीजा 22 दिसंबर को सामने आए 5000 नर्सों की भर्ती प्रक्रिया में घोटाले के रूप में सामने आया है। जहां 90 अंकों की लिखित परीक्षा में 3 अंक पाने वाले उम्मीदवार को नौकरी मिल गई है, लेकिन 64 अंक पाकर अपनी काबलियत साबित करने…
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