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BJP में शामिल होते ही सिंधिया की बढ़ी मुश्किलें, जमीन से जुड़े मामले में फिर से जांच शुरू

By रवि तिवारी 
Updated Date

नई दिल्ली। ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल होने के बाद मध्य प्रदेश में सियासी उठापटक जारी है। इस बीच ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ कथित जमीन घोटाले मामले में फिर से जांच शुरू हो गई है। ये मामला 10 हजार करोड़ की जमीन के घोटाले का है। उनपर एक ही जमीन को कई बार बेचने का आरोप  है। साथ ही सरकारी जमीन को भी बेचने का आरोप है। 2014 में मामले की जांच हो चुकी है।  

मध्य प्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने गुरुवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ की गई एक शिकायत के तथ्यों का फिर से जांच करने का फैसला किया। ग्वालियर में एक शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि सिंधिया ने एक संपत्ति के दस्तावेजों में हेरफेर कर 6,000 फुट की जमीन का हिस्सा शिकायतकर्ता को बेचा था। इस घटनाक्रम के बाद प्रदेश की राजनीति फिर से गरमा गई है।

2014 में पहली बार की गई शिकायत

ईओडब्लयू के एक अधिकारी ने बताया, ‘हां, सुरेन्द्र श्रीवास्तव की शिकायत के तथ्यों को फिर से सत्यापित करने के आदेश दिए गए हैं।’ ईओडब्लयू की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि सुरेंद्र श्रीवास्तव ने सिंधिया और उनके परिवार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई कि उन्होंने एक रजिस्ट्री दस्तावेज में हेरफेर कर वर्ष 2009 में ग्वालियर के महलगांव में 6,000 फुट जमीन उसे बेची।

अधिकारी ने बताया कि पहली दफा यह शिकायत 26 मार्च 2014 में की गई थी, जिसकी जांच के बाद हमने इसे 2018 में बंद कर दिया। उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ता ने 12 मार्च को फिर से हमें आवेदन दिया है। उस आधार पर हम शिकायत के तथ्यों को फिर से जांच करेंगे। प्रदेश कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता और सिंधिया समर्थक पंकज चतुर्वेदी ने कहा, सिंधिया जी के खिलाफ बदले की भावना से जो ईओडब्ल्यू की प्रक्रिया की जा रही है। उससे कुछ होने वाला नहीं है।’

सिंधिया समर्थकों की दलील

पंकज ने आगे कहा, ‘इस मामले में एक बार सबूतों के अभाव में खात्मा लग चुका है फिर भी बदले की भावना से यह सब किया जा रहा है। हमें कानून और संविधान पर पूरा भरोसा है। जहां से हमें न्याय मिलेगा और बदले लेने वाली कमलनाथ सरकार को मिलेगा करारा जवाब।’

इस बीच सिंधिया खेमे के अधिकांश विधायकों ने कांग्रेस से बागी हो कथित तौर पर अपने त्यागपत्र राजभवन को भेज दिए हैं। सभी 19 विधायक फिलहाल बेंगलुरु में ठहरे हुए हैं।  

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